आप यहाँ है :

पत्रिका
 

  • कला से क्रांति की कार्यशाला- थियेटर ऑफ़ रेलेवंस  की रंगशाला

    कला से क्रांति की कार्यशाला- थियेटर ऑफ़ रेलेवंस की रंगशाला

    क्रांति क्रांति क्रांति... समाजिक क्रांति, आर्थिक क्रांति, राजनीतिक क्रांति... कहाँ कहाँ नहीं भटका मैं इस क्रांति के तलाश में! अमेरिकी क्रांति, फ़्रांसिसी क्रांति, रसियन क्रांति... सबको पढ़ा सबको समझा!यहाँ तक कि भारत का स्वतंत्रता संग्राम और दक्षिण अफ्रीका का रंगभेद के खिलाफ आन्दोलन, जिन्हें मैं महान क्रांतियों में गिनता हूँ सबको जाना पर एक दर्द हमेशा मेरे मन को आंदोलित करती रहा कि इन क्रांतियों ने सत्ता को तो बदला मगर क्या ये क्रांतियाँ अपने वास्तविक लक्ष्य को प्राप्त कर सकीं?

  • सावन की फुहार में ‘ कजरी ‘ का महत्व

    सावन चल है जो इस भीषण तपिश से राहत ही नहीं प्रदान करेगा बल्‍कि अपनी मखमली हरियाली से मन मयूर को नाचने के लिए विवश कर देगा और फिर सावन नाम आते ही ‘कजरी‘ गीतों का उनसे जुड़ जाना स्‍वाभाविक ही है।

  • रंगचिन्तक मंजुल भारद्वाज लिखित एवम् निर्देशित नाटक   “राजगति” ने बदली मेरी राजनैतिक अवधारणा

    रंगचिन्तक मंजुल भारद्वाज लिखित एवम् निर्देशित नाटक “राजगति” ने बदली मेरी राजनैतिक अवधारणा

    "हमेशा से ही सुनता आया था कि राजनीति बहुत गन्दी है, एक गटर की तरह है। आस पास के माहौल को हमेशा राजनीति के ख़िलाफ़ ही पाया था। 2011 में अन्ना आंदोलन और फिर आप के गठन के दौरान लगने लगा था कि इसे साफ़ किया जा सकता है

  • सुन्दरी

    सुन्दरी

    ये तब की बात है जब मैं छोटा था. कोई चौदह पंद्रह साल का. हमारे गाँव में एक आदमी रहता था. नाम था विरजपाल. वह बहरा था तो जोर से बोलने पर सुनता था. लोग इसका फायदा उठा उससे मजाक किया करते थे. उसकी पत्नी भी थी. सुंदरी. नाम बेशक सुंदरी था लेकिन दिखने में आम महिला थी.

    • By: धर्मेन्द्र राजमंगल
    •  ─ 
    • In: कहानी
  • थिएटर ऑफ़ रेलेवंस’ द्वारा   4 दिवसीय आदिवासी ‘युवाओं और बच्चों’ के लिए नाट्य कार्यशाला

    थिएटर ऑफ़ रेलेवंस’ द्वारा 4 दिवसीय आदिवासी ‘युवाओं और बच्चों’ के लिए नाट्य कार्यशाला

    7 -10 मई 2017, चिखलवाड़ी, त्र्यम्बकेश्वर , नासिक उत्प्रेरक : रंगचिन्तक मंजुल भारद्वाज ‘बेचने और खरीदने’ के मन्त्र से चलने वाले इस ‘मुनाफ़ाखोर’ भूमण्डलीकरण के दौर में मानव ने अपने ‘लालच’ की भूख को मिटाने के लिए ‘अंधाधुंध’ विकास के

  • भाजपा चलाएगी दल बदल एक्सप्रेस

    भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में आने के बाद जिस तेजी से कांग्रेस से लेकर आप तक के नेता अपनी पार्टी छोड़कर भाजपा में जा रहे हैं और ये सिलसिला रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है उसे लेकर भाजपा में इस बात पर चिंतन चल रहा है कि ऐसे लोगों के लिए दल बदल एक्सप्रेस के नाम से विशेष रेल चलाई जाए।

  • मुंशी प्रेमचंद की कहानी जिहाद सामने लाती है हिंदुओं का दर्द

    मुंशी प्रेमचंद की कहानी जिहाद सामने लाती है हिंदुओं का दर्द

    इस कहानी में मुंशी जी ने बहुत कम शब्दों में ही बहुत कुछ बता दिया है। जरूर पढ़ें... बहुत पुरानी बात है। हिंदुओं का एक काफ़िला अपने धर्म की रक्षा के लिए पश्चिमोत्तर के पर्वत-प्रदेश से भागा चला आ रहा था।

  • थिएटर ऑफ़ रेलेवंसः एक नया प्रयोग

    थिएटर ऑफ़ रेलेवंसः एक नया प्रयोग

    हमारा जीवन हर पल ‘राजनीति’ से प्रभावित और संचालित होता है पर एक ‘सभ्य’ नागरिक होने के नाते हम केवल अपने ‘मत का दान’ कर अपनी राजनैतिक भूमिका से मुक्त हो जाते हैं और हर पल ‘राजनीति’ को कोसते हैं ...और अपना ‘मानस’ बना बैठे हैं की राजनीति ‘गंदी’ है ..कीचड़ है ...हम सभ्य हैं ‘राजनीति हमारा कार्य नहीं है ... जब जनता ईमानदार हो तो उस देश की लोकतान्त्रिक ‘राजनैतिक’ व्यवस्था कैसे भ्रष्ट हो सकती है ? ....

  • देश के बँटवारे के बाद सीमा पर स्थित पागलखाने का विवाद कुछ यूँ सुलझा

    देश के बँटवारे के बाद सीमा पर स्थित पागलखाने का विवाद कुछ यूँ सुलझा

    बंटवारे के दो-तीन साल बाद पाकिस्तान और हिंदुस्तान की हुकूमतों को ख्याल आया कि अख्लाकी कैदियों की तरह पागलों का भी तबादला होना चाहिए, यानी जो मुसलमान पागल हिन्दुस्तान के पागलखानों में हैं उन्हें पाकिस्तान पहुंचा दिया जाय और जो हिन्दू और सिख पाकिस्तान के पागलखानों में है उन्हें हिन्दुस्तान के हवाले कर दिया जाय।

  • हर शहर में होता है एक बुध्दिजीवी

    मारे देश के हर शहर और गाँव में सभी तरह के लोग पाए जाते हैं। हर गाँव में नेता, पत्रकार, गुंडे, असामाजिक तत्व, अवारा और छुटभैयों के अलावा बुध्दिजीवी भी होते हैं। बुध्दिजीवियों का रुतबा इन सबसे अलग होता है। यानी पूरा गाँव या शहर एक तरफ और बुध्दिजीवी एक तरफ।

  • Page 1 of 9
    1 2 3 9

ईमेल सबस्क्रिप्शन

PHOTOS

VIDEOS

Back to Top

Page 1 of 9
1 2 3 9