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ब्लॉग की दुनिया से
 

  • बगैर आपातकाल के ही सत्ता के आगे नतमस्तक है मीडिया वाले

    क्या मौजूदा वक्त में मीडिया इतना बदल चुका है कि मीडिया पर नकेल कसने के लिए अब सरकारों को आपातकाल लगाने की भी जरूरत नहीं है। 1975 वाले उस दौर की जरूरत नहीं, जब आपातकाल लगने पर अखबार के दफ्तरों में ब्लैकआउट कर दिया जाए। संपादकों को सूचना मंत्री सामने बैठाकर बताएं कि सरकार के […]

  • पहले साल में फिर सबसे अहम सवाल बचकाने करार दिए गए

    26 मई 2014 को राष्ट्रपति भवन के खुले परिसर में नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में 45 सांसदों ने मंत्री पर की शपथ ली लेकिन देश-दुनिया की नजरें सिर्फ मोदी पर ही टिकीं। और साल भर बाद भी देश-दुनिया की नजरें सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी ही टिकी हैं। साल भर पहले शपथग्रहण समारोह में सुषमा, राजनाथ जीत […]

  • झुलसते देश की एयरकंडीशंड सरकारें

    भारत एक तीखी झुलस से घिरा हुआ है. देश का कमोबेश हर कोना विकराल गर्मी की चपेट में है. जानलेवा लू चल रही है और बड़े पैमाने पर लोग मारे जा रहे हैं. लेकिन देश का सत्ता-तंत्र वातानुकूलित ठंडई में पड़ा है. पिछली गर्मियों के मुकाबले इस साल अब तक हुई मौतों का आंकड़ा चौंकाने […]

  • मोदीजी अब मैं आपको और क्या लिखूँ?

    प्रिय नरेंद्र मोदी जी,   नया क्या लिखूं। बहुत सोचा कि आपको कुछ लिखूं लेकिन लिखूं तो कुछ नया लिखूं। एक हफ्ते से आपकी सरकार के एक साल पूरे होने पर लेख छप रहे हैं। आपने अच्छा किया चीन चले गए। बिजनेस अखबारों में तो बाकायदा सांप-सीढ़ी वाले ग्राफिक्स से बताया जा रहा है कि […]

  • हवाई जहाज में मरने पर 90 लाख का मुआवजा, मगर किसानों की चिंता नहीं

    किसानों के हक में है कौन, यह सवाल चाहे अनचाहे भूमि अधिग्रहण अध्यादेश ने राजनीतिक दलों की सियासत तले खड़ा तो कर ही दिया है। लेकिन देश में किसान और खेती का जो सच है उस दायरे में सिर्फ किसानों को सोचना ही नहीं बल्कि किसानी छोड़ मजदूर बनना है और दो जून की रोटी […]

  • आकांक्षा यादव को ब्लॉगिंग के लिए श्रीलंका में मिलेगा ”परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान”

    मई माह में आयोजित सम्मेलन में 21000/- रूपये  की धनराशि के साथ मिलेगा शीर्ष सम्मान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी ब्लॉगिंग हेतु कर चुके हैं आकांक्षा यादव को सम्मानित   इलाहाबाद की चर्चित ब्लॉगर-लेखिका आकांक्षा यादव को वर्ष 2015 के लिए सार्क देशों में दिए जाने वाले शीर्ष सम्मान "परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान'' के लिए […]

  • शाबास अरविन्द! बदलेगा युग!!

    रोम एक दिन में नहीं बना था। हमें स्वतंत्रता एक दिन या एक साल या एक सदी में प्राप्त नहीं हुई थी। यह संघर्ष भी बहुत लम्बा है और कोई समय सीमा तय नहीं की जा सकती। 125 करोड़ देशवासियों की आत्मा को झकझोरना कोई आसान काम नहीं है। बिना समुचित साधनों के एक आश्चर्यजनक […]

  • कितने पाक़-साफ हैं हमारे माननीय न्यायमूर्ति, एक युवती का खुलासा

    एक युवा महिला वकील ने आरोप लगाया है कि हाल ही में रिटायर में हुए सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने पिछले साल दिसंबर में उनका यौन उत्पीड़न किया था। नैशनल यूनिवर्सिटी ऑफ जूर्डिशल साइंसेज, कोलकाता से ग्रैजुएशन करने वाली महिला वकील उस जज के साथ बतौर इंटर्न काम कर रही थीं। वकील ने 'जर्नल […]

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