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  • विश्वविद्यालय में  सांस्कृतिक संध्या में कुलपति ने गया गीत

    विश्वविद्यालय में सांस्कृतिक संध्या में कुलपति ने गया गीत

    जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर के वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजाराम यादव ने रविवार को विश्वविद्यालय के संगोष्ठी भवन में हारमोनियम बजा कर ऐसा लोकगीत गया कि विद्यार्थियों की तालियां रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी.

  • ‘विश्व-ग्राम’ के सवाल और ‘लोक जीवन’ के ज़वाब

    ‘विश्व-ग्राम’ के सवाल और ‘लोक जीवन’ के ज़वाब

    किसी भी देश की संस्कृति का अाधार वहां का लोक-जीवन ही है। लोक संस्कृति मानव जीवन की सामूहिक चेतना का प्रतिबिम्ब है। लोक जीवन का रस समाज की जड़ों को सींचता है।लोक के समीप हमारी आत्मीयता एकबारगी जीती-जागती और बोलती-बतियाती रहती है।

  • दिल्ली में धूम मचाई थिएटर ऑफ रेलेवेंस ने

    दिल्ली में धूम मचाई थिएटर ऑफ रेलेवेंस ने

    थिएटर ऑफ़ रेलेवेंस नाट्य दर्शन के सृजन और प्रयोग के 25 वर्ष पूरे हुए. अपने सृजन के समय से ही देश और विदेश, जहां भी इस नाट्य दर्शन की प्रस्तुति हुई, न सिर्फ दर्शकों के बीच अपनी उपादेयता साबित की, बल्कि रंगकर्मियों के बीच भी अपनी विलक्षणता स्थापित की.

  • थिएटर ऑफ़ रेलेवंस” नाट्य दर्शन के 25 वर्ष पर दिल्ली में 3 दिवसीय नाट्य उत्सव

    थिएटर ऑफ़ रेलेवंस” नाट्य दर्शन के 25 वर्ष पर दिल्ली में 3 दिवसीय नाट्य उत्सव

    काल को चिंतन से गढ़ा और रचा जाता है. चिंतन आपके भीतर से सृजित होकर वैश्विक क्षितिज को पार कर विश्व में जीता है.कला मनुष्य को मनुष्य बनाती है. कलात्मक चिन्तन ही मनुष्य के विष को पीने की क्षमता रखता है.1990 के बाद का समय दुनिया के लिए ‘अर्थहीन’ होने का दौर है.

  • कला से क्रांति की कार्यशाला- थियेटर ऑफ़ रेलेवंस  की रंगशाला

    कला से क्रांति की कार्यशाला- थियेटर ऑफ़ रेलेवंस की रंगशाला

    क्रांति क्रांति क्रांति... समाजिक क्रांति, आर्थिक क्रांति, राजनीतिक क्रांति... कहाँ कहाँ नहीं भटका मैं इस क्रांति के तलाश में! अमेरिकी क्रांति, फ़्रांसिसी क्रांति, रसियन क्रांति... सबको पढ़ा सबको समझा!यहाँ तक कि भारत का स्वतंत्रता संग्राम और दक्षिण अफ्रीका का रंगभेद के खिलाफ आन्दोलन, जिन्हें मैं महान क्रांतियों में गिनता हूँ सबको जाना पर एक दर्द हमेशा मेरे मन को आंदोलित करती रहा कि इन क्रांतियों ने सत्ता को तो बदला मगर क्या ये क्रांतियाँ अपने वास्तविक लक्ष्य को प्राप्त कर सकीं?

  • सावन की फुहार में ‘ कजरी ‘ का महत्व

    सावन चल है जो इस भीषण तपिश से राहत ही नहीं प्रदान करेगा बल्‍कि अपनी मखमली हरियाली से मन मयूर को नाचने के लिए विवश कर देगा और फिर सावन नाम आते ही ‘कजरी‘ गीतों का उनसे जुड़ जाना स्‍वाभाविक ही है।

  • रंगचिन्तक मंजुल भारद्वाज लिखित एवम् निर्देशित नाटक   “राजगति” ने बदली मेरी राजनैतिक अवधारणा

    रंगचिन्तक मंजुल भारद्वाज लिखित एवम् निर्देशित नाटक “राजगति” ने बदली मेरी राजनैतिक अवधारणा

    "हमेशा से ही सुनता आया था कि राजनीति बहुत गन्दी है, एक गटर की तरह है। आस पास के माहौल को हमेशा राजनीति के ख़िलाफ़ ही पाया था। 2011 में अन्ना आंदोलन और फिर आप के गठन के दौरान लगने लगा था कि इसे साफ़ किया जा सकता है

  • सुन्दरी

    सुन्दरी

    ये तब की बात है जब मैं छोटा था. कोई चौदह पंद्रह साल का. हमारे गाँव में एक आदमी रहता था. नाम था विरजपाल. वह बहरा था तो जोर से बोलने पर सुनता था. लोग इसका फायदा उठा उससे मजाक किया करते थे. उसकी पत्नी भी थी. सुंदरी. नाम बेशक सुंदरी था लेकिन दिखने में आम महिला थी.

    • By: धर्मेन्द्र राजमंगल
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    • In: कहानी
  • थिएटर ऑफ़ रेलेवंस’ द्वारा   4 दिवसीय आदिवासी ‘युवाओं और बच्चों’ के लिए नाट्य कार्यशाला

    थिएटर ऑफ़ रेलेवंस’ द्वारा 4 दिवसीय आदिवासी ‘युवाओं और बच्चों’ के लिए नाट्य कार्यशाला

    7 -10 मई 2017, चिखलवाड़ी, त्र्यम्बकेश्वर , नासिक उत्प्रेरक : रंगचिन्तक मंजुल भारद्वाज ‘बेचने और खरीदने’ के मन्त्र से चलने वाले इस ‘मुनाफ़ाखोर’ भूमण्डलीकरण के दौर में मानव ने अपने ‘लालच’ की भूख को मिटाने के लिए ‘अंधाधुंध’ विकास के

  • भाजपा चलाएगी दल बदल एक्सप्रेस

    भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में आने के बाद जिस तेजी से कांग्रेस से लेकर आप तक के नेता अपनी पार्टी छोड़कर भाजपा में जा रहे हैं और ये सिलसिला रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है उसे लेकर भाजपा में इस बात पर चिंतन चल रहा है कि ऐसे लोगों के लिए दल बदल एक्सप्रेस के नाम से विशेष रेल चलाई जाए।

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