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अध्यात्म गंगा
 

  • हनुमान के व्यक्तित्व में प्रबंधन के गूढ़ अर्थ छुपे हैः श्री वीरेन्द्र याज्ञिक

    हनुमान के व्यक्तित्व में प्रबंधन के गूढ़ अर्थ छुपे हैः श्री वीरेन्द्र याज्ञिक

    मुंबई के अध्यात्मिक, सांस्कृतिक और धार्मिक जगत में वीरेन्द्र याज्ञिक एक ऐसा नाम है जिनको किसी भी मंच पर सुनना एक दुर्लभ अनुभव होता है। मुंबई में होने वाले किसी भी राजनीतिक सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक या अध्यात्मिक कार्यक्रम में श्री वीरेन्द्र याज्ञिक गीता, भागवत, वेद-पुराण और रामायण के गूढ़ अध्यात्मिक प्रसंगों को इतने रोचक और सहज रूप में प्रस्तुत करते हैं कि श्रोता आश्चर्यचकित रह जाते हैं।

  • महावीर बनने की तैयारी में जुटें

    महावीर बनने की तैयारी में जुटें

    भगवान महावीर आदमी को उपदेश और दृष्टि देते हैं कि धर्म का सही अर्थ समझो। धर्म तुम्हें सुख, शांति, समृद्धि, समाधि, आज, अभी दे या कालक्रम से दे, इसका मूल्य नहीं है। मूल्य है धर्म तुम्हें समता, पवित्रता, नैतिकता, अहिंसा की अनुभूति कराता है। महावीर का जीवन हमारे लिए इसलिए महत्वपूर्ण है कि उसमें सत्य धर्म के व्याख्या सूत्र निहित हैं, महावीर ने उन सूत्रों को ओढ़ा नहीं था, साधना की गहराइयों में उतरकर आत्मचेतना के तल पर पाया था। आज महावीर के पुनर्जन्म की नहीं बल्कि उनके द्वारा जीये गये आदर्श जीवन के अवतरण की/पुनर्जन्म की अपेक्षा है। जरूरत है हम बदलें, हमारा स्वभाव बदले और हम हर क्षण महावीर बनने की तैयारी में जुटें तभी महावीर जयंती मनाना सार्थक होगा।

  • हमारे पर्व और त्यौहार हमें प्रकृति से जोड़ते हैः पुण्डरीकजी गोस्वामी

    हमारे पर्व और त्यौहार हमें प्रकृति से जोड़ते हैः पुण्डरीकजी गोस्वामी

    हमारे पर्व और त्यौहार हमें प्रकृति से जोड़ते हैं, संवत्सर प्रकृति का पर्व है, प्रकृति हमारे मन को नियंत्रित करती है, प्रकृति का प्रभाव मन पर होता है।

  • अपने ‘आज’ को सँवारें, ‘कल’ स्वयं निखर जाएगा

    अपने ‘आज’ को सँवारें, ‘कल’ स्वयं निखर जाएगा

    बहुत विचित्र है मानव मन. कभी यह मन अपने अदृश्य पंखों से हिमालय की ऊँचाइयों तक पहुँचना चाहता है, कभी उन्हीं पंखों को समेटकर सागर की गहराइयाँ नापना चाहता है.

  • त्रिवेणी संगम पर 31 जनवरी से शुरू होगा राजिम कुंभ

    त्रिवेणी संगम पर 31 जनवरी से शुरू होगा राजिम कुंभ

    छत्तीसगढ़ के प्रयागराज के रूप में प्रसिद्ध राजिम के त्रिवेणी संगम पर हर साल एक पखवाड़े का राजिम कुुंभ (कल्प) कल माघ पूर्णिमा के अवसर पर 31 जनवरी से शुरू हो रहा हैै। देश के प्रमुख मठों और आश्रमों के साधु-संतो ंके सानिध्य में 31 जनवरी को देर रात्रि त्रिवेणी संगम पर कुंभ मेले का शुभारंभ समारोह आयोजित किया गया है। विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरी शंकर अग्रवाल शुभारंभ समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। कुंभ कल्प में 7 से 13 फरवरी तक विराट संत समागम होगा। राजिम कुंभ (कल्प) मेले में 31 जनवरी से 13 फरवरी तक मुख्य मंच राजिम में प्रदेश एवं राष्ट्र स्तर के कलाकारों की गरिमामय एवं रोचक कार्यक्रमों की प्रस्तुति प्रतिदिन शाम 6 बजे से होगी।

  • श्री भागवत परिवार के मंच पर अष्टदुर्गा और शिव परिवार का अवतरण

    श्री भागवत परिवार के मंच पर अष्टदुर्गा और शिव परिवार का अवतरण

    मुंबई का श्री भागवत परिवार अध्यात्मिक, सामाजिक और परोपकारी भाव से जुड़े ऐसे लोगों का समूह है जो वार-त्यौहारों को पारिवारिक मूल्यों, सनातन जीवन शैली, सामाजिक संदेश और संस्कारों के बोध के साथ मनाकर पर्वों और त्यौहारों को एक नया अर्थ प्रदान करता है।

  • शिवलिंग और अर्धनारीश्वर का रहस्य

    शिवलिंग और अर्धनारीश्वर का रहस्य

    शिवलिंग से ज्यादा महत्वपूर्ण प्रतिमा पृथ्वी पर कभी नहीं खोजी गई। उसमें आपकी आत्मा का पूरा आकार छिपा है। और आपकी आत्मा की ऊर्जा एक वर्तुल में घूम सकती है, यह भी छिपा है। और जिस दिन आपकी ऊर्जा आपके ही भीतर घूमती है और आप में ही लीन हो जाती है, उस दिन शक्ति भी नहीं खोती और आनंद भी उपलब्ध होता है। और फिर जितनी ज्यादा शक्ति संगृहीत होती जाती है, उतना ही आनंद बढ़ता जाता है।

  • महाशिवरात्रि 13 को मनायें या 14 को

    सनातन धर्म में महाशिवरात्रि का विशेष महत्व प्रतिपादित है। भगवान शिव की आराधना का यह विशेष पर्व माना जाता है। पौराणिक तथ्यानुसार आज ही के दिन भगवान शिव की लिंग रूप में उत्पत्ति हुई थी। प्रमाणान्तर से इसी दिन भगवान शिव का देवी पार्वती से विवाह हुआ है। अतः सनातन धर्मावलम्बियों द्वारा यह व्रत एवं उत्सव दोनों में अति हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। वैसे तो सम्पूर्ण भारतवर्ष में इसकी महिमा प्रथित है परन्तु भगवान आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित द्वादश ज्योतिर्लिगों के क्षेत्र में तथा उनमें भी तीनों लोकों से अलग शिवलोक के रूप में प्रतिष्ठित काशी एवं यहाँ पर विराजमान भगवान विश्वेश्वर के सान्निध्य में तो भक्ति एवं उत्सव का समवेत स्वरूप देखते ही बनता है।

  • हर भारतीय को स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा रचित ” सत्यार्थ प्रकाश ” क्यों पढ़ना चाहिए

    हर भारतीय को स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा रचित ” सत्यार्थ प्रकाश ” क्यों पढ़ना चाहिए

    सत्यार्थ प्रकाश में कुल 14 समुल्लास ( अध्याय ) हैं जो इस प्रकार हैं :-

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