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जियो तो ऐसे जियो
 

  • अगले बजट में नई गाड़ियों का झुनझुना नहीं बजाएंगे श्री सुरेश प्रभु

    अगले बजट में नई गाड़ियों का झुनझुना नहीं बजाएंगे श्री सुरेश प्रभु

    हर साल बड़ी संख्या में नई ट्रेनों की घोषणा कर रेल बजट को राजनीतिक पटरी पर दौड़ने की परंपरा बीते जमाने की बात होने जा रही है। इस कड़ी में रेल मंत्री सुरेश प्रभु के रेल बजट 2016-17 में जनता के लिए एक भी नई ट्रेन की सौगात नहीं होगी। यह दूसरा मौका होगा जब प्रभु रेल बजट में नई ट्रेनों की घोषणा नहीं करेंगे। मोदी सरकार के कदम को रेल बजट को राजनीतिक चक्रव्यूह से निकलाने के प्रयासों के तहत देखा जा रहा है।

  • ये लड़की  ज़रूरतमंदों को देती है व्हीलचेयर जैसे कई उपकरण सिर्फ १ रूपये में !

    ये लड़की ज़रूरतमंदों को देती है व्हीलचेयर जैसे कई उपकरण सिर्फ १ रूपये में !

    विकलांगो की मदद के लिए साधन ज़्यादातर बहुत महंगे होते है। एक व्हीलचेयर की कीमत हज़ारो में होती है, वही बैसाखियाँ खरीदने के लिए भी कुछ सौ रूपये आपको खर्च करने ही पड़ते है। कई बार तो इस्तेमाल करने वाले को बहुत कम समय के लिए इनकी ज़रूरत होती है। वड़ोदरा की फाल्गुनी दोशी ने इन साधनो को कम दाम में ज़रूरतमंदों तक पहुचाने का बीड़ा उठाया।

  • उस गूँगे बहरे को लोग पागल समझते रहे, उसने कबाड़ से हवाई जहाज बना दिया

    उस गूँगे बहरे को लोग पागल समझते रहे, उसने कबाड़ से हवाई जहाज बना दिया

    बचपन से गूंगे-बहरे साजी थॉमस को इडुक्‍की के दूरस्‍थ गांव में लोग 'इडियट' कहते थे, मगर उसने अपनी मेहनत से ऐसा कारनामा कर दिया है, जिसने हर किसी को हैरत में डाल दिया है। 45 वर्षीय साजी ने कबाड़ और रीसाइकिल्‍ड चीजों से दो सीटों वाला अल्‍ट्रालाइट एयरक्राफ्ट बनाया है।

  • किसानों के दर्द में ऐसा जुड़िए जैसा जुड़ते हैं शिवराज

    किसानों के दर्द में ऐसा जुड़िए जैसा जुड़ते हैं शिवराज

    किसानों की बदहाली, बाढ़ व सूखा जैसी आपदाएं भारत जैसे देश में कोई बड़ी सूचना नहीं हैं। राजनीति में किसानों का दर्द सुनने और उनके समाधान की कोई परंपरा भी देखने को नहीं मिलती। किंतु पिछले कुछ दिनों में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जिस शैली में अपनी पूरी सरकारी मशीनरी में किसानों के दर्द के प्रति संवेदना जगाने का प्रयास कर रहे हैं वह अभूतपूर्व है।

  • किसानों को भजन सुनाकर आत्महत्या से बचा रहे हैं वरिष्ठ अधिकारी विजय कुमार

    किसानों को भजन सुनाकर आत्महत्या से बचा रहे हैं वरिष्ठ अधिकारी विजय कुमार

    औरंगाबाद (महाराष्ट्र)। सूखे की चपेट में आने वाले किसान आत्महत्या न करें, इसके लिए एक अधिकारी ने अनोखी तरकीब खोज निकाली है। वे सफेद धोती-कुर्ता पहनकर और सिर पर पगड़ी बांधकर सूखा पीडित गांव में जाते हैं और भक्ति भरे गीत गाकर और वीणा बजाकर लोगों को प्रेरित करते हैं कि उनका जीवन कितना अमूल्य है।

  • ज़रूरत है ईमानदार को सम्मानित करने की

    ज़रूरत है ईमानदार को सम्मानित करने की

    मौजूदा दौर में माना जा रहा है कि दुखी बढ़ रहे हैं या यह कहें कि सुखी कम हो रहे हैं। वैसे दोनों बातें एक ही हैं लेकिन एक प्रश्न है 'सुख को बढ़ाने से दु:ख कम होगा या दु:ख को घटाने से सुख बढ़ेगा ?' इन दोनों में से कौन सी बात सही है ? असल में मनुष्य का दु:ख कम करने के लिए उसे सुखी करना आवश्यक है।

  • घर-घर से रोटियाँ इकठ्ठी कर गौशाला की गायों को देते हैं मेहरुद्दीन

    घर-घर से रोटियाँ इकठ्ठी कर गौशाला की गायों को देते हैं मेहरुद्दीन

    जहां देश में गो तस्करी और बीफ को लेकर बवाल मचा हुआ है, वहीं अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित जैसलमेर जिले के रहने वाले हाजी मेहरुद्दीन सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल पेश कर रहे हैं। वह गायों की बचपन से ही सेवा कर रहे हैं। उनके लिए गाय की जिंदगी ज्यादा कीमती है, उसका बीफ नहीं। गोभक्त मेहरुद्दीन गत 15 वर्षों से सुबह घर से निकलते हैं और रोटियां एकत्रित कर गायों को खिलाते हैं।

  • निरक्षर आदिवासियो की आवाज़ बना सीजीनेट स्वर

    निरक्षर आदिवासियो की आवाज़ बना सीजीनेट स्वर

    भारत की आबादी का एक बड़ा हिस्सा आज भी दूरदराज के जंगलों में रहता है। ये वे लोग हैं जिन्हें हम आदिवासी के रुप में जानते हैं, ये वे लोग हैं जो विकास के रास्ते पर दौड़ते इस देश में आज भी मूलभूत सुविधाओं से महरुम हैं। ये वे लोग हैं जो अपनी आवाज को समाज के उस तबके तक पहुंचाने की कोशिश में अपना जीवन बिता देते हैं और जब अंत तक उनकी आवाज कोई नहीं सुनता तो फिर उठा लेते हैं बंदूक और बजा देते हैं आंदोलन का बीगूल।

  • मुख्यमंत्री बाल ह्रदय सुरक्षा में संवेदना की धड़कनें

    मुख्यमंत्री बाल ह्रदय सुरक्षा में संवेदना की धड़कनें

    बच्चों के दिलों की धड़कनों को सुनने के लिए लगता है कि सचमुच बच्चों जैसा कोमल दिल चाहिए। एक मासूम-सी चाहत जहाँ अनजाने में ही आने वाले कल को कुछ कर दिखाने का वचन दे रही हो उस चाहत को किसी भी सूरत में आहत नही न होने देना वास्तव में एक बड़ी जिम्मेदारी और

  • कभी स्व.कलाम के ड्राइवर थे, अब इतिहास के प्रोफेसर हैं!

    कभी स्व.कलाम के ड्राइवर थे, अब इतिहास के प्रोफेसर हैं!

    कभी सेना में कलाम के ड्राइवर रहे कथीरेसन अब कॉलेज में इतिहास के असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। कथीरेसन और कलाम का साथ लंबा रहा और उनका मानना है कि इस साथ ने ही उनकी जिंदगी बदली।

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