ताजा सामाचार

आप यहाँ है :

मीडिया की दुनिया से
 

  • गंगा औद्योगिक  प्रदूषण के साथ राजनीतिक प्रदूषण का भी शिकार हो गई

    गंगा औद्योगिक प्रदूषण के साथ राजनीतिक प्रदूषण का भी शिकार हो गई

    नेता लोग चुनाव जीतने के लिए कटिबद्धता से हर उपाय करते हैं। उसी तरह अफसर पोस्टिंग या तरक्की के लिए हर बाधा दूर करने का मार्ग खोजते हैं। अधिक से अधिक टैक्स वसूलने, खजाना बढ़ाने के लिए सरकार एक से एक तरीके निकालती है। पर, अफसोस! गंभीरतम राष्ट्रीय समस्याओं या जरूरी से जरूरी सामाजिक आवश्यकताएं पूरी करने के लिए उसी कटिबद्धता का शतांश भी नहीं लगाया जाता। नदियों की बदहाली वैसी ही एक समस्या है।

  • 6 लाख से ज्यादा की खरीदी की तो आपकी जानकारी सीधे सरकार को

    6 लाख से ज्यादा की खरीदी की तो आपकी जानकारी सीधे सरकार को

    सरकार 2 लाख के नकद लेनदेन पर रोक पहले ही लगा चुकी है, अब उन लोगों पर सरकारी चाबुक चलने वाला है जो 6 लाख से ज्यादा का लेनदेन करेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार की नजर 6 लाख की खरीददारी पर होगी, इसमें यह देखा जाएगा कि कहीं लेनदेन काले धन को वैध बनाने के मकसद से तो नहीं किया गया? सूत्रों की मानें तो इस निगेहवानी की जद में ज्वैलरी या अन्य महंगे सामानों की खरीददारी होगी। दुनिया के कई देशों में इस तरह के नियम पहले से चल रहे हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक एक सरकारी अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि ज्यादातर देशों में इस तरह की सीमा 10 हजार डॉलर यानी आज की भारतीय मुद्रा के हिसाब से 6 लाख 38 हजार 565 रुपये है। अधिकारी ने कहा कि अपने देश में आम सहमति के साथ 6 लाख रुपये के आसपास की सीमा तय करने पर चर्चा चल रही है।

  • आज तक के पुण्य प्रसून पर भड़के रामदेव बाबा

    आज तक के पुण्य प्रसून पर भड़के रामदेव बाबा

    योग गुरु बाबा रामदेव एक टीवी शो के दौरान अपना आपा खो बैठे। आजतक के कार्यक्रम ‘थर्ड डिग्री’ में जानेमाने पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी, अंजना ओम कश्यम उनका इंटरव्यू ले रहे थे। बाबा रामदेव पर सवालों की बौछार हो रही थी तभी वो भड़क उठे और पुण्य प्रसून को बोले आप गलत आरोप लगा रहे […]

  • मणिपुर से भी छोटा देश इसराईल इतना ताकतवर कैसे बना

    मणिपुर से भी छोटा देश इसराईल इतना ताकतवर कैसे बना

    प्रथम विश्व युद्ध के पहले फ़लस्तीन ऑटोमन साम्राज्य का एक ज़िला था. पहले विश्व युद्ध में ऑटोमन साम्राज्य को ब्रिटेन और उसके सहयोगियों से हार का सामना करना पड़ा.

  • जिस शेषन से अधिकारी और  राजनेता खौफ खाते थे वो आज गुमनामी में वृध्दाश्रम में जीवन जीने को मजबूर है

    जिस शेषन से अधिकारी और राजनेता खौफ खाते थे वो आज गुमनामी में वृध्दाश्रम में जीवन जीने को मजबूर है

    देश में चुनाव आयोग की हनक कायम करने वाले पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन आज बुढ़ापे में संकट भरा जीवन गुजार रहे हैं । गुमनाम शख्स की तरह एक वृद्धाश्रम में उनकी जिंदगी कट रही है। उनके दौर के लोग बताते हैं कि उन्होंने इस कदर आयोग का रुतबा कायम किया था कि 90 के दशक में एक मजाक बहुत प्रचलित था कि- भारत के नेता या तो खुदा से डरते हैं या फिर टीएन शेषन से। 1955 में आईएएस टॉपर रहे टीएन शेषन ने जब 1990 में देश के मुख्य चुनाव आयुक्त का पदभार संभाला तो स्थितियां खराब थीं। चुनावों में बूथ कैप्चरिंग के लिए बिहार बदनाम रहता था। हिंसा और बड़े पैमाने पर गड़बडी़ होती थी। मगर उस वक्त टीएन शेषन ने कठोर कदम उठाया। कई चरणों में चुनाव कराने का फैसला किया। उस समय पांच चरणों में बिहार के चुनाव हुए। यहीं नही एक रणनीति के तहत कई बार चुनाव तिथियों में फेरबदल भी किया। बूथ कैप्चरिंग रोकने के लिए पहली बार उन्होंने देश में केंद्रीय सुरक्षा बलों की निगरानी में चुनाव कराया। वर्ष 1997 में शेषन राष्ट्रपति का चुनाव भी लड़ चुके हैं, हालांकि उन्हें केआर नारायणन से हार का सामना करना पड़ा।

  • अंबानी के इस स्कूल की फीस सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे

    अंबानी के इस स्कूल की फीस सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे

    21वीं सदी का एक सच यह भी है कि दुनिया के हर मां-बाप दो चीजों में अपने वश भर समझौता नहीं करते हैं। एक शिक्षा और दूसरी चिकित्सा। गरीब से गरीब अभिभावक अपने बच्चों को अच्छे से अच्छे स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं और अगर जरूरत पड़े तो सबसे बेहतर चिकित्सा दिलाना चाहते हैं। लेकिन आज के युग में ये दोनों ही चीजें हैसियत के हिसाब से तय होती हैं। देश के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी ने अपने पिता की याद में मुंबई में धीरूभाई अंबानी इंटरनेशनल स्कूल खोला। बेशक, अपने स्तर के स्कूलों में अंबानी का स्कूल शीर्ष रैंक पर है, लेकिन स्कूल की फीस इतनी है कि आम आदमी बस ख्वाब में ही अपने बच्चों का दाखिला इस स्कूल में करा सकता है। देश में यह बॉलीवुड सेलिब्रिटीज की पहली पसंद है। ज्यादातर सेलिब्रिटीज के बच्चे या तो यहां पढ़ रहे हैं या पढ़ चुके हैं। आखिर वे कौन सी खासियतें हैं जो धीरूभाई अंबानी इंटरनेशनल स्कूल को सबसे अलग बनाती हैं, आइये आपको बताते हैं।

  • अब  न्यूज़ चैनल वाले एक दूसरे को गुंडा कहने लगे हैं

    अब न्यूज़ चैनल वाले एक दूसरे को गुंडा कहने लगे हैं

    टीवी इतिहास में शायद ही आपने कभी एक न्यूज चैनल को अपने लाइव प्रोग्राम में दूसरे न्यूज चैनल के पत्रकार पर आरोप मढ़ते हुए देखा होगा। लेकिन अब ऐसा भी हो गया है। दरअसल मामला अंग्रेजी न्यूज चैनल रिपब्लिक टीवी और हिंदी न्यूज चैनल एबीपी न्यूज से जुड़ा है। रिपब्लिक टीवी ने अपने प्राइम टाइम शो में एबीपी न्यूज के रिपोर्टर का चेहरा दिखाते हुए उसे ‘गुंडा’ (goon) कह दिया, जिसे आप दी गई तस्वीर में पढ़ सकते हैं।

  • बहन को साथ रखने के लिए पति से ही उसकी शादी करवा दी

    बहन को साथ रखने के लिए पति से ही उसकी शादी करवा दी

    पाकिस्तान के मुल्तान में एक लड़की ने अपनी बहन की शादी अपने ही पति से करवा दी। इस शादी के पीछे जो कारण बताया जा रहा है वो लोगों को हजम नहीं हो रहा है। मामला पंजाब प्रांत के मुल्तान का है। पाकिस्तान के दुनिया न्यूज ने मामले का वीडियो ट्वीटर पर शेयर किया है। वीडियो के मुताबिक फराज नाम के शख्स की शादी करीब डेढ़ महीने पहले हुई थी, लेकिन फराज की बीवी अलीना ने अपनी चचेरी बहन अलिस्मा की शादी कुछ ही हफ्तों में अपने शौहर से करवा दी। अलीना ने मीडिया को बताया कि उसका अपनी बहन के बिना मन नहीं लगता था, इसलिए उसे पास रखने के लिए उसकी शादी पति से कराई। अलीना की बहन अलिस्मा का भी यही कहना है। अलीना ने बताया कि वह उसकी चचेरी बहन बचपन से ही साथ रही हैं, दोनों एक ही स्कूल में पढ़ती थीं। हर काम वे साथ साथ करती थीं। इसलिए उसकी आदत पड़ गई। शादी के बाद जब पति के घर में आई तो कुछ हफ्ते कैसे भी कटे, लेकिन जब बहन की याद ने बेचैन कर दिया तो अपने शौहर से ही उसका निकाह करवाने का फैसला ले लिया।

  • भारतीय पत्रकारों ने लंदन में होटल से चम्मचें चुराई, रंगे हाथ पकड़े गए

    कोलकाता । पत्रकारिता को वैसे तो हिम्मत और ईमानदारी का पेशा माना जाता है, जिसका काम लोगों तक सच्चाई पहुंचाना होता है। लेकिन भारत के कुछ पत्रकारों ने सात समंदर पार ऐसी हरकत कर दी जिससे इस पेशे के साथ ही देश भी शर्मसार हो गया।

  • अब तो संस्कृत और हिंदी के शब्द ही सांप्रदायिक हो गए

    अब तो संस्कृत और हिंदी के शब्द ही सांप्रदायिक हो गए

    नई दिल्ली। देश के एक हजार से ज्यादा केंद्रीय विद्यालयों में बच्चों द्वारा सुबह की सभा में गाई जाने वाली प्रार्थना क्या किसी धर्म विशेष का प्रचार है? यह सवाल देश की सबसे बड़ी अदालत में उठा है। इससे संबंधित एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर संवैधानिक मुद्दा मानते हुए कहा है कि इस पर विचार जरूरी है। कोर्ट ने इस सिलसिले में केंद्र सरकार और केंद्रीय विश्वविद्यालयों नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

  • Page 1 of 84
    1 2 3 84

ईमेल सबस्क्रिप्शन

PHOTOS

VIDEOS

Back to Top

Page 1 of 84
1 2 3 84