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  • रिज़र्व बैंक से नए आदेश नहीं निकलने पर लोग परेशान

    देश की रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा नोटबंदी के बाद हजार पाँच सौ रु. को लेकर पिछले 24 घंटे में कोई नया आदेश जारी नहीं किए जाने पर देश भर में तीखी प्रतिक्रिया है।

  • मानवता की सृजनात्मक हुंकार है “थिएटर ऑफ़ रेलेवंस”!

    मानवता की सृजनात्मक हुंकार है “थिएटर ऑफ़ रेलेवंस”!

    नब्बे का दशक देश,दुनिया और मानवता के लिए आमूल बदलाव का दौर है.”औद्योगिक क्रांति” के पहिये पर सवार होकर मानवता ने सामन्तवाद की दासता से निकलने का ख्वाब देखा.पर नब्बे के दशक तक आते आते साम्यवाद के किले ढह गए और ”औद्योगिक क्रांति” सर्वहारा की मुक्ति का मसीहा होने की बजाय पूंजीवाद का खतरनाक,घोर शोषणवादी और अमानवीय उपक्रम निकला जिसने सामन्ती सोच को ना केवल मजबूती दी अपितु विज्ञान के आविष्कार को तकनीक देकर भूमंडलीकरण के जरिये दुनिया को एक शोषित ‘गाँव’ में बदल दिया. ऐसे समय में भारत भी इन वैश्विक प्रक्रियाओं से अछुता नहीं था.

  • राहुल गाँधी के बोलते ही भूकंप के झटके लगे

    राहुल गाँधी के बोलते ही भूकंप के झटके लगे

    दिल्ली. आज राहुल गाँधी ने अपने भाषण में कहा कि अगर वह नोटबंदी पर बोलेंगे तो भूकम्प आ जाएगा। यह सुनते ही लोक सभा के अंदर इतनी ज़ोर से ठहाके लगे कि दिल्ली में हल्के भूकम्प के झटके महसूस किये गए।

  • बनारस के घाट पर

    बनारस के घाट पर

    एक सज्जन बनारस पहुंचे , स्टेशन पर उतरे ही थे कि इक लड़का दौड़ता हुआ आया !!

  • “अभिषेक बच्चन की फ़िल्म देखने के लिये भी पुराने नोट चलाने की छूट” -प्रधानमंत्री मोदी का एलान

    “अभिषेक बच्चन की फ़िल्म देखने के लिये भी पुराने नोट चलाने की छूट” -प्रधानमंत्री मोदी का एलान

    नयी दिल्ली. केंद्र सरकार ने बॉलीवुड के पूर्व एवं वर्तमान अभिनेता अभिषेक बच्चन की फ़िल्मों के लिये भी पुराने नोट चलाने की छूट दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज यह एलान करते हुए कहा कि “पुराने नोटों की तरह अभिषेक भी बहुत पुराने अभिनेता हैं।

  • राजा ने कहा,  मुनाफाखोरो को बिजली के खंभे पर लटकाया जायेगा तो हुआ चमत्कार

    राजा ने कहा, मुनाफाखोरो को बिजली के खंभे पर लटकाया जायेगा तो हुआ चमत्कार

    एक दिन राजा ने खीझकर घोषणा कर दी कि मुनाफ़ाख़ोरों को बिजली के खम्भे से लटका दिया जायेगा। सुबह होते ही लोग बिजली के खम्भों के पास जमा हो गये। उन्होंने खम्भों की पूजा की, आरती उतारी और उन्हें तिलक किया।

  • भूतपूर्व प्रेमिकाओं को पत्र

    भूतपूर्व प्रेमिकाओं को पत्र

    वर्ष 2016 स्वर्गीय शरद जोशी की 85वीं सालगिरह का वर्ष है. वे आज होते तो मुस्कराते हुए अवश्य कहते, देखो, मैं अभी भी सार्थक लिख रहा हूं. यह अपने आप में कम महत्त्वपूर्ण नहीं है कि अर्सा पहले जो वे लिख गये, वह आज की स्थितियों पर मार्मिक टिप्पणी लगता है.

  • लोक का अर्थ, मंथन की परंपरा और राष्‍ट्रीय आयोजन

    लोक का अर्थ, मंथन की परंपरा और राष्‍ट्रीय आयोजन

    मंथन भारत का आधारभूत तत्‍व है, इसलिए विमर्श के बिना भारत की कल्‍पना भी की जाएगी तो वह अधूरी प्रतीत होगी। यहां लोकतंत्र शासन व्‍यवस्‍था की सफलता का कारण भी यही है कि वेद, श्रुति, स्‍मृति, पुराण से लेकर संपूर्ण भारतीय वांग्‍मय, साहित्‍य संबंधित पुस्‍तकों और चहुंओर व्‍याप्‍त संस्‍कृति के विविध आयमों में लोक का सुख, लोक के दुख का नाश, सर्वे भवन्‍तु सुखिन: और जन हिताय-जन सुखाय की भावना ही सर्वत्र दृष्‍टि‍गत होती है।

  • सोशल मीडिया इंश्योरेंस:लिखने की आजादी-

    देश में चल रही अभिव्यक्ति की आजादी की डिबेट में “सोशल मीडिया इंश्योरेंस” कंपनी भी कूद पड़ी है. यह इंश्योरेंस सोशल मीडिया पर प्रत्येक व्यक्ति को बिना डरे, खुल के लिखने के लिए प्रेरित करती है. यदि सवाल देश भक्ति और अभिव्यक्ति की आजादी से जुड़ा हो तो यह ओर भी ज्यादा महत्त्वपूर्ण बन जाता है, क्योंकि देश भक्ति बाजार की मंडी में पैदा होती है.

  • बहिष्कारी तिरस्कारी व्यापारी

    बहिष्कारी तिरस्कारी व्यापारी

    एक जमाना था जब गाँधी जी ने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया और भारत की जनता गाँधी जी साथ खड़ी थी. भारत के कुछ लोगों को अपनी इस बहिष्कार की गलती का अहसास हुआ कि पूरी दुनिया बहुत आगे निकल चुकी है और भारत तकनीकी तौर पर पिछड़ गया है .

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