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वार त्यौहार
 

  • होली पर्व भारतीय समाज के जीवंत रंगों का प्रतीक

    होली पर्व भारतीय समाज के जीवंत रंगों का प्रतीक

    होली पर्व भारत में धूमधाम और हर्षोल्लास से मनाया जाने वाला प्राचीन पर्व है। होली पर्व हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुल महीने के शुक्ल पक्ष के अंतिम दिन पूर्णिमा को मनाया जाता है। होली पर्व भारत में परम्परागत रूप से दो दिन मनाया जाता है। पहले दिन फाल्गुन मास की पूर्णिमा को पूजा की होली मनाई जाती है। इस दिन होलिका दहन होता है। इस दिन गोबर के उपलों या लकड़ियों से भारत में जगह-जगह होली रखी जाती है। सभी लोग प्राचीन परम्परों के अनुसार होली को पूजते हैं,

  • गलबहिंयाँ डाले मिलें, ग़ालिब अरु घनश्याम

    क्यों न हम होली पर पहले बिहारी के कुछ दोहों के रंग में डूब लें, फिर रच लेंगे होली पर कुछ और शब्द-रास ! तैयार हैं न आप ? अगर हाँ तो पहले गुनगुना लें कि सतसैया के नाविक के तीर वाले कविवर बिहारी फरमाते हैं - उड़ि गुलाल घूँघर भई तनि रह्यो लाल बितान। चौरी चारु निकुंजनमें ब्याह फाग सुखदान॥

  • प्राचीन काल से लेकर मुगल काल, भक्ति काल और आज तक की होली के रंग

    प्राचीन काल से लेकर मुगल काल, भक्ति काल और आज तक की होली के रंग

    अगर आप होली को पारंपरिक और शास्त्रीय तरीके से खेलेंगे तो होली का यह पर्व आपके जीवन को एक नई उर्जा, मस्ती और रोमांच प्रदान करने में सहायक हो सकता है। होली के अध्यात्मिक एवं धार्मिक महत्व को रेखांकित करता हुआ यह शोधपूर्ण आलेख आपके लिए निश्चित ही उपयोगी होगा।

  • रंगों का त्यौहार: जीवन का उल्लास

    रंगों का त्यौहार: जीवन का उल्लास

    भारतवर्ष त्यौहारों का देश है। हर एक त्यौहार का अपना एक सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक महत्व होता है। इन सारे त्यौहारों में होली ही एक त्यौहार है जो पौराणिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक के साथ-साथ आमोद-प्रमोद के लिये मनाया जाने वाला खुशियों का त्यौहार है।। बुराई पर अच्छाई की विजय का, असत्य पर सत्य और शत्रुता पर मित्रता की स्थापना का यह पर्व विलक्षण एवं अद्भुत है। पुराने गिले-शिकवे भुला कर एक दूसरे के रंग में रंग जाने, हर्ष और उल्लास से एक दूसरे से मिलने और एक दूजे को आपसी सौहार्द एवं खुशियों के रंग लगाने के अनूठे दृश्य इस त्यौहार में मन को ही नहीं माहौल को भी खुशनुमा बनाते हंै। रंगों से ही नहीं, नृत्य गान, ढोलक-मंजीरा एवम अन्य संगीत वादक यंत्रों को बजा कर मनोरंजन करते है।

  • जन्माष्टमी पर विशेष गीत

    जन्माष्टमी पर विशेष गीत

    तुमसे तन-मन मिले प्राण प्रिय! सदा सुहागिन रात हो गई होंठ हिले तक नहीं लगा ज्यों जनम-जनम की बात हो गई

  • भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक है रक्षाबंधन

    भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक है रक्षाबंधन

    रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक है. यह त्यौहार श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षाबंधन बांधकर उनकी लंबी उम्र और कामयाबी की कामना करती हैं. भाई भी अपनी बहन की रक्षा करने का वचन देते हैं.

  • राखी के धागों से जुड़ी है मानवीय संवेदनाएं

    राखी के धागों से जुड़ी है मानवीय संवेदनाएं

    रक्षाबंधन यानी सामाजिक और पारिवारिक एकबद्धता एवं एकसूत्रता का सांस्कृतिक पर्व। प्यार के धागों का एक ऐसा पर्व जो घर-घर मानवीय रिश्तों में नवीन ऊर्जा का संचार करता है।

  • विश्वास की रक्षा ही रक्षाबंधन

    विश्वास की रक्षा ही रक्षाबंधन

    भारतीय परम्परा में विश्वास का बंधन ही मूल है। रक्षाबंधन इसी विश्वास का बंधन है। यह पर्व मात्र रक्षा-सूत्र के रूप में राखी बांधकर रक्षा का वचन ही नहीं देता, वरन प्रेम, समर्पण, निष्ठा व संकल्प के जरिए हृदयों को बांधने का भी वचन देता है।

  • आया बैसाखी का पावन पर्व

    आया बैसाखी का पावन पर्व

    बैसाखी ऋतु आधारित पर्व है. बैसाखी को वैसाखी भी कहा जाता है. पंजाबी में इसे विसाखी कहते हैं. बैसाखी कृषि आधारित पर्व है. जब फ़सल पक कर तैयार हो जाती है और उसकी कटाई का काम शुरू हो जाता है, तब यह पर्व मनाया जाता है.

  • बारह साल बाद महाशिवरात्रि का दुर्लभ शिवयोग संयोग

    बारह साल बाद महाशिवरात्रि का दुर्लभ शिवयोग संयोग

    इस बार महाशिवरात्रि का त्योहार सात मार्च को यानी सोमवार को मनाया जाएगा। देवों के देव महादेव की आराधना का शिवरात्रि महापर्व सोमवार के दिन शिवयोग धनिष्ठा नक्षत्र में सात मार्च को है।

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