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व्यंग्य
 

  • देशभक्ति की ओवर डोज

    नए भारत में देशभक्ति के मायने औए पैमाने बदल गये हैं. इसीलिए भारतीय संस्कृति की महान परम्परा का जितना प्रचार प्रसार भारत में किया जाता है शायद ही कोई ऐसा देश होगा जो यह सब करता हो.

  • जीएसटी बिल पर सांसद बोले, हमारे साथ धोखा हुआ!

    जीएसटी बिल पर सांसद बोले, हमारे साथ धोखा हुआ!

    जीएसटी बिल पास होने के बाद कई सांसदों ने अरुण जेटली पर धोखा देने का आरोप लगाया है। इन सांसदों का कहना है कि उन्हें बताया गया था कि इस बिल के पास होने के बाद सांसदों का वेतन बढ़ जाएगा लेकिन हमें तो अब जाकर पता चला है कि जीएसटी बिल का हमारे वेतन से कोई लेना देना नहीं है।

  • अंग्रेजी के लेखकों का माफी नामा, ओलंपिक खिलाड़ियों को पुरस्कृत करेंगे

    ओलंपिक में सेल्फी को लेकर विवादों में आई देश की एक मात्र महानतम लेखिका के बयान को मीडिया वालों ने और देश विरोधी लोगों ने तोड़-मरोड़ कर पेश किया है।

  • जूता महिमा

    एक फिल्मी गाना शादी-विवाह में आज तक चलाया जाता है “जूते दे दो पैसे ले लो” लगता था यह जूते वाला खेल बस घर तक ही सीमित है, लेकिन जब एक फिल्म आयी “भाग मिल्खा भाग” तो यह जूता घर से बहार निकल कर खेल के मैदान तक पहुँच गया.

  • योग के बहाने

    योग के बहाने

    गुप्ता साहब ने यूँ तो कभी योगा किया नहीं. पर भला आज कैसे न करते. ह्म तो कहते हैं ऐसे योग रोज हों जिसमें रोजाना कुछ न कुछ मिले.

  • काँग्रेसियों के बाँड का असरः अब लड़कियाँ दोस्ती के बॉंड भरवा रही है

    कोलकाता. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर चौधरी ने नव-निर्वाचित विधायकों से वफादारी बॉन्ड भरवाया है।

  • रेल यात्रा पर एक शोध

    रेल यात्रा पर एक शोध

    रेल विभाग के मंत्री कहते हैं कि भारतीय रेलें तेजी से प्रगति कर रही हैं। ठीक कहते हैं। रेलें हमेशा प्रगति करती हैं। वे बम्‍बई से प्रगति करती हुई दिल्‍ली तक चली जाती हैं और वहाँ से प्रगति करती हुई बम्‍बई तक आ जाती हैं।

  • समस्याएं कांग्रेस हो गईं और कांग्रेस समस्या हो गई

    समस्याएं कांग्रेस हो गईं और कांग्रेस समस्या हो गई

    कांग्रेस को राज करते करते तीस साल बीत गए । कुछ कहते हैं, तीन सौ साल बीत गए । गलत है ।सिर्फ तीस साल बीते । इन तीस सालों में कभी देश आगे बढ़ा , कभी कांग्रेस आगे बढ़ी ।

  • बोलो अच्छे दिन आ गये

    बोलो अच्छे दिन आ गये

    देश के उन लोगों को शर्म आनी चाहिए जो सरकार की आलोचना करते हैं और कहते हैं कि अच्छे दिन नहीं आये हैं. उनकी समझ को दाद तो देनी पड़ेगी मेमोरी जो शोर्ट है. इन लोगों का क्या लोंग मेमोरी तो रखते नहीं.

  • हरेक बात पर कहते हो घर छोड़ो

    घर के मुखिया ने कहा यह वक्त छोटी-छोटी बातों को दिमाग से सोचने का नहीं है. यह वक्त दिल से सोचने का समय है, क्योंकि छोटी-छोटी बातें ही आगे चलकर बड़ी हो जाती हैं.

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