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कहानी
 

  • भाड़ में जाय ऐसा इनक़लाब

    भाड़ में जाय ऐसा इनक़लाब

    ऐसे ही किसी एक दिन वह रोज़ की तरह बे-तमीज़ी पर उतारू था। उस के पिता उसे बार-बार टोक रहे थे। वह अनसुना करता जा रहा था। तभी अचानक पड़ोस वाले डेविड साब की वाइफ उस

    • By: नवीन सी. चतुर्वेदी
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    • In: कहानी
  • मंगलसूत्र

    मंगलसूत्र

    तभी कावेरी के ख्यालों का ताँता टूटा, देखा उसका ऑफ़िस आ गया है | तेज़ क़दमों से आगे बढ़ती हुई कावेरी अपने ऑफिस के कमरे के सामने पहुँची, देखा तो सामने उसकी मित्र साधना

  • दो लघु कथाएँ

    दो लघु कथाएँ

    यह लिखकर उसने अपनी बाएँ हाथ की हथेली बंद की और उसी हाथ की अपनी छोटी अंगुली को दो बार दबा कर पाम-गेजेट को ऑफ किया फिर मेज की दराज से स्माइल-सप्लीमेंट की एक गोली निकाल कर मुंह में रख दी।

    • By: चन्द्रेश कुमार छतलानी
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    • In: कहानी
  • जब दौड़ी उम्मीदों की रेल…

    जब दौड़ी उम्मीदों की रेल…

    इतने में उनका दोस्त मिथुनवा दौड़ा-दौड़ा एक ख़बर लेकर आया और हाँफते-हाँफते बोला- ''सुना तुम लोगों ने, एक खुशखबरी है|

  • विवशता और प्रतिशोध

    विवशता और प्रतिशोध

    “एक दिन जब अवनीश बाथरूम में नहा रहा था तो यकायक मेरे मस्तिष्क में एक विचार आया कि क्यौं न अपने पड़ोसियों, जिनसे अभी तक मेरा कोई परिचय नहीं था, की सहायता ली जाय | बस जल्दी से मैंने एक कागज़ के पर्चे

  • एक और विदाई

    एक और विदाई

    विमला आठ भाई बहनों में सबसे छोटी थी । माता पिता के पास धन का अभाव होने के कारण चाहते हुए भी विमला को बारह कक्षा पूरी होने के बाद पढाई करने का कोई साधन नहीं मिल पाया । वह घर के काम-काज में ही लग गयी । चाहते हुए भी विमला को वह सब […]

  • थूकने वाला ही महान होता है

    पंचायत (देश के संदर्भ में पत्रकार ) मारने वाले से नहीं पूछेगी कि भाई तुम बांस देखकर थोड़ा अगल- बगल एडजस्ट क्यों नहीं हो लिएं क्योंकि उसे भी उस बिगड़े हुए उत्पाती शख़्स से डर

  • अफ़वाह

    नहीं नहीं अम्माजी मुझे कुछ नहीं हुआ है। कुछ लोग बोल रहे थे __ अब काम बंद तो पैसा बंद ।महिने की पगार नहीं मिलेगी।

  • बेड टच

    थर्ड फ्लोर आते ही रानी बिटिया उसकी गोद से कूदकर कॉल बेल की तरफ लपकी और अगले ही क्षण घर के अंदर भागते हुए

  • सुन्दरी

    सुन्दरी

    ये तब की बात है जब मैं छोटा था. कोई चौदह पंद्रह साल का. हमारे गाँव में एक आदमी रहता था. नाम था विरजपाल. वह बहरा था तो जोर से बोलने पर सुनता था. लोग इसका फायदा उठा उससे मजाक किया करते थे. उसकी पत्नी भी थी. सुंदरी. नाम बेशक सुंदरी था लेकिन दिखने में आम महिला थी.

    • By: धर्मेन्द्र राजमंगल
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    • In: कहानी

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