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फिल्म समीक्षा
 

  • फ़िल्म समीक्षा : सांड की आँख

    फ़िल्म समीक्षा : सांड की आँख

    अर्जुन के अचूक निशाने की प्रेरणा के साथ-साथ तापसी-भूमि की जुझारू जोड़ी, साहस और बुलंद इरादों की अहमियत की दास्तान लेकर जोशीले अंदाज़ में सामने आयी है।

  • युद्ध कौशल से ज्यादा ओजस्वी संवादों का गोला बारूद है ‘केसरी’

    युद्ध कौशल से ज्यादा ओजस्वी संवादों का गोला बारूद है ‘केसरी’

    फिल्म के संवाद कथानक को उभारते हैं - मेरे हिस्से का पानी है पियूं या फेंकूं तुझे क्या.. हमारे कन्धों पर ये किले खड़े हैं और वो हमे डरपोक बताते हैं.. चोट पड़ने पर ही पत्थर की मजबूती का पता चलता है.

  • हमें क्यों देखना चाहिए “मणिकर्णिका”!

    हमें क्यों देखना चाहिए “मणिकर्णिका”!

    फिल्मोद्योग की अपनी कुछ व्यवसायिक सीमाएँ हैं जिनसे बंधी यह फ़िल्म कहीं-कहीं आपको तथ्यहीन लगेगी,

  • ऐड़े पुलिस अफसरों को सामाजिक मान्यता दिलाती ‘सिम्बा’

    ऐड़े पुलिस अफसरों को सामाजिक मान्यता दिलाती ‘सिम्बा’

    भले ही उनकी फिल्मों का स्वाद एकरसता को नहीं तोड़ता और दर्शक जाने पहचाने किरदारों को बार बार देखने के लिये लालायित रहते है.

  • बौनी कुंठा से उबर आसमान के तारे तोड़ने को बेताब ‘ज़ीरो’

    बौनी कुंठा से उबर आसमान के तारे तोड़ने को बेताब ‘ज़ीरो’

    पिछले छह महीनो में सलमान की रेस-3 और आमिर की ठग्स ऑफ़ हिन्दोस्तान के बाद अब शाहरुख़ की ज़ीरो का हश्र यही साबित करता है कि कंटेंट के अभाव में ट्रीटमेंट का कोई मोल नहीं.

  • सुई सीधी खड़ी नाचे धागा और दो बत्ती वाला फुस्सी पटाखा

    सुई सीधी खड़ी नाचे धागा और दो बत्ती वाला फुस्सी पटाखा

    कड़वे दिनों में जब चाय वाले की बिक्री पर कोई असर नहीं होता तो बॉक्स ऑफिस पर श्राद्ध पक्ष में पितृ देवता क्यूँ भला किसी

  • बॉर्डर पर दुश्मन के छक्के छुड़ाती ‘पल्टन’

    बॉर्डर पर दुश्मन के छक्के छुड़ाती ‘पल्टन’

    हृदयस्पर्शी गीत-संगीत का बड़ा हाथ था. 1962 के भारत चीन युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म में लद्दाख में दुश्मनों की बीच घिरी भारतीय सेना

  • दरकते रिश्तों का गड़बड़झाला ‘साहब, बीवी और गैंगस्टर-3’

    दरकते रिश्तों का गड़बड़झाला ‘साहब, बीवी और गैंगस्टर-3’

    बांग्ला भाषा के यशस्वी साहित्यकार बिमल मित्र के 1953 में प्रकाशित उपन्यास पर श्वेत श्याम फिल्मो के युग में प्रबुद्ध फिल्मकार गुरुदत्त ने ‘साहब, बीवी और गुलाम’ (1962) बनाई थी. उनकी इस कृति को आज भी भारत की श्रेष्ठ फिल्मो में गिना जाता है. गुरुदत्त ‘साहब, बीवी और गुलाम’ के निर्माता थे

  • सोनाटा

    सोनाटा

    कल मैंने अपर्णा सेन द्वारा निर्देशित फिल्म 'सोनाटा' का प्रीव्यू देखा, यह फिल्म 21 अप्रैल को सिनेमा हाल में रिलीज़ होने जा रही है। अपर्णा एक ज़माने में जानी मानी अभिनेत्री रह चुकी हैं ,

  • ब्लू माउंटेंस-एक फिल्म ही नहीं, सन्देश भी

    ब्लू माउंटेंस-एक फिल्म ही नहीं, सन्देश भी

    आज रिलीज होने वाली ग्रेसी सिंह-रणवीर शौरी अभिनीत ब्लू माउंटेंस महज एक फिल्म नहीं बल्कि बच्चों के नाम एक संदेश है। ऐसा संदेश, जो इस तनावपूर्ण माहौल और हर पल आगे आने की होड़ के बीच बच्चों की जिंदगी बदल सकता है। नन्हे-मुन्ने बच्चे हमारे देश की जनसंख्या का बहुत बड़ा हिस्सा हैं, उनकी भावनाओं एवं समस्याओं को लेकर इनके लायक फिल्में बहुत कम बनती हैं। लेकिन इसके लिये फिल्म के निर्माता के साहस की प्रशंसा की जानी चाहिए। प्लाजा पीवीआर में प्रीमियर शो के अवसर पर ब्लू माउंटेंस की पूरी टीम के साथ दिल्ली के जाने माने हस्तशिल्प निर्यातक और ब्लू माउंटेंस के निर्माता राजेश जैन पूरे उत्साहित थे। आज की तनावपूर्ण जिंदगी में हर बच्चे से मां-बाप ने इतनी उम्मीदें लगा रखी हैं कि कामयाबी से कम उसे कुछ मंजूर नहीं।

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