आप यहाँ है :

जियो तो ऐसे जियो
 

  • झारखंड की दो बेटियाँ अकेली ही साईकिल पर भारत भ्रमण पर निकल पड़ी

    झारखंड की दो बेटियाँ अकेली ही साईकिल पर भारत भ्रमण पर निकल पड़ी

    इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। कई पैरेंट्स अपनी बेटियों को सुरक्षा की दृष्टि से घर से अकेले भेजने से कतराते है, वहीं बिहार (पटना) व झारखंड (जमशेदपुर) की दो बेटियों का जज्बा यह है कि वो साइकिल से अकेले ही देश भ्रमण पर निकली है। घर वालों व मित्रों ने भी उन्हें मना किया लेकिन उनके हौंसलों और कुछ अलग करने की जिद को कोई नहीं रोका पाया। बिहार की हर्षा कुमारी और झारखंड की सावित्री मुर्मू पांच महीने से साईकिल की यात्रा करते हुए अभी 10 राज्य से होकर इंदौर पहुंची है।

  • अनाथों को आरक्षण दिलाने वाली अम्रुता करावंदे

    अनाथों को आरक्षण दिलाने वाली अम्रुता करावंदे

    आज से तकरीबन 20 साल पहले एक पिता अपनी नन्ही सी बच्ची को गोवा के एक अनाथालय में छोड़ आया था. किन हालात में उसने ये फ़ैसला लिया, उसकी क्या मजबूरियां थीं, कोई नहीं जानता.

  • गरीब मजदूर ने 600 किलोमीटर सायकिल चलाकर खोजी अपनी पत्नी

    रांची। कभी अपनी पत्नी की मौत का बदला लेने के लिए दशरथ मांझी ने पहाड़ का सीना चीर दिया था। यहां झारखंड के एक 'मांझी' ने खोई पत्नी को ढूंढ़ने के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी। लगातार 24 दिन वह साइकल से चलते रहे। गांव दर गांव भटकते रहे। 24 दिन में 600 किलोमीटर साइकल चलाने के बाद आखिरकार मेहनत रंग लाई और उनकी लापता पत्नी उन्हें मिल गईं।

  • पंचायतों से जानकारी लेकर गरीब महिलाओं को बांट देते हैं अपनी पेंशन

    पंचायतों से जानकारी लेकर गरीब महिलाओं को बांट देते हैं अपनी पेंशन

    इंदौर। एक शिक्षक लोगों को सही दिशा व ज्ञान देने के लिए समर्पित होता है। इसी उद्देश्य को ताउम्र अपनाते हुए 90 वर्षीय शिवराम आर्य 25 साल से सेवा कर रहे हैं। गांवों में सरपंचों को पत्र लिखकर दिव्यांग, विधवा, अतिवृद्ध बेसहारा महिलाओं की जानकारी मांगते हैं। इसके बाद हर माह मिलने वाली लगभग 18 हजार रुपए की पेंशन समान रूप से सभी में बांट देते हैं।

  • आचार्य विद्यासागरजी गौ संवर्धन योजना से 80 वर्षिया धीसीभाई चला रही है गौ शाला

    आचार्य विद्यासागरजी गौ संवर्धन योजना से 80 वर्षिया धीसीभाई चला रही है गौ शाला

    हरदा। कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन' कम से कम रिजगांव की 80 वर्षीय धीसीबाई को कोई और बुजुर्ग की तरह ऐसे नगमे गाने की कोई जरूरत नहीं। आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना की हितग्राही सोनाली की दादी घीसीबाई को मानो अपने बीते दिन जीने को मिल गए हैं।

  • नेताजी का ऐतिहासिक भाषणः तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा

    नेताजी का ऐतिहासिक भाषणः तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा

    4 जुलाई 1944 को बर्मा में भारतीयों के सामने दिया गया नेताजी का ये प्रेरक भाषण शब्दशः प्रस्तुत है

  • पिताजी! आपने कहा था पहचान तक खो देंगे; देखिए, मां ने मुझे नेशनल कोच बना दिया!

    पिताजी! आपने कहा था पहचान तक खो देंगे; देखिए, मां ने मुझे नेशनल कोच बना दिया!

    उज्जैन. एयर रायफल शूटिंग के नेशनल खिलाड़ी और कोच अक्षय सिंह के पिता ने 19 साल पहले पत्नी गायत्री तोमर को छाेड़ चले गए थे। उज्जैन के अलखधाम कॉलोनी में रहने वाले अक्षय तब 7 साल के थे। पर गायत्री ने मेहनत कर बेटे को नेशनल खिलाड़ी बना दिया। अक्षय यह तो नहीं जानते कि उनके पिता अब कहा है लेकिन उन्होंने उनके नाम एक खत लिखा है, ताकि मां के अपमान का जवाब दे सकें।

  • कोई ऐसे ही अनिल सिंघवी नहीं हो जाता

    कोई ऐसे ही अनिल सिंघवी नहीं हो जाता

    कई बार कोई आयोजन, कोई घटना या कोई व्यक्ति अचानक किसी रोमांच और मधुर स्मृति की तरह आपके दिलो-दिमाग पर छा जाता है। किसी व्यक्ति के ओहदे, उसके प्रभामंडल को लेकर मन में जो काल्पनिक छवि होती है, उससे उलट अगर वह व्यक्ति एकदम सामान्य, देसी और खिलाड़ीपन की भावना के साथ दिल खोलकर बात करे तो ऐसा लगता है सफलता हर किसी के सर पर चढ़कर नहीं बोलती बल्कि सफलता उसे किसी फलदार वृक्ष की तरह और विनम्र बना देती है।

  • ये अपने जन्म दिन पर मुस्कराहट बाँटते हैं

    ये अपने जन्म दिन पर मुस्कराहट बाँटते हैं

    इन्दौर। अपना और अपने करीबियों का जन्मदिन हम सभी मनाते हैं, उन्हें तोहफे देते हैं और उनके चेहरे पर मुस्कुराहट लाने का हर प्रयास करते हैं। शहर के दो युवा समाजसेवी युगल का भी हर जन्मदिन का यही सिलसिला होता था, लेकिन एक दिन में यह सबकुछ बदल गया। फाइव स्टार होटल में होने वाली पार्टी गरीब बच्चों के लिए नि:शुल्क सर्जरी शिविर लगाने में तब्दील हो गई। ये जोड़ी है युवा समाजसेवी जय सिंह और टीना जैन की। जय सिंह बताते हैं कि वे धार के पास एक छोटे से गांव टांडा के रहने वाले हैं।

  • जिंदलजी ने परिवार, समाज, धर्म और परोपकार को एक माला में पिरो दिया

    जिंदलजी ने परिवार, समाज, धर्म और परोपकार को एक माला में पिरो दिया

    समाज सेवा का कोई भी काम हो जिंदलजी आँख मूंदकर सबके साथ खड़े हो जाते हैं। वे मात्र धनराऎशि से ही मदद नहीं करते बल्कि किसी भी काम में खुद हाथ बँटाना पसंद करते हैं।

Back to Top