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कला-संस्कृति
 

  • सौम्या लक्ष्मी के भरतनाट्यम अरंगेत्रम से मुग्ध हुई दिल्ली..

    सौम्या लक्ष्मी के भरतनाट्यम अरंगेत्रम से मुग्ध हुई दिल्ली..

    गुरु गीता चंद्रन एक विख्यात कलाकार हैं, जिन्होंने अपने गुरुओं से मिले ज्ञान को निखारते हुए नृत्य के प्रति अपने निजी विचारों

  • युवा पीढ़ी को सिखाएं मायड़ बोली : केसी मालू

    युवा पीढ़ी को सिखाएं मायड़ बोली : केसी मालू

    जयपुर, 3 जुलाई। लंदन के नागरेचा हॉल में हुए प्रवासी राजस्थानी-सांस्कृतिक पुरर्जागरण कार्यक्रम वीणा समूह के निदेशक केसी मालू ने कहा कि बदलते वक्त

  • विश्व संगीत दिवस पर ‘रूह-ए-ग़ज़ल’ में शेरों और गज़लों की धूम

    विश्व संगीत दिवस पर ‘रूह-ए-ग़ज़ल’ में शेरों और गज़लों की धूम

    नई दिल्ली। संगीत का हर आम आदमी के जीवन में विशिष्ट स्थान होता है और पूरे दिन की भाग-दौड़ के बाद भारतीय कला-संस्कृति से जुड़ी एक संगीतमय संध्या मिल जाये, जहां दिल्ली के लीजेण्ड्स

  • आई.जी.एन.सी.ए. में “संजारी: एक भारत – श्रेष्ठ भारत” की सातवीं श्रृंखला का आयोजन

    आई.जी.एन.सी.ए. में “संजारी: एक भारत – श्रेष्ठ भारत” की सातवीं श्रृंखला का आयोजन

    नई दिल्ली। संस्‍कृति मंत्रालय का इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र अपने 30 वे स्थापना दिवस से शुरू “संजारी: एक भारत – श्रेष्ठ भारत” श्रृंखला का हर माह सफल आयोजन कर रहा है। केंद्र का प्रयास है की देश के विभिन्न भागों के लुप्त हो रहे लोक संगीत हर माह दिल्ली में आम श्रोताओं के लिए उसके असल रूप में उपलब्ध करवाया जाये ताकि ये लोक संगीत अपना वजूद कायम रख सके और नयी पीढ़ी तक अपने असल रूप में पहुँच सके | केंद्र “संजारी: एक भारत – श्रेष्ठ भारत” के अभी तक 6 सफल आयोजन कर चुका है जिसमे अरुणाचल, बिहार व राजस्थान, गोवा, तमिलनाडु, ज

  • मोहिनीअट्टम नृत्य से भाव-विभोर हुए श्रोता

    मोहिनीअट्टम नृत्य से भाव-विभोर हुए श्रोता

    नई दिल्ली। मदर्स डे का मौका और मंच पर खूबसूरत मोहिनीअट्टम की प्रस्तुति देती गुरू-शिष्या। यह शानदार नज़ारा और भाव-विभोर करता प्रस्तुतिकरण देखते ही बनता था। मौका था देबधारा दिल्ली द्वारा आयोजित दो दिवसीय गुरू-शिष्य सम्मान नृत्य समारोह का, जहां नृत्य क्षेत्र की गुरू-शिष्या प्रतिभाओं ने अपने कला-कौशल का सभी को कायल किया। विभिन्न शैलियों में प्रस्तुत नृत्य प्रस्तुतिकरण के बीच पद्मश्री गुरू भारती शिवाजी एवम् शिष्याओं वाणी भल्ला पाहवा व समृता मेनन द्वारा प्रस्तुत खूबसूरत मोहिनीअट्टम नृत्य ने सभी को आकर्षित किया। नृत्य आकर्षण के बीच अन्य खास बात यह र

  • संगीत के ज़रिये समाज सेवा की साधना करता  पश्चिम रेल परिवार का युवा संगीतकार श्री तुषार लाल

    संगीत के ज़रिये समाज सेवा की साधना करता पश्चिम रेल परिवार का युवा संगीतकार श्री तुषार लाल

    मुंबई के वंचित बच्चों की शिक्षा के लिए 3 लाख रु. जुटाये

  • ‘इप्टा’ की सुनहरी यादों से सजी चौपाल

    ‘इप्टा’ की सुनहरी यादों से सजी चौपाल

    मुंबई की चौपाल ऐसा मंच है जहाँ मात्र चार घंटे में आप एक ही मंच पर कई शख्सियतों, किताबों को पढ़ने से लेकर कई शख्सियतों की संगत का मजा लेते हुए विविध संस्कृतियों की धारा में बहने लगते हैं।

  • ‘रामसंस्कृति की विश्वयात्रा’ पर रूस में होगी संगोष्ठी

    ‘रामसंस्कृति की विश्वयात्रा’ पर रूस में होगी संगोष्ठी

    हैदराबाद। मूल्यमूढ़ता से घिरे वर्तमान समय में संपूर्ण विश्व के बुद्धिजीवी भारत की ओर आशा की दृष्टि से देखते हैं तथा विश्वबंधुत्व और सह-अस्तित्व के आदर्शों की पुनः प्रतिष्ठा द्वारा मानवाधिकारों की बहाली की कामना रखते हैं. इस परिप्रेक्ष्य में रामकथा में निहित मूल्य किस प्रकार आज की दुनिया को कुटुंब के रूप में जीने […]

  • नागपुर में सप्त सिंधु महोत्सवः जम्मू-कश्मीर और लेह लद्दाख की संस्कृति के दर्शन

    नागपुर में सप्त सिंधु महोत्सवः जम्मू-कश्मीर और लेह लद्दाख की संस्कृति के दर्शन

    नागपुर के दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र में जम्मू - कश्मीर स्टडी सेंटर द्वारा आयोजित "सप्तसिंधु, जम्मू - कश्मीर, लद्दाख महोत्सव का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने किया।

  • छत्तीसगढ़ रंग प्रतिभाः मुंबई की फिज़ा में घुली छत्तीसगढ़ी लोक रंग की खुशबू

    छत्तीसगढ़ रंग प्रतिभाः मुंबई की फिज़ा में घुली छत्तीसगढ़ी लोक रंग की खुशबू

    इन दिनों प्रतिभा का मतलब यही हो गया है कि कोई टीवी पर आकर नाच-गाकर चला जाए। लेकिन इस देश में चप्पे-चप्पे पर ऐसी प्रतिभाएँ बिखरी पड़ी है जो हजारों सालों से हजारों पीढियों को कला, संस्कृति, परंपरा, मूल्यों और जीवन दर्शन का संदेश देती चली आ रही है। इनमें से अधिकांश कलाकार वे हैं जिन्हें शहर की कृत्रिमता की हवा नहीं लगी है और जो किसी भक्त या शिष्य की तरह अपनी कला परंपरा को अपनाने के साथ उसे पूजते आ रहे हैं। कला उनके लिए कमाई और प्रसिध्दि पाने का जरिया नहीं बल्कि विशुध्द रूप से जीवन को कला के साथ आत्मसात करते हुए जीना है।

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