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शेरो शायरी
 

  • नज़्म

    अमन पसंदो ! तुम अपने मज़हब के नाम पर क़त्ल करते हो मर्दों को बरहना करते हो औरतों को

  • तिल के लड्डू

    जाड़े में फिर खु़दा ने खिलवाए तिल के लड्डू हर एक खोंमचे में दिखलाए तिल के लड्डू

  • नज़्म

    मेरे महबूब ! तुम्हारा चेहरा मेरा क़ुरान है जिसे मैं

  • *ऐ नये साल*

    ऐ नये साल बता, तुझ में नयापन क्या है? हर तरफ ख़ल्क ने क्यों शोर मचा रखा है?

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