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  • अन्धेर नगरी चौपट राजा

    एक आदमी वहाँ आया और राजा के आगे दण्डवत लेट गया। सब लोग उसे देखने लगे। उन्होंने पाया कि उसकी एक आँख निकली हुई थी और खखोड़ से खून बह रहा था।

  • शायरी और ग़ज़ल की शाम ‘ग़ज़ल का आलोक’ के साथ जाते साल को सलाम…

    शायरी और ग़ज़ल की शाम ‘ग़ज़ल का आलोक’ के साथ जाते साल को सलाम…

    साल 2015 हमसे अलविदा लेने को तैयार है और तमाम दिल्लीवासी नये साल के जश्न में मगन हैं। जहां एक ओर पार्टियों और डी.जे. नाइट्स का शुमार छाया है वहीं हिन्दुस्तानी कला-संस्कृति के प्रचार-प्रसार हेतु लगातार शायरी व ग़ज़ल से सुसज्जित कार्यक्रम आयोजित करती आ रही गैर सरकारी संस्था साक्षी ने अपने अंदाज में एक सुरमयी संध्या ‘ग़ज़ल का आलोक’ के माध्यम से जाते साल को विदा किया।

  • ‘महफिल-ए-गंगो-जमन’ में नवरसों का स्वादः डॉ. सुभाष चंद्रा

    ‘महफिल-ए-गंगो-जमन’ में नवरसों का स्वादः डॉ. सुभाष चंद्रा

    दिल्ली में चौथे साहित्यकार सम्मेलन 'महफिल-ए-गंगो-जमन' को संबोधित करते हुए एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा ने कहा कि हमें साहित्य के जरिए नौ रसों का स्वाद लेने का मौका मिलता है। 'महफिल-ए-गंगो-जमन' हिंदू-उर्दू और पंजाबी साहित्य का सम्मेलन है। इस सम्मेलन के जरिए भारतीय भाषाओं को बढ़ावा दिया जाता है।

  • शायरी व ग़ज़ल से अभिभूत करती एक शाम ‘सोच से साज़-ओ-आवाज़ तक’

    शायरी व ग़ज़ल से अभिभूत करती एक शाम ‘सोच से साज़-ओ-आवाज़ तक’

    दिसम्बर का महीना शुरू हुआ और तापमान में गिरावट के साथ दिल्ली की गुलाबी शाम ठंड की गिरफ्त में घिर पड़ी हैं। ऐसे में तरह तरह के रंगा-रंग कार्यक्रम दिल्लीवासियों व कला के शौकीनों को मौका प्रदान कर रहे हैं अपनी ही तरह से मौसम के मिज़ाज का लुत्फ उठाने का। ऐसे ही विभिन्न रंगों के बीच रविवार की शाम इंडिया हैबीटेट सेंटर में मौसिकी की एक महफिल सजी की तालियों की गड़गड़ाहट और वाह-वाही का समां रोके नहीं रूका।

  • आँखों देखा –  नवगीत महोत्सव लखनऊ

    आँखों देखा – नवगीत महोत्सव लखनऊ

    फैजाबाद मार्ग पर गोमती नगर में पॉलीटेक्निक के समीप कालिंदी विहार के १० वें तल पर अभिव्यक्ति विश्वं का प्रतिष्ठा पर्व 'नवगीत महोत्सव' श्री प्रवीण सक्सेना तथा श्रीमती पूर्णिमा बर्मन के संरक्षकत्व में संपन्न होने की तैयारियाँ अंतिम चरण में मिलीं. गत वर्ष पूर्णिमा जी के माता-पिता दोनों का आशीष पाया था, इस वर्ष सिर्फ पिताश्री का आशीष मिल सका, माता जी इहलोक से बिदा हो चुकी हैं.

  • आइये बिखेरें लोक साहित्य के संरक्षण-संवर्धन का उजाला

    आइये बिखेरें लोक साहित्य के संरक्षण-संवर्धन का उजाला

    किसी भी देश की संस्कृति का अाधार वहां का लोक-जीवन ही है। लोक संस्कृति मानव जीवन की सामूहिक चेतना का प्रतिबिम्ब है। लोक जीवन का रस समाज की जड़ों को सींचता है।लोक के समीप हमारी आत्मीयता एकबारगी जीती-जागती और बोलती-बतियाती रहती है।

  • दीपमाला मोहन के साथ इण्डिया हैबीटेट सेन्टर में सजी सूफी एवम् लोक संगीत की शाम

    दीपमाला मोहन के साथ इण्डिया हैबीटेट सेन्टर में सजी सूफी एवम् लोक संगीत की शाम

    बीते सप्ताह इण्डिया हैबीटेट सेन्टर के अन्तर्गत अमलतास सभागार में महिलाओं को समर्पित संगीतमय संध्या ‘द आॅटमन सांग’ का आयोजन किया गया। जानी-मानी फोक व सूफी गायिका दीपमाला मोहन ने इस संगीतमय संध्या में अपने चिर-परिचित अंदाज में श्रोताओं के बीच अपने सशक्त कला-कौशल का परिचय देते हुए उन्हें मंत्र-मुग्ध कर दिया।

  • फोटो प्रदर्शनी में बोल उठी ऐतिहासिक धरोहरें

    फोटो प्रदर्शनी में बोल उठी ऐतिहासिक धरोहरें

    वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग द्वारा रविवार को संकाय भवन में विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर संकाय भवन में फोटो प्रदर्शनी लगाई गई.

  • उस्तादों की शायरी पर ग़ज़ल के तराने

    उस्तादों की शायरी पर ग़ज़ल के तराने

    हाल ही में राजधानी दिल्ली स्थित इण्डिया हैबीटेट सेंटर में गैर-सरकारी संगठन साक्षी द्वारा एक संगीतमय संध्या ‘शाम-ए-ग़ज़ल’ का आयोजन किया गया।

  • शायर संग शायरी और ग़ज़ल के किस्सों से अभिभूत हुई दिल्ली की शाम

    इंडिया हैबिटैट सेंटर के गुलमोहर सभागार में सिएट संस्था की और से एक मुलाक़ात फरहत शहजाद के साथ, कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमे सुप्रसिद्ध कवि ग़ज़लकार फरहत शहज़ाद से दिल्लीवासी मुखातिब हुए। शहज़ाद साहिब ने कविता पाठ किया और अपने कवी जीवन के कई अन्य पहलुओं पर डॉ मृदुला सतीश टंडन से गुफ्तगू कर उन […]

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