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जीवन शैली
 

  • हम कहाँ जा रहे हैं !

    एक समय था जब हमारे युवाओं के आदर्श, सिद्धाँत विचार, चिंतन और व्यवहार सब कुछ भारतीय संस्कृति के रंग में रँगे हुए होते थे। वे स्वयं ही अपनी संस्कृति के संरक्षक थे, परंतु आज उपभोक्तावादी पाश्चात्य संस्कृति की चकाचौंध से भ्रमित युवा वर्ग को भारतीय संस्कृति के अनुगमन में पिछड़ेपन का अहसास होने लगा है।

  • परिवार को पतन की पराकाष्ठा न बनने दे

    परिवार को पतन की पराकाष्ठा न बनने दे

    वर्तमान दौर की एक बहुत बड़ी विडम्बना है कि पारिवारिक परिवेश पतन की चरम पराकाष्ठा को छू रहा है। अब तक अनेक नववधुएँ सास की प्रताड़ना एवं हिंसा से तंग आकर भाग जाती थी या आत्महत्याएँ कर बैठती थी वहीं अब नववधुओं की प्रताड़ना एवं हिंसा से सास उत्पीड़ित है, परेशान है।

  • बिना जन जागरुकता टीबी से बचाव असंभव

    बिना जन जागरुकता टीबी से बचाव असंभव

    टीबी (क्षय रोग) एक घातक संक्रामक रोग है जो कि माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस जीवाणु की वजह से होती है। टीबी (क्षय रोग) आम तौर पर ज्यादातर फेफड़ों पर हमला करता है, लेकिन यह फेफड़ों के अलावा शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित कर सकता हैं। यह रोग हवा के माध्यम से फैलता है। जब क्षय रोग से ग्रसित व्यक्ति खांसता, छींकता या बोलता है तो उसके साथ संक्रामक ड्रॉपलेट न्यूक्लिआई उत्पन्न होता है जो कि हवा के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है।

  • जीवन की राहः शांति की चाह

    जीवन की राहः शांति की चाह

    आज हर व्यक्ति शांति और खुशी को तलाश रहा है। कुछ लोग भौतिक चीजों में शांति और खुशी ढूंढ़ते हैं तो कुछ नाम एवं प्रसिद्धि में । कई लोग मनोरंजन को इसका माध्यम मानते हैं तो कुछ खेलकूद, सिनेमा एवं पर्यटन में इसका अनुभव करतेे हैं। अधिकांश लोग अपनी इच्छा एवं मनोकामनाओं की पूर्ति को ही शांति मानते हैं। जिन्दगीभर एक के बाद एक इच्छाओं की पूर्ति में लगे रहते हैं और सोचते हैं कि इनकी पूर्ति ही वास्तविक शांति और खुशी हैं। क्या वास्तविक शांति इसे ही कहते हैं? वास्तविक शांति क्या हैं,

  • मासूम बच्चों की जान लेती परीक्षाएँ

    मैं यह लेख परीक्षाएँ शुरू होने के ठीक पहले लिख रहा हूँ। मुझे यह लेख लिखने के लिये प्रेरित किया हमारे देश में हो रही प्रतिदिन की आत्महत्याओं की ख़बरों ने। आत्महत्या करने वाले वे छात्र हैं जो कि अभी ज़िंदगी, परीक्षा एवं आत्महत्या से पुरी तरह वाक़िफ़ भी नहीं हैं।

  • चिंतन, संकल्प और व्यवहार से स्वयं को निखारें युवा

    चिंतन, संकल्प और व्यवहार से स्वयं को निखारें युवा

    शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय में अखिल भारतीय युवा जागरण कार्यक्रम के अन्तर्गत गायत्री परिवार के विशिष्ट मार्गदर्शकों ने विद्यार्थियों को श्रेष्ठ जीवन और कर्तव्य निष्ठा का गौरव अर्जित करने की राह बतायी।

  • विवाह का दीया यूं ही जलता रहे

    विवाह का दीया यूं ही जलता रहे

    विश्व विवाह दिवस - 12 फरवरी 2017 पर विशेष विवाह दो महिला-पुरुष के कानूनी, सामाजिक और धार्मिक रूप से एक साथ रहने को मान्यता प्रदान करता है। विवाह मानव-समाज की अत्यंत महत्वपूर्ण प्रथा एवं समाजशास्त्रीय संस्था है।

  • जंकफूड से बीमार हो रहा है समाज

    जंकफूड से बीमार हो रहा है समाज

    दुनिया भर में सबसे ज्यादा लोग खानपान की विकृति की वजह से बीमार हो रहे हैं। खानपान की इस विकृति का नाम है जंकफूड और इससे पैदा हुई महामारी का नाम मोटापा है।

  • ओछी आधुनिकता मानवीय मूल्यों की विध्वंसक है

    ओछी आधुनिकता मानवीय मूल्यों की विध्वंसक है

    'अधुना' यानी यूँ कहें कि इस समय जो कुछ है, वह आधुनिक है. कुछ विचारकों की माने तो आधुनिक शब्द की व्यत्पत्ति पॉचवी शताब्दी के उत्तरार्ध में लैटिन भाषा के 'माँड़्रनस' ( Modernus ) शब्द से हुई, जिसका प्रयोग औपचारिक रूप से तत्कालीन समय में इसाई और गैर-इसाई रोमन अतीत से अलग करने हेतु किया गया था.

  • नज़र नहीं, नजरिया बदलिए

    नज़र नहीं, नजरिया बदलिए

    वास्तव में हम सबके पास प्रभु प्रदत्त अतुलनीय सुन्दर काया और अद्वितीय चिन्तनशील मस्तिष्क है. इसके लिए हम सबको उस परमपिता परमेश्वर को शुक्रिया अदा करना चाहिए. जीवन, मरण, यश, अपयश यह सब तो निश्चित ही है

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