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कला-संस्कृति
 

  • मानवीय विष को निष्क्रिय करना ही कला का मकसद और साध्य है !

    मानवीय विष को निष्क्रिय करना ही कला का मकसद और साध्य है !

    नाटक “अनहद नाद – Unheard Sounds of Universe” नाटक होते हुए भी “जीवन” है और जीवन में घटित “नाटक” को हर पल उखाड़ फैंकता है .. कलाकार की कला , कलात्मकता और कला सत्व है ..उनका सृजन नाद है .. व्यक्तिगत सृजन दायरे को तोड़कर उसे यूनिवर्सल , ब्रह्मांडीय सृजन से जोड़ता है और कलाकार को देश , काल ,भाषा , धर्म से उन्मुक्त कर एक सृजनकार , एक क्रिएटर के रूप में घडता है.

  • उदीषा ने जमाया सांस्कृतिक रंग

    इलाहाबाद / इलाहाबाद के सबसे पुराने एवं प्रतिष्ठित अमरनाथ झा छात्रावास के वार्षिक सांस्कृतिक उत्सव 'उदीषा-2017' की शुरुआत सायंकाल सामाजिक मेल-मिलाप से हुई । इस दौरान छात्रावास के समस्त अंतःवासी व कई पुरा अंतःवासी भी मौजूद थे। इसके बाद कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छात्रावास के पूर्व अंतःवासी तथा इन्डियन ऑयल कार्पोरेशन ऑफ इंडिया के निदेशक अरुण कुमार शर्मा तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति के

  • थिएटर ऑफ़ रेलेवंसः “राजनीति’ विषय पर नाट्य पूर्वाभ्यास कार्यशाला – पड़ाव -1

    थिएटर ऑफ़ रेलेवंसः “राजनीति’ विषय पर नाट्य पूर्वाभ्यास कार्यशाला – पड़ाव -1

    हमारा जीवन हर पल ‘राजनीति’ से प्रभावित और संचालित होता है पर एक ‘सभ्य’ नागरिक होने के नाते हम केवल अपने ‘मत का दान’ कर अपनी राजनैतिक भूमिका से मुक्त हो जाते हैं और हर पर ‘राजनीति’ को कोसते हैं ...और अपना ‘मानस’ बना बैठे हैं की राजनीति ‘गंदी’ है ..कीचड़ है ...हम सभ्य हैं ‘राजनीति हमारा कार्य नहीं है

  • श्री हरि सत्संग समिति का आयोजन- ‘द्रौपदी’ : न भूतो न भविष्यति

    श्री हरि सत्संग समिति का आयोजन- ‘द्रौपदी’ : न भूतो न भविष्यति

    कुछ रचनाएँ, कुछ किरदार और कुछ पात्र और कुछ प्रस्तुतियाँ ऐसी यादगार हो जाती हैं कि प्रेक्षकों के ह्रदय पटल पर हमेशा हमेशा के लिए अपनी छाप छोड़ जाती है।

  • गुलजार से गुलजार हुआ जयपुर का साहित्य उत्सव

    गुलजार से गुलजार हुआ जयपुर का साहित्य उत्सव

    जयपुर साहित्य के महाकुंभ यानि दसवें लिटरेटचर फेस्टिवल की रंगारंग शुरुआत में चारों तरफ जयपुर के डिग्गी पैलेस में संगीत की शानदार मधुर स्वरलहरियों के साथ चारों तरफ राजस्थानी संस्कृति अपनी सुरभि बिखेर रही थी।

  • “अनहद नाद का मंचन” 28 जनवरी ,2017 (शनिवार) को सुबह 11 बजे मुंबई में !

    “अनहद नाद का मंचन” 28 जनवरी ,2017 (शनिवार) को सुबह 11 बजे मुंबई में !

    कला एक खोज है ... निरंतर खोज ..जो कहीं रूकती नहीं है ..बस जीवन को लगातार जीवन और मनुष्यों को मनुष्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध होती है उनको लगातार शुद्दिकरण की प्रक्रिया के अनुभव लोक की अनुभति से जीवन और मनुष्य के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए.

  • थिएटर ऑफ़ रेलेवंस की  कार्यशाला 21-25 जनवरी को

    थिएटर ऑफ़ रेलेवंस की कार्यशाला 21-25 जनवरी को

    विश्वविख्यात रंग चिन्तक और “ थिएटर ऑफ़ रेलेवंस ” नाट्य सिद्धांत के जनक मंजुल भारद्वाज “21-25 जनवरी,2017” तक होने वाली पांच दिवसीय आवासीय कार्यशाला “कलाकार की कलात्मक चुनौतियां और प्रतिबद्धता” को युसूफ मेहर अली सेंटर,पनवेल (मुंबई) में उत्प्रेरित करेंगें.

  • मानवता की सृजनात्मक हुंकार है “थिएटर ऑफ़ रेलेवंस”!

    मानवता की सृजनात्मक हुंकार है “थिएटर ऑफ़ रेलेवंस”!

    नब्बे का दशक देश,दुनिया और मानवता के लिए आमूल बदलाव का दौर है.”औद्योगिक क्रांति” के पहिये पर सवार होकर मानवता ने सामन्तवाद की दासता से निकलने का ख्वाब देखा.पर नब्बे के दशक तक आते आते साम्यवाद के किले ढह गए और ”औद्योगिक क्रांति” सर्वहारा की मुक्ति का मसीहा होने की बजाय पूंजीवाद का खतरनाक,घोर शोषणवादी और अमानवीय उपक्रम निकला जिसने सामन्ती सोच को ना केवल मजबूती दी अपितु विज्ञान के आविष्कार को तकनीक देकर भूमंडलीकरण के जरिये दुनिया को एक शोषित ‘गाँव’ में बदल दिया. ऐसे समय में भारत भी इन वैश्विक प्रक्रियाओं से अछुता नहीं था.

  • लोक का अर्थ, मंथन की परंपरा और राष्‍ट्रीय आयोजन

    लोक का अर्थ, मंथन की परंपरा और राष्‍ट्रीय आयोजन

    मंथन भारत का आधारभूत तत्‍व है, इसलिए विमर्श के बिना भारत की कल्‍पना भी की जाएगी तो वह अधूरी प्रतीत होगी। यहां लोकतंत्र शासन व्‍यवस्‍था की सफलता का कारण भी यही है कि वेद, श्रुति, स्‍मृति, पुराण से लेकर संपूर्ण भारतीय वांग्‍मय, साहित्‍य संबंधित पुस्‍तकों और चहुंओर व्‍याप्‍त संस्‍कृति के विविध आयमों में लोक का सुख, लोक के दुख का नाश, सर्वे भवन्‍तु सुखिन: और जन हिताय-जन सुखाय की भावना ही सर्वत्र दृष्‍टि‍गत होती है।

  • स्वर आलाप का मधुर संगीत महोत्सव

    स्वर आलाप का मधुर संगीत महोत्सव

    मुंबई। संगीत, कमेडी, बहुत से पुराने और भावनात्मक फिल्मी गानों के द्वारा अनेकों की पुरानी यादों को ताजा किया...ऐसी थी स्वर आलाप द्वारा आयोजित कंसर्ट में “बहुमुखी प्रतिभा वाले –जावेद अली”की प्रस्तुति। स्वर आलाप एक ऐसा संगठन है जो पिछले 14 सालों से भारतीय संगीत उद्योग के महान संगीतकारों को पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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