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  • सुन्दरी

    सुन्दरी

    ये तब की बात है जब मैं छोटा था. कोई चौदह पंद्रह साल का. हमारे गाँव में एक आदमी रहता था. नाम था विरजपाल. वह बहरा था तो जोर से बोलने पर सुनता था. लोग इसका फायदा उठा उससे मजाक किया करते थे. उसकी पत्नी भी थी. सुंदरी. नाम बेशक सुंदरी था लेकिन दिखने में आम महिला थी.

    • By: धर्मेन्द्र राजमंगल
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    • In: कहानी
  • मुंशी प्रेमचंद की कहानी जिहाद सामने लाती है हिंदुओं का दर्द

    मुंशी प्रेमचंद की कहानी जिहाद सामने लाती है हिंदुओं का दर्द

    इस कहानी में मुंशी जी ने बहुत कम शब्दों में ही बहुत कुछ बता दिया है। जरूर पढ़ें... बहुत पुरानी बात है। हिंदुओं का एक काफ़िला अपने धर्म की रक्षा के लिए पश्चिमोत्तर के पर्वत-प्रदेश से भागा चला आ रहा था।

  • देश के बँटवारे के बाद सीमा पर स्थित पागलखाने का विवाद कुछ यूँ सुलझा

    देश के बँटवारे के बाद सीमा पर स्थित पागलखाने का विवाद कुछ यूँ सुलझा

    बंटवारे के दो-तीन साल बाद पाकिस्तान और हिंदुस्तान की हुकूमतों को ख्याल आया कि अख्लाकी कैदियों की तरह पागलों का भी तबादला होना चाहिए, यानी जो मुसलमान पागल हिन्दुस्तान के पागलखानों में हैं उन्हें पाकिस्तान पहुंचा दिया जाय और जो हिन्दू और सिख पाकिस्तान के पागलखानों में है उन्हें हिन्दुस्तान के हवाले कर दिया जाय।

  • अन्धेर नगरी चौपट राजा

    एक आदमी वहाँ आया और राजा के आगे दण्डवत लेट गया। सब लोग उसे देखने लगे। उन्होंने पाया कि उसकी एक आँख निकली हुई थी और खखोड़ से खून बह रहा था।

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