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जियो तो ऐसे जियो
 

  • एक लाचार और गरीब पिता के बच्चे की जान बचाने आगे आये युवक

    राजस्थान पत्रिका ने खबर दी है कि उज्जैन के युवाओं की संस्था  युवा उज्जैन ने सोशल मीडिया वाट्सअप पर एक परिवार के चिराग को बचाने की मुहिम चलाई और संदेश पढ़कर  लोगों ने ऑपरेशन के लिए मदद देना शुरू कर दी। तीन दिन में 30 हजार रूपए जुट गए, अब इलाज के लिए 20 हजार […]

  • फ़िरदौस ख़ान ने किया वंदे मातरम का पंजाबी अनुवाद

    स्टार न्यूज़ एजेंसी की संपादक फ़िरदौस एवं युवा पत्रकार फ़िरदौस ख़ान ने वंदे मातरम का पंजाबी में अनुवाद किया है. वंदे मातरम भारत का राष्ट्रीय गीत है. इसकी रचना बंकिमचंद्र चटर्जी ने की थी. अरबिंदो घोष ने इस गीत का अंग्रेज़ी में और वरिष्ठ साहित्यकार मदनलाल वर्मा क्रांत ने वंदे हिन्दी में अनुवाद किया था. […]

  • वनवासी कल्याण आश्रम द्वारा मेडिकल कैंप का आयोजन

    मुंबई के वनवासी कल्याण आश्रम के श्री सुशील जाजू के प्रयासों से मुंबई क मालड की समाज सेवी संस्था हेतु व डॉ. श्याम अग्रवाल द्वारा संचालित संजीवनी चंद्रभाल अगरवाल चैरिटेबल ट्रस्ट मलाड द्वार मुंबई से 150 किलोमीटर दूर स्थित वनवासी क्षेत्र विलशेत, सोमटा (विक्रमगढ़) में वनवासियों के लिए मेडिकल कैंप का आयोजन किया गया। रविवार, […]

  • आतंक की दुनिया से अध्यात्म में लौटे अहमद अक्कारी

    इस्लाम की रक्षा के नाम पर डेनमार्क के अहमद अक्कारी ने सात साल पहले पूरी दुनिया में ऐसी आग भड़काई जिसमें करीब 200 लोगों की जान चली गई. तब वह 27 साल का था और बदले की आग से धधक रहा था. अब पश्चात्ताप की आंच से पिघलकर वह धार्मिक सद्भावना का भक्त बन गया […]

  • इन्होंने अंधेरी दुनिया को अपने जज्बे से रोशन किया

    कोलकाता के सावित्री गर्ल्स कॉलेज में आलिफिया तुंडावाला को खासे सम्मान के साथ देखा जाता है। वे राजनीति शास्त्र की प्रोफेसर तथा कार्यकारी विभागाध्यक्ष तो हैं ही, सबके लिए प्रेरणास्रोत भी हैं। कारण यह कि उन्होंने अपनी शारीरिक कमी के चलते पेश आई सारी चुनौतियों को ध्वस्त कर दिया और आज मानव जिजीविषा की मिसाल […]

  • एक शिक्षक जो तैरकर छात्रों को पढ़ाने जाता है!

    अब्दुल मलिक पिछले बीस साल से प्रत्येक दिन नदी को तैरकर पार करके एक दूसरे गाँव के स्कूल में पढ़ाने जाते हैं.  भारत के दक्षिण राज्य केरल के एक छोटे से गाँव में रहने वाले गणित के शिक्षक अब्दुल मलिक ने 20 साल में आज तक कभी स्कूल पहुंचने में देरी नहीं की और न […]

  • ये लड़ाई पैसे के लिए नहीं थी, 6 करोड़ तो मुकदमेबाजी में ही खर्च हो गए!

    चिकित्सीय लापरवाही के एक मामले में लगभग छह करोड़ रुपये का मुआवज़ा पाने वाले कुणाल साहा का कहना है कि उनकी लड़ाई कभी भी पैसे के लिए नहीं थी.  अमरीका में रहने वाले भारतीय मूल के डॉक्टर साहा का कहना है कि ये लड़ाई भारत में चिकित्सीय लापरवाही के हालात के खिलाफ़ थी जिसके फ़ैसले […]

  • एक भारतवंशी ने चुनौती दी ब्रिटिश संसद को

    लंदन। सदस्यता लेने से वंचित किए जाने से नाराज भारतीय मूल के अरबपति ब्रिटिश कारोबारी रमिंदर सिंह रैंगर ने हाउस ऑफ लॉड्‌र्स को अदालत में घसीट लिया है। भारतवंशी रैंगर का आरोप है कि गलत, झूठी और भेदभावपूर्ण जानकारियों के जरिये उन्हें दो बार हाउस आफ लॉर्ड्‌स की सदस्यता लेने से रोक दिया गया। लंदन […]

  • मलेशिया के एक हिन्दू की शानदार पहल

    मलेशिया में रहने वाले उथया शंकर का जन्म हिंदू परिवार में हुआ लेकिन बचपन में वे अकसर चर्च जाते थे और कभी-कभी मस्जिद में भी खेलते भी थे।  वे कहते हैं कि अलग अलग धर्मों के लोगों से मिलने में बहुत मज़ा आता था। लेकिन 90 का दशक आते आते चीज़ें बदलने लगीं।  संबंधित समाचार […]

  • किसान के बेटे ने बनाया नायाब उपकरण

    कहावत है, दीवारों के भी कान होते हैं। एक किसान के बेटे ने वाकई यह 'कान' बना दिया। सौ मीटर के दायरे में मोबाइल फोन पर या आपस में कनबतिया हो रही हैं, तो यह 'कान' सुन लेगा। इसके निर्माण पर लागत आई है मात्र पांच हजार रुपये और नाम रखा गया है मल्टीटॉस्किंग मशीन। […]

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