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कला-संस्कृति
 

  • मालवा के लोक नाट्य माच और मालवा की लोक कलाओं का केंद्र है उज्जैन

    मालवा के लोक नाट्य माच और मालवा की लोक कलाओं का केंद्र है उज्जैन

    मालवा की लोक-कलाओं यथा लोक-साहित्य, लोक-नृत्य, लोक-संगीत और लोक मंच के क्षेत्र में उज्जैन की स्थिति अनूठी है। उज्जैन मालवी बोली और मालवी लोक-संस्कृति का केन्द्र-स्थल है।

  • दो दिवसीय वृन्दावन रसोत्सव में बरसा संगीत और भक्ति का रस

    दो दिवसीय वृन्दावन रसोत्सव में बरसा संगीत और भक्ति का रस

    भगवान श्रीकृष्ण की क्रीड़ा भूमि श्रीधाम वृंदावन की पावन धरा में आयोजित वृंदावन रसोत्सव के पहले दिन स्वर-लय-ताल के साथ भाव-भंगिमाओं से जमकर भक्ति रस बरसाऔर राधाकृष्ण का अलौकिक प्रेम साकार हो उठा।

  • लुप्त होती कठपुतली कला…

    लुप्त होती कठपुतली कला…

    भारतीय संस्कृति का प्रतिबिंब लोककलाओं में झलकता है. इन्हीं लोककलाओं में कठपुतली कला भी शामिल है. यह देश की सांस्कृतिक धरोहर होने के साथ-साथ प्रचार-प्रसार का सशक्त माध्यम भी है,

  • भारत का पुरातन गौरव जीवंत हुआ भागवत परिवार के अतुल्य भारत में

    भारत का पुरातन गौरव जीवंत हुआ भागवत परिवार के अतुल्य भारत में

    मुंबई का भागवत परिवार मुंबई की कला, संस्कृति और अध्यात्म की ऐसी त्रिवेणी है जिसके माध्यम से मुंबई के रसिक दर्शक अध्यात्मिक, धार्मिक और सांस्कृतिक रस वर्षा से सारोबर होते रहते हैं।

  • बस्ती जिले के ‘शुभम’ नगर का चंगेरवा महोत्सव

    बस्ती जिले के ‘शुभम’ नगर का चंगेरवा महोत्सव

    बस्ती । चंगेरवा गांवपंचायत, उत्तर प्रदेश के बस्ती डिवीजन, जिले व तहसील के अंतर्गत आता है। यह जिला मुख्यालय बस्ती से पूर्व स्थित है ।

  • कु. आस्था गुप्ता की चित्र प्रदर्शनी

    कु. आस्था गुप्ता की चित्र प्रदर्शनी

    कु. आस्था गुप्ता द्वारा स्वराज वीथि, रवीन्द्र भवन परिसर, भोपाल में, पेटिंग, स्कल्पचर एवं भारतीय सांकेतिक भाषा डिजाइन डिक्शनरी पर प्रदर्शनी लगाई गई। जिसे कला में रूचि रखने वाले दर्शकों ने काफी सराहा।

  • शायरी और ग़ज़ल की शाम ‘ग़ज़ल का आलोक’ के साथ जाते साल को सलाम…

    शायरी और ग़ज़ल की शाम ‘ग़ज़ल का आलोक’ के साथ जाते साल को सलाम…

    साल 2015 हमसे अलविदा लेने को तैयार है और तमाम दिल्लीवासी नये साल के जश्न में मगन हैं। जहां एक ओर पार्टियों और डी.जे. नाइट्स का शुमार छाया है वहीं हिन्दुस्तानी कला-संस्कृति के प्रचार-प्रसार हेतु लगातार शायरी व ग़ज़ल से सुसज्जित कार्यक्रम आयोजित करती आ रही गैर सरकारी संस्था साक्षी ने अपने अंदाज में एक सुरमयी संध्या ‘ग़ज़ल का आलोक’ के माध्यम से जाते साल को विदा किया।

  • ‘महफिल-ए-गंगो-जमन’ में नवरसों का स्वादः डॉ. सुभाष चंद्रा

    ‘महफिल-ए-गंगो-जमन’ में नवरसों का स्वादः डॉ. सुभाष चंद्रा

    दिल्ली में चौथे साहित्यकार सम्मेलन 'महफिल-ए-गंगो-जमन' को संबोधित करते हुए एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा ने कहा कि हमें साहित्य के जरिए नौ रसों का स्वाद लेने का मौका मिलता है। 'महफिल-ए-गंगो-जमन' हिंदू-उर्दू और पंजाबी साहित्य का सम्मेलन है। इस सम्मेलन के जरिए भारतीय भाषाओं को बढ़ावा दिया जाता है।

  • शायरी व ग़ज़ल से अभिभूत करती एक शाम ‘सोच से साज़-ओ-आवाज़ तक’

    शायरी व ग़ज़ल से अभिभूत करती एक शाम ‘सोच से साज़-ओ-आवाज़ तक’

    दिसम्बर का महीना शुरू हुआ और तापमान में गिरावट के साथ दिल्ली की गुलाबी शाम ठंड की गिरफ्त में घिर पड़ी हैं। ऐसे में तरह तरह के रंगा-रंग कार्यक्रम दिल्लीवासियों व कला के शौकीनों को मौका प्रदान कर रहे हैं अपनी ही तरह से मौसम के मिज़ाज का लुत्फ उठाने का। ऐसे ही विभिन्न रंगों के बीच रविवार की शाम इंडिया हैबीटेट सेंटर में मौसिकी की एक महफिल सजी की तालियों की गड़गड़ाहट और वाह-वाही का समां रोके नहीं रूका।

  • आँखों देखा –  नवगीत महोत्सव लखनऊ

    आँखों देखा – नवगीत महोत्सव लखनऊ

    फैजाबाद मार्ग पर गोमती नगर में पॉलीटेक्निक के समीप कालिंदी विहार के १० वें तल पर अभिव्यक्ति विश्वं का प्रतिष्ठा पर्व 'नवगीत महोत्सव' श्री प्रवीण सक्सेना तथा श्रीमती पूर्णिमा बर्मन के संरक्षकत्व में संपन्न होने की तैयारियाँ अंतिम चरण में मिलीं. गत वर्ष पूर्णिमा जी के माता-पिता दोनों का आशीष पाया था, इस वर्ष सिर्फ पिताश्री का आशीष मिल सका, माता जी इहलोक से बिदा हो चुकी हैं.

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