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हिन्दी जगत
 

  • हिंदी भाषा को मानक रूप देने में आचार्य द्विवेदी का महत्वपूर्ण योगदान : डॉ गोयनका

    हिंदी भाषा को मानक रूप देने में आचार्य द्विवेदी का महत्वपूर्ण योगदान : डॉ गोयनका

    बाज़ार सहायक या सेवक रहे, शासक नहीं : डॉ विजयद दत्त श्रीधर आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी कि स्मृति में गोष्ठी और सम्मान समारोह

  • राष्ट्रीय ख्याति के बीसवें अम्बिकाप्रसाद दिव्य पुरस्कारों हेतु पुस्तकें आमंत्रित

    "साहित्य सदन" भोपाल द्वारा राष्ट्रीय ख्याति के बीसवे अम्बिकाप्रसाद दिव्य स्मृति प्रतिष्ठा पुरस्कारों हेतु साहित्य की अनेक विधाओं में पुस्तकें आमंत्रित की गई हैं । उपन्यास , कहानी , कविता , व्यंग , निबन्ध एवं बाल साहित्य विधाओं पर प्रत्येक के लिए इक्कीस सौ रुपये राशि के पुरस्कार प्रदान किये जायेंगे ।

  • विभोम स्‍वर का अप्रैल-जून 2017 अंक अब ऑनलाइन

    विभोम स्‍वर का अप्रैल-जून 2017 अंक अब ऑनलाइन उपलब्‍ध है। इस अंक में शामिल है :- सम्पादकीय, मित्रनामा। साक्षात्कार, अंशु जौहरी से सुधा ओम ढींगरा की बातचीत। कहानियाँ- एक कायर दास्ताँ... (हर्ष बाला शर्मा ), माँ और मोबाइल (सुदर्शन वशिष्ठ ), थी, हूँ, रहूँगी (शिवानी कोहली ), इंतज़ार

  • हिन्दी ब्लॉगिंग ने पूरा किया  14  साल का सफर  :  21 अप्रैल को बना था हिंदी का पहला ब्लॉग

    हिन्दी ब्लॉगिंग ने पूरा किया 14 साल का सफर : 21 अप्रैल को बना था हिंदी का पहला ब्लॉग

    न्यू मीडिया के इस दौर में ब्लाॅगिंग लोगों के लिए अपनी बात कहने का सशक्त माध्यम बन चुका है। राजनीति की दुनिया से लेकर फिल्म जगत, साहित्य से लेकर कला और संस्कृति से जुड़े तमाम नाम ब्लॉगिंग से जुडे हुए हैं।

  • राष्ट्रभाषा ही आत्मीय संस्कृति की अस्मिता की जनक ।

    राष्ट्रभाषा ही आत्मीय संस्कृति की अस्मिता की जनक ।

    भाषाएं सभ्यताओं की जननी है । भाषाओं में संस्कृति के स्रोत अनुस्पूत हैं। भाषाओं में हमारी अभिव्यक्ति के सूत्र समाहित हैं । हम सबकी अभिलाषाओं के स्वप्नभाषाओं में ही उजागर होते हैं। किसी भी अन्य देश की वास्तविक नागरिकता उस देश की भाषा के नागरिक होने पर ही संभव होती है ।

  • अब हर मंच पर हिंदी में ही बोलोंगे राष्ट्रपति और प्रधान मंत्री

    राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने संसदीय समीति की उस सिफारिश को मंजूरी दे दी है जिसमें यह कहा गया है कि राष्ट्रपति और प्रधानंत्री समेत सभी मंत्री और नेता सिर्फ हिंदी में ही भाषण दें। इसके बाद अब पीएम और प्रेसिडेंट भी हिंदी में ही भाषण देंगे। यह सिफारिश 'आधिकारिक भाषाओं को लेकर बनी संसदीय समिति' ने की थी।

  • अंतर राष्ट्रीय कवि सम्मेलन की सूत्रधार के रूप में अंशु जैन ने किया कमाल

    अंतर राष्ट्रीय कवि सम्मेलन की सूत्रधार के रूप में अंशु जैन ने किया कमाल

    छत्तीसगढ़ की प्रतिभाशाली बिटिया अंशु जैन ने, क़तर में प्रख्यात हास्य-व्यंग्य कवि पद्मश्री प्रो. अशोक चक्रधर की ख़ास सहभागिता वाले विराट कवि सम्मेलन को होस्ट कर अपनी प्रभावी अभिव्यक्ति क्षमता का शानदार परिचय दिया। साथ ही छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। उल्लेखनीय है कि अंशु जैन अपने इंजीनियर पति

  • क्रोएशिया के इंडोलॉजी विभाग में हिंदी एवं भारतीय संविधान दिवस का  भव्य आयोजन

    क्रोएशिया के इंडोलॉजी विभाग में हिंदी एवं भारतीय संविधान दिवस का भव्य आयोजन

    इंडोलॉजी विभाग एवं भारतीय दूतावास के संयुक्त तत्त्वावधान में पिछले दिनों हिंदी एवं भारतीय संविधान दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ श्री संदीप कुमार ,भारतीय राजदूत , प्रो. होल्जएवाक, कार्यकारी अधिष्ठाता मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय, डॉ. इवान अध्यक्ष इंडोलॉजी विभाग आदि अतिथियों के दीप प्रज्जवलन एवं अतिथि आचार्य हिंदी प्रो.रवींद्रनाथ मिश्र द्वारा मां सरस्वती की वंदना तथा छात्रा कुमारी माया रम्भा के भरतनाट्यम नृत्य से हुआ।

  • अरविंद कुमारः  हिंदी का एक मौन महर्षि जिसके आगे हर हिंदी प्रेमी नतमस्तक है

    अरविंद कुमारः हिंदी का एक मौन महर्षि जिसके आगे हर हिंदी प्रेमी नतमस्तक है

    हिंदी में टोटकेबाज़ , खेमेबाज़ , ड्रामेबाज़ , दुकानदार और जाने क्या-क्या बहुतेरे हैं पर अरविंद कुमार जैसा तपस्वी ऋषि आज की तारीख में हिंदी में कोई दूसरा नहीं । पचासी साल की उम्र में आज भी वह हिंदी के लिए जी-जान लड़ाए पड़े हैं । रोज छ से आठ घंटे काम करते हैं । कंप्यूटर पर माउस और की बोर्ड के साथ उनकी अंगुलियां नाचती रहती हैं । हिंदी और अंगरेजी के शब्दों से जूझते हुए वह जीवन में आ रहे नित नए शब्दों को अपने कोश में गूंथते रहते हैं , ऐसे जैसे कोई मालिन हों और फूलों की माला पिरो रहे हों ।

  • 70 साल बाद भी सरकारी कामकाज में हिंदी जहाँ की तहाँ

    70 साल बाद भी सरकारी कामकाज में हिंदी जहाँ की तहाँ

    दो हजार चौदह में जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार केंद्र में आई है तब से हिंदी को लेकर एक खास तरह के उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है। 2014 में ही केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों को अन्य भाषाओं के साथ हिंदी में भी जानकारी जारी करने का आदेश दिया गया था। केंद्र सरकार की सूचनाएं हिंदी में उपलब्ध भी होने लगीं । वो हिंदी कैसी हैं इस पर बाद में विचार किया जा सकता है। हिंदी के उपयोग को लेकर उत्साह का माहौल है लेकिन इसमें सरकारी कामकाज और रोजगार की भाषा बनाने

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