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कला-संस्कृति
 

  • कला से क्रांति की कार्यशाला- थियेटर ऑफ़ रेलेवंस  की रंगशाला

    कला से क्रांति की कार्यशाला- थियेटर ऑफ़ रेलेवंस की रंगशाला

    क्रांति क्रांति क्रांति... समाजिक क्रांति, आर्थिक क्रांति, राजनीतिक क्रांति... कहाँ कहाँ नहीं भटका मैं इस क्रांति के तलाश में! अमेरिकी क्रांति, फ़्रांसिसी क्रांति, रसियन क्रांति... सबको पढ़ा सबको समझा!यहाँ तक कि भारत का स्वतंत्रता संग्राम और दक्षिण अफ्रीका का रंगभेद के खिलाफ आन्दोलन, जिन्हें मैं महान क्रांतियों में गिनता हूँ सबको जाना पर एक दर्द हमेशा मेरे मन को आंदोलित करती रहा कि इन क्रांतियों ने सत्ता को तो बदला मगर क्या ये क्रांतियाँ अपने वास्तविक लक्ष्य को प्राप्त कर सकीं?

  • सावन की फुहार में ‘ कजरी ‘ का महत्व

    सावन चल है जो इस भीषण तपिश से राहत ही नहीं प्रदान करेगा बल्‍कि अपनी मखमली हरियाली से मन मयूर को नाचने के लिए विवश कर देगा और फिर सावन नाम आते ही ‘कजरी‘ गीतों का उनसे जुड़ जाना स्‍वाभाविक ही है।

  • रंगचिन्तक मंजुल भारद्वाज लिखित एवम् निर्देशित नाटक   “राजगति” ने बदली मेरी राजनैतिक अवधारणा

    रंगचिन्तक मंजुल भारद्वाज लिखित एवम् निर्देशित नाटक “राजगति” ने बदली मेरी राजनैतिक अवधारणा

    "हमेशा से ही सुनता आया था कि राजनीति बहुत गन्दी है, एक गटर की तरह है। आस पास के माहौल को हमेशा राजनीति के ख़िलाफ़ ही पाया था। 2011 में अन्ना आंदोलन और फिर आप के गठन के दौरान लगने लगा था कि इसे साफ़ किया जा सकता है

  • थिएटर ऑफ़ रेलेवंस’ द्वारा   4 दिवसीय आदिवासी ‘युवाओं और बच्चों’ के लिए नाट्य कार्यशाला

    थिएटर ऑफ़ रेलेवंस’ द्वारा 4 दिवसीय आदिवासी ‘युवाओं और बच्चों’ के लिए नाट्य कार्यशाला

    7 -10 मई 2017, चिखलवाड़ी, त्र्यम्बकेश्वर , नासिक उत्प्रेरक : रंगचिन्तक मंजुल भारद्वाज ‘बेचने और खरीदने’ के मन्त्र से चलने वाले इस ‘मुनाफ़ाखोर’ भूमण्डलीकरण के दौर में मानव ने अपने ‘लालच’ की भूख को मिटाने के लिए ‘अंधाधुंध’ विकास के

  • थिएटर ऑफ़ रेलेवंसः एक नया प्रयोग

    थिएटर ऑफ़ रेलेवंसः एक नया प्रयोग

    हमारा जीवन हर पल ‘राजनीति’ से प्रभावित और संचालित होता है पर एक ‘सभ्य’ नागरिक होने के नाते हम केवल अपने ‘मत का दान’ कर अपनी राजनैतिक भूमिका से मुक्त हो जाते हैं और हर पल ‘राजनीति’ को कोसते हैं ...और अपना ‘मानस’ बना बैठे हैं की राजनीति ‘गंदी’ है ..कीचड़ है ...हम सभ्य हैं ‘राजनीति हमारा कार्य नहीं है ... जब जनता ईमानदार हो तो उस देश की लोकतान्त्रिक ‘राजनैतिक’ व्यवस्था कैसे भ्रष्ट हो सकती है ? ....

  • मंजुल भारद्वाज के नाटक “मैं औरत हूँ !” का मंचन 8 मार्च, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर

    मंजुल भारद्वाज के नाटक “मैं औरत हूँ !” का मंचन 8 मार्च, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर

    8 मार्च, 2017 यानी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रंग चिन्तक मंजुल भारद्वाज द्वारा लिखित और निर्देशित नाटक “मैं औरत हूँ !” का मंचन दोपहर 4 बजे होमी भाभा सेंटर फॉर साइंस एजुकेशन के मानखुर्द स्थिति ऑडिटोरियम में होगा.

  • तानसेन संगीत महाविद्यालय के भोपाल केंद्र का शुभारंभ

    तानसेन संगीत महाविद्यालय के भोपाल केंद्र का शुभारंभ

    तानसेन संगीत महाविद्यालय दिल्ली के भोपाल केंद्र का शुभारंभ सारा एजुकेशन एंड कल्चरल सोसाइटी के तत्वावधान में दिनांक 24 फरवरी 2017 को 4 बजे संपन्न हुआ। उदघाटन समारोह राजीव गांधी महाविद्यालय, त्रिलंगा के सेमिनार हॉल में आयोजित हुआ ।

  • उदीषा-2017 के दूसरे दिन संस्कृतियों के संगम ने जमाया रंग

    उदीषा-2017 के दूसरे दिन संस्कृतियों के संगम ने जमाया रंग

    इलाहाबाद / संगम नगरी इलाहाबाद स्थित अमरनाथ झा छात्रावास में चल रहे त्रिदिवसीय सांस्कृतिक कुम्भ 'उदीषा-2017' के दूसरे दिन कल सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शानदार आगाज हुआ । दूसरे दिन अमरनाथ झा छात्रावास के पुराअंतःवासी व अतिथि श्री अनिल कश्यप (सेवानिवृत्त आईएस) ,

  • मानवीय विष को निष्क्रिय करना ही कला का मकसद और साध्य है !

    मानवीय विष को निष्क्रिय करना ही कला का मकसद और साध्य है !

    नाटक “अनहद नाद – Unheard Sounds of Universe” नाटक होते हुए भी “जीवन” है और जीवन में घटित “नाटक” को हर पल उखाड़ फैंकता है .. कलाकार की कला , कलात्मकता और कला सत्व है ..उनका सृजन नाद है .. व्यक्तिगत सृजन दायरे को तोड़कर उसे यूनिवर्सल , ब्रह्मांडीय सृजन से जोड़ता है और कलाकार को देश , काल ,भाषा , धर्म से उन्मुक्त कर एक सृजनकार , एक क्रिएटर के रूप में घडता है.

  • उदीषा ने जमाया सांस्कृतिक रंग

    इलाहाबाद / इलाहाबाद के सबसे पुराने एवं प्रतिष्ठित अमरनाथ झा छात्रावास के वार्षिक सांस्कृतिक उत्सव 'उदीषा-2017' की शुरुआत सायंकाल सामाजिक मेल-मिलाप से हुई । इस दौरान छात्रावास के समस्त अंतःवासी व कई पुरा अंतःवासी भी मौजूद थे। इसके बाद कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छात्रावास के पूर्व अंतःवासी तथा इन्डियन ऑयल कार्पोरेशन ऑफ इंडिया के निदेशक अरुण कुमार शर्मा तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति के

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