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जियो तो ऐसे जियो
 

  • मध्य प्रदेश: जिलाधिकारी की पहल पर बदले गए जातिसूचक 80 स्कूलों के नाम

    मध्य प्रदेश: जिलाधिकारी की पहल पर बदले गए जातिसूचक 80 स्कूलों के नाम

    देश में एक तरफ जहां अनुसूचित जाति-जनजाति कानून में हुए बदलाव के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं और दलित संगठन इस बदलाव को रद्द करने के लिए अध्यादेश लाने की मांग कर रहे हैं। इस बीच मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में सामाजिक परिवर्तन की एक अलग ज्योति जलाई गई है।

  • 78 वर्षीय व्यक्ति ने कोटा जनजाति की भाषा को ऐसे बचाया

    78 वर्षीय व्यक्ति ने कोटा जनजाति की भाषा को ऐसे बचाया

    चेन्नई। भारत के बारे में कहा जाता है कि यहां कोस-कोस में पानी बदले, चार कोस में वाणी। यानी करीब तीन किलोमीटर में पानी का स्वाद बदल जाता है और 12 किमी में भाषा बदल जाती है। यह विविधता जहां भारत की पहचान है, वहीं सैकड़ों देशज भाषाएं होने के कारण उनके खत्म होने का खतरा भी रहता है। कुछ ऐसा ही हो रहा है कोटा भाषा के साथ, जिसके खत्म होने का खतरा है।

  • पत्रकारिता का जुनून ऐसा कि हाथ से अखबार लिखते हैं दिनेश

    पत्रकारिता का जुनून ऐसा कि हाथ से अखबार लिखते हैं दिनेश

    कभी-कभी पसंदीदा काम करने का जुनून इंसान पर इस कदर हावी होता है कि वक्त न रहते हुए भी किसी तरह से थोड़ा बहुत समय निकाल ही लेता है। कुछ ऐसे हीं है मुजफ्फरनगर के शख्स दिनेश। नाम पढ़कर शायद आप इन्हें न पहचाने, लेकिन इनका काम ही इनकी पहचान है।

  • बकरियों को बचाने बाघ से भिड़ गई लड़की, जानबचाकर सेल्फी भी ली

    बकरियों को बचाने बाघ से भिड़ गई लड़की, जानबचाकर सेल्फी भी ली

    बांद्रा: क्या आप यकीन करेंगे कि महाराष्ट्र के बांद्रा जिले की 21 साल की लड़की महज के एक छड़ी के साथ ही बाघ से भिड़ गई. इतना ही नहीं, बाघ के हमले के बाद अपने लहूलुहान चेहरे के साथ उसने एक के बाद एक कई सारी सेल्फी ली और फिर उसे सोशल मीडिया यानी फेसबुक पर पोस्ट कर दिया. जी हां, दरअसल, यह डरावनी घटना 24 मार्च की है, जिसकी खबर सबको इसी सप्ताह लगी.

  • मोदीजी के गाँव में एक लड़की ने दिखाई सच्ची सह्रदयता

    गुजरात के वडनगर में पहला दिव्यांग जीवन साथी मेला आयोजित किया गया। यह मेला महाशक्ति विकलांग कल्याण संघ ने अन्य संस्थाओं के सहयोग से आयोजित किया। मेले की सबसे बड़ी खासियत ये थी कि इसमें दिव्यांग युवक युवतियों को प्राथमिकता दी गई थी। सम्मेलन में केवल गुजरात ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र से भी लोग आए थे। यहां 13 लड़कियां और 145 लड़के अपना जीवनसाथी चुन्ने आए थे।

  • विश्नोई समाजः जिसने सलमान खान को जेल के सींखचों में पहुँचाया

    विश्नोई समाजः जिसने सलमान खान को जेल के सींखचों में पहुँचाया

    राजस्थान का यह बिश्नोई समाज जोधपुर के पास पश्चिमी थार रेगिस्तान से आता है. इन्हें प्रकृति के प्रति प्रेम के लिए जाना जाता है. इस समाज के लोग जानवरों को भगवान समझते हैं. 1485 में गुरु जम्भेश्वर भगवान ने इसकी स्थापना की थी। वन्यजीवों को यह समाज अपने परिवार जैसा मानता है और पर्यावरण संरक्षण में इस समुदाय ने बड़ा योगदान दिया है। इस संप्रदाय के लोग जात-पात में विश्वास नहीं करते हैं। इसलिए हिन्दू-मुसलमान दोनों ही जाति के लोग इनको स्वीकार करते हैं। जंभसार लक्ष्य से इस बात की पुष्टि होती है कि सभी जातियों के लोग इस संप्रदाय में दीक्षित हुए। उदाहरण के लिए ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, तेली, धोबी, खाती, नाई, डमरु, भाट, छीपा, मुसलमान, जाट एवं साईं आदि जाति के लोगों ने मंत्रित जल लेकर इस संप्रदाय में दीक्षा ग्रहण की।

  • फलों का सस्ता रस पिलाकर खड़ी की 2 हजार करोड़ की कंपनी

    फलों का सस्ता रस पिलाकर खड़ी की 2 हजार करोड़ की कंपनी

    इन दिनों उत्तर भारत में लू के थपेड़े लोगों का गला सुखा रहे हैं। लेकिन देश की एक बड़ी आबादी आज भी जूस या कोल्ड्रिंक्स पर पैसे खर्च करने की सामर्थ्य नहीं रखती है। जमीन से जुड़े शख्स धीरेंद्र सिंह को इस बात का इल्म था, इसलिए पेय पदार्थों के बड़े और महंगे ब्रांड्स को देखते हुए उन्होंने किफायती ब्रांड खड़ा कर दिया। गांवों और कस्बों से अगर आपका वास्ता है तो ‘मनपसंद’ नाम का मैंगो जूस जरूर पिया होगा या वह आपकी नजरों से होकर गुजरा होगा। अब यह ब्रांड बड़े शहरों में भी पैर जमा रहा है। इसे शुरू करने वाले 55 वर्षीय धीरेंद्र सिंह की कहानी प्रेरित करती है। मशहूर मैगजीन फोर्ब्स इंडिया के मुताबिक धीरेंद्र सिंह ने मैंगो जूस बेचकर 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति बना ली। धीरेंद्र सिंह उत्तर भारत के ग्रामीण इलाकों में पले-बढ़े हैं, लेकिन उन्होंने अपनी कंपनी मनपसंद बेवरेजेस गुजरात में शुरू की।

  • 40 साल से भारत में रहकर गौसेवा कर रही जर्मन महिला को देश छोड़ना पड़ेगा

    40 साल से भारत में रहकर गौसेवा कर रही जर्मन महिला को देश छोड़ना पड़ेगा

    जर्मनी की रहने वाली एक महिला को भारत यात्रा के दौरान गायों से ऐसा प्यार हुआ कि वह पिछले 40 सालों से मथुरा के गोवर्धन में रहकर बीमार गायों, बछड़ों की सेवा कर रही हैं। लेकिन अब कानूनी अड़चनों के कारण इस जर्मन महिला को वापस अपने देश लौटना होगा। बता दें कि जर्मनी की रहने वाली फ्रेडरिक इरिन ब्रूनिंग 1972 में भारत घूमने आयी थी। इस दौरान जब वह ब्रज भूमि आयी तो उन्हें सड़क किनारे एक गाय तड़पती दिखाई दी। इससे फ्रेडरिक इरिन काफी दुखी हुई और उन्होंने भारत में रहकर ही गायों की सेवा करने का संकल्प ले लिया। ब्रूनिंग ने गोवर्धन के राधा कुंड से कुछ ही दूरी पर स्थित कोन्हई गांव में 5 बीघा जमीन किराए पर लेकर गायों की सेवा शुरु कर दी। इतना ही नहीं ब्रूनिंग ने अपना नाम भी बदलकर सुदेवी दासी रख लिया और गायों की सेवा में ही अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।

  • हैदराबाद  के नेक पुलिसवाले की हो रही है वाहवाही

    हैदराबाद के नेक पुलिसवाले की हो रही है वाहवाही

    अक्‍सर ट्रैफिक पुलिस के भ्रष्‍टाचार की खबरें आती रहती हैं लेकिन हैदराबाद ट्रैफिक पुलिस की एक तस्‍वीर इन दिनों सोशल मीडिया में वायरल हो रही है। इस तस्‍वीर में ट्रैफिक होमगार्ड बी गोपाल एक बेघर महिला को खाना खिला रहे हैं। बी गोपाल का यह मानवीय चेहरा लोगों के दिलों को छू गया और वे सोशल मीडिया पर इस तस्‍वीर को खूब शेयर कर रहे हैं।

  • भारतीय चाय पिलाकर अमरीकी महिला ने कमाए 200 करोड़

    भारतीय चाय पिलाकर अमरीकी महिला ने कमाए 200 करोड़

    हमारे यहां लोगों को चाय पीना खूब भाता है, कुछ लोगों की आदत ऐसी होती है कि बिना चाय के वह एक कदम चल भी नहीं सकते. आप भले ही समझते होंगी कि कोई पांच-दस रुपये की चाय से पेट पाल सकता है, मगर लखपति-करोड़पति नहीं बन सकता. मगर हमारे देश में आज भी ऐसे कई लोग हैं जो चाय बेचकर न सिर्फ लाखपति हुए हैं, बल्कि सुख-सुविधा की जिंदगी जी रहे हैं. देसी व्यक्ति कोई चाय बेचकर लाखपति हो जाए तो उसमें हैरानी नहीं होती, मगर हैरानी तो आपको तब होगी जब आपको पता चलेगा कि कोई विदेशी सिर्फ चाय बेचकर ही करोड़पति बन गया. दरअसल, अमेरिका की एक महिला चाय बेचकर ही करोड़पति बन गई है. पिछले दो-तीन दिनों से ब्रुक एडी अमरीकी मीडिया में अपनी भारतीय भक्ति चाय ब्रांड की इस सफलता से छाई हुई है और सभी प्रमुख अमरीकी अखबारों ने उनकी सफलता पर विस्तार से रिपोर्ट प्रकाशित की है।

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