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पाठक मंच
 

  • स्थानीय मुद्दों एवं नेताओं की उपेक्षा ज्यादा नहीं चल सकती

    स्थानीय मुद्दों एवं नेताओं की उपेक्षा ज्यादा नहीं चल सकती

    नरेन्द्र मोदी के अब कमजोर होने के संकेत मिलने लगे हैं और लगातार मिल रहे हैं। मोदी ने दिल्ली में दो रैलियां कीं और शाहीनबाग के मुद्दे को बहुत ही आक्रामक तरीके से उठाया, लेकिन मतदाताओं पर उसका कोई असर नहीं पड़ा।

  • कब आएगा देश में जनसंख्या विरोधी कानून ?

    कब आएगा देश में जनसंख्या विरोधी कानून ?

    इस समय देश में नागरिक संशोधन बिल पर हो रहे पक्ष – विपक्ष के आंदोलनों के बीच एक बड़ा मुद्दा देश के नेताओं से दूर हो गया हैं |

  • ऑनलाइन खरीदारी का बढ़ता प्रचलन

    एक ऐसे समय में जहां आज उपभोक्तावादी संस्कृति हमारे दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही है। बाजार आकर्षण का अहम केंद्र बनकर उभर रहे हैं। विज्ञापनों का मायावी जाल उपभोक्ता को अपनी ओर खींच रहा है।

  • दुर्भाग्य मेरे मध्यप्रदेश का….

    दुर्भाग्य मेरे मध्यप्रदेश का….

    पहले संस्कृति विभाग ने इंदौर में कवि सम्मेलन करवाया, वहाँ पर कविता तो गायब रही, चुटकुलेबाजी हावी रही।

  • नागरिकता संशोधन कानून का विरोध तुष्टिकरण का घिनौना रूप

    यह सभा सरकार की घोर प्रशंसा करती है और कानून को यथाशीघ्र ल्रागू करने का अनुरोध करती है, यह भी आग्रह है कि बांग्लादेश से घुसे कई करोड़ मुसलमानों और म्यांमार से घुसे रोहिंग्या

  • जड़ों से जुड़ता “जम्मू-कश्मीर”

    वर्तमान स्थितियों में यह भी सोचना चाहिये कि क्या भविष्य में शांति व सद्भाव बनाने के लिये कश्मीर में हिन्दुओं के हत्याकांडों के दोषियों पर वैधानिक कार्यवाही होनी चाहिये ? अगर उन दोषियों को

  • तेल की खपत पर लगाम जरुरी

    सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर ईरान समर्थित हाउती विद्रोहियों के भीषण हमले के बाद कच्चे तेल के दामों में आया उछाल यही बताता है कि पश्चिम एशिया के विभिन्न देशों के बीच का टकराव किस तरह इस क्षेत्र के साथ-साथ पूरी दुनिया के लिए खतरा बनता है।

  • मारी छोरी छोरा से कम नहीं

    मारी छोरी छोरा से कम नहीं

    यही नहीं उन्होंने चैंपियन शिप में ५ पदक जीतने की बराबरी भी की | सिन्धु ने चीन की पूर्व ओलम्पिक चैंपियन झांग निंग के रिकॉर्ड की भी बराबरी कर ली है |

  • पत्र प्रधानमंत्री जी के नाम

    गत 6 वर्षों में मैने आपको 50 से अधिक पत्र लिखे हैं ,औऱ जब तक मेरी भावना का सम्मान नही होगा ,मेरा लक्ष्य पूरा नही होगा में पत्र लिखती रहूंगी । मेरा विस्वास है मेरे पत्र आपको व , भारत सरकार को मिल रहे होंगे ।

  • एक राष्ट्र एक चुनाव – यानि राष्ट्रीय समय की बचत

    एक राष्ट्र एक चुनाव – यानि राष्ट्रीय समय की बचत

    वर्तमान में हम लोग तक़रीबन आधा राष्ट्रीय-समय चुनावों के हवन-कुण्ड में आहुति बना कर झोंक रहे हैं। अगर इस समय-गणना में सर्वज्ञात छुट्टियाँ एवं टाइम-पास आदि भी जोड़ लिये जायेँ तो शायद हम लोग तीन चौथाई यानि पचहत्तर फीसदी राष्ट्रीय-समय बर्बाद कर रहे हैं।

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