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हिन्दी जगत
 

  • डॉ. रैणा हिंदी सलाहकार समिति में

    प्रसिद्ध साहित्यकार और शिक्षाविद डॉ. शिबन कृष्ण रैणा को भारत सरकार द्वारा  हाल ही में जारी की गयी विज्ञप्ति के अनुसार “विधि एवं न्याय मंत्रालय” की हिंदी सलाहकार समिति में गैर-सरकारी सदस्य के तौर पर मनोनीत किया गया है। कई पुरस्कारों एवं सम्मानों से समादृत डॉ. रैणा वर्ष १९९९ से लेकर २००१ तक भारतीय उच्च […]

  • हिन्दी समय पर इस बार भारतीय साहित्य के नवजागण की चर्चा

    अठारह सौ सत्तावन भारतीय इतिहास का एक प्रस्थान बिंदु है। आज जिस काल-खंड को हम रेनेसाँ, पुनर्जागरण या नवजागरण जैसे नामों से पुकारते हैं वह अठारह सौ सत्तावन के बाद ही दृश्य में आता है। हिंदी समय (http://www.hindisamay.com) पर इस बार हम हिंदी के शीर्ष चिंतकों में से एक नामवर सिंह का व्याख्यान उन्नीसवीं सदी […]

  • चीन में भी हिन्दी और हिन्दी वालों का जलवा

    आप को मालूम है कि चीन में हिंदी पढ़ने-पढाने की शुरुआत सन 1945 में हो गई थी जब पीकिंग युनिवर्सिटी में हिंदी विभाग शुरु हुआ,और एक समय वह भी था जब पीकिंग युनिवर्सिटी के हिंदी विभाग में पांच-पांच छह-छह भारतीय हिंदी अध्यापक थे। आज पीकिंग युनिवर्सिटी का हिंदी विभाग दक्षिण एशिया स्कूल का एक भाग […]

  • केदारनाथ सिंह ने राजनांदगांव में पढ़ी थी कविता

    49वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात हिन्दी कवि केदारनाथ सिंह ने राजनांदगांव में मुक्तिबोध स्मारक-त्रिवेणी संग्रहालय की स्थापना के सिलसिले में 2005 में आयोजित एक काव्य गोष्ठी में श्री केदारनाथ सिंह में काव्य पाठ किया था। मुझे उस यादगार काव्य गोष्ठी के संचालन का सौभाग्य मिला था। आज वास्तव में संस्कारधानी भी सगर्व कह सकती […]

  • प्रो. पुष्पिता अवस्थी ‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन’, मुंबई की मानद समन्वय प्रभारी

    प्रो. पुष्पिता अवस्थी भारतीय दूतावास एवं भारतीय सांस्कृतिक केंद्र, पारामारिबो, सूरीनाम में पूर्व प्रथम सचिव एवं हिंदी प्रोफेसर रही हैं। वे सुप्रसिद्ध साहित्यकार, संपादक, अनुवादक, संगठनकर्ता हैं। इसके पूर्व वे जे कृष्णमूर्ति फाउन्डेशन के बसंत कॉलेज फॉर विमैन की हिंदी विभागाध्यक्ष भी रही हैं। उन्हीं के संयोजन में वर्ष 2003 में सूरीनाम में सातवाँ विश्व […]

  • बौद्धिक विमर्शों से नाता तोड़ चुके हैं हिंदी के अखबार

    हिंदी पत्रकारिता को यह गौरव प्राप्त है कि वह न सिर्फ इस देश की आजादी की लड़ाई का मूल स्वर रही, बल्कि हिंदी को एक भाषा के रूप में रचने, बनाने और अनुशासनों में बांधने का काम भी उसने किया है। हिंदी भारतीय उपमहाद्वीप की एक ऐसी भाषा बनी, जिसकी पत्रकारिता और साहित्य के बीच […]

  • हिन्दी की सेवा के लिए बालेंदु शर्मा दाधीच को राजभाषा पुरस्कार

    प्रभासाक्षी.कॉम के समूह संपादक और सुपरिचित तकनीकविद् बालेन्दु शर्मा दाधीच को सन् 2013 के आत्माराम पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। उन्हें यह पुरस्कार विज्ञान और टेक्नॉलॉजी के जरिए हिंदी भाषा के प्रति योगदान के लिए प्रदान किया जाएगा। केंद्रीय हिंदी संस्थान की ओर से दिया जाने वाला यह पुरस्कार राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले […]

  • हिंदी के विश्वदूत : डॉ. इन्दु प्रकाश पाण्डेय

    डॉ. इन्दु प्रकाश पाण्डेय और उनकी जर्मन पत्नी हाइडी से मेरी पहली मुलाकात सितंबर 2012 में जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका में विश्व हिंदी सम्मेलन के दौरान हुई । एक आकर्षक व गरिमामय व्यक्तित्व के धनी वयोवृद्ध किन्तु सक्रिय डॉ. इन्दु प्रकाश पाण्डेय और पूर्णत: भारतीयता के रंग में रंगी सहधर्मिणी उनकी जर्मन पत्नी हाइडी से हुई […]

  • विज्ञान के अध्यापक वरुण कुमार का आँखे खोलने वाला एक पत्र

    अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थी, विद्यालयों के  संचालक, शिक्षक, अंग्रेजीदां अफसर व नेता आदि अवश्य पढ़ने का कष्ट करें।   मैं लुधियाना के एक सरकारी स्कूल में बच्चों को भौतिक विज्ञान पढ़ाता हूँ और अपने कोचिंग सेंटर में एम.एस.सी. गणित के बच्चों को पढाता हूँ। मेरे पास जो बच्चे पढ़ रहे हैं वे सरकारी स्कूलों से […]

  • ‘भारतीय भाषाओं की रक्षा और राष्ट्रभाषा की प्रतिष्ठा के लिए संघर्ष करना होगा’

    हैदराबाद। उच्च शिक्षा और शोध संस्थान की स्वर्ण जयंती वर्ष के अवसर पर केंद्रीय हिंदी निदेशालय और स्टेट बैंक ऑफ़ हैदराबाद के सहयोग से आयोजित त्रिदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “मुक्तिबोध की कविता 'अंधेरे में' : अर्धशती समारोह” का उद्घाटन करते हुए प्रख्यात साहित्यकार, वर्तमान सांसद और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने कहा […]

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