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  • मांगलिक कार्य आरम्भ होने का दिन है देवोत्थान एकादशी

    मांगलिक कार्य आरम्भ होने का दिन है देवोत्थान एकादशी

    देवोत्थान एकादशी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कहते हैं। दीपावली के ग्यारह दिन बाद आने वाली एकादशी को ही प्रबोधिनी एकादशी अथवा देवोत्थान एकादशी या देव-उठनी एकादशी कहा जाता है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव चार मास के लिए शयन करते हैं।

  • डाक विभाग के  वाटरप्रूफ रंगीन डिजायनर लिफाफेमें भेजिये राखी

    डाक विभाग के वाटरप्रूफ रंगीन डिजायनर लिफाफेमें भेजिये राखी

    जोधपुर। हर बहन चाहती है कि उसके द्वारा भेजी जा रही राखी सुरक्षित और तीव्रता से उसके भाई के पास पहुँच सके। ऐसे में बहनों द्वारा भाईयों की कलाइयों पर बँधने वाली राखी सुरक्षित रूप में व तीव्र गति से भेजी जा सके, इसके लिए डाक विभाग ने विशेष प्रबन्ध किये हैं।

  • अक्षय तृतीया ,29 अप्रैल पर विशेष: एक अनूठा त्यौहार है अक्षय तृतीया

    अक्षय तृतीया ,29 अप्रैल पर विशेष: एक अनूठा त्यौहार है अक्षय तृतीया

    अक्षय तृतीया भारतीय संस्कृृति एवं परम्परा का एक अनूठा एवं इन्द्रधनुषी त्यौहार है। न केवल जैन परम्परा में बल्कि सनातन परम्परा में यह एक महत्वपूर्ण त्यौहार है, इस त्यौहार के साथ-साथ एक अबूझा मांगलिक एवं शुभ दिन भी है,

  • गणगौर: नारी शक्ति और संस्कार का पर्व

    गणगौर: नारी शक्ति और संस्कार का पर्व

    गणगौर का त्यौहार सदियों पुराना हैं। हर युग में कुंआरी कन्याओं एवं नवविवाहिताओं का अपितु संपूर्ण मानवीय संवेदनाओं का गहरा संबंध इस पर्व से जुड़ा रहा है। यद्यपि इसे सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मान्यता प्राप्त है किन्तु जीवन मूल्यों की सुरक्षा एवं वैवाहिक जीवन की सुदृढ़ता में यह एक सार्थक प्रेरणा भी बना है।

  • होली पर्व भारतीय समाज के जीवंत रंगों का प्रतीक

    होली पर्व भारतीय समाज के जीवंत रंगों का प्रतीक

    होली पर्व भारत में धूमधाम और हर्षोल्लास से मनाया जाने वाला प्राचीन पर्व है। होली पर्व हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुल महीने के शुक्ल पक्ष के अंतिम दिन पूर्णिमा को मनाया जाता है। होली पर्व भारत में परम्परागत रूप से दो दिन मनाया जाता है। पहले दिन फाल्गुन मास की पूर्णिमा को पूजा की होली मनाई जाती है। इस दिन होलिका दहन होता है। इस दिन गोबर के उपलों या लकड़ियों से भारत में जगह-जगह होली रखी जाती है। सभी लोग प्राचीन परम्परों के अनुसार होली को पूजते हैं,

  • गलबहिंयाँ डाले मिलें, ग़ालिब अरु घनश्याम

    क्यों न हम होली पर पहले बिहारी के कुछ दोहों के रंग में डूब लें, फिर रच लेंगे होली पर कुछ और शब्द-रास ! तैयार हैं न आप ? अगर हाँ तो पहले गुनगुना लें कि सतसैया के नाविक के तीर वाले कविवर बिहारी फरमाते हैं - उड़ि गुलाल घूँघर भई तनि रह्यो लाल बितान। चौरी चारु निकुंजनमें ब्याह फाग सुखदान॥

  • प्राचीन काल से लेकर मुगल काल, भक्ति काल और आज तक की होली के रंग

    प्राचीन काल से लेकर मुगल काल, भक्ति काल और आज तक की होली के रंग

    अगर आप होली को पारंपरिक और शास्त्रीय तरीके से खेलेंगे तो होली का यह पर्व आपके जीवन को एक नई उर्जा, मस्ती और रोमांच प्रदान करने में सहायक हो सकता है। होली के अध्यात्मिक एवं धार्मिक महत्व को रेखांकित करता हुआ यह शोधपूर्ण आलेख आपके लिए निश्चित ही उपयोगी होगा।

  • रंगों का त्यौहार: जीवन का उल्लास

    रंगों का त्यौहार: जीवन का उल्लास

    भारतवर्ष त्यौहारों का देश है। हर एक त्यौहार का अपना एक सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक महत्व होता है। इन सारे त्यौहारों में होली ही एक त्यौहार है जो पौराणिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक के साथ-साथ आमोद-प्रमोद के लिये मनाया जाने वाला खुशियों का त्यौहार है।। बुराई पर अच्छाई की विजय का, असत्य पर सत्य और शत्रुता पर मित्रता की स्थापना का यह पर्व विलक्षण एवं अद्भुत है। पुराने गिले-शिकवे भुला कर एक दूसरे के रंग में रंग जाने, हर्ष और उल्लास से एक दूसरे से मिलने और एक दूजे को आपसी सौहार्द एवं खुशियों के रंग लगाने के अनूठे दृश्य इस त्यौहार में मन को ही नहीं माहौल को भी खुशनुमा बनाते हंै। रंगों से ही नहीं, नृत्य गान, ढोलक-मंजीरा एवम अन्य संगीत वादक यंत्रों को बजा कर मनोरंजन करते है।

  • जन्माष्टमी पर विशेष गीत

    जन्माष्टमी पर विशेष गीत

    तुमसे तन-मन मिले प्राण प्रिय! सदा सुहागिन रात हो गई होंठ हिले तक नहीं लगा ज्यों जनम-जनम की बात हो गई

  • भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक है रक्षाबंधन

    भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक है रक्षाबंधन

    रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक है. यह त्यौहार श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षाबंधन बांधकर उनकी लंबी उम्र और कामयाबी की कामना करती हैं. भाई भी अपनी बहन की रक्षा करने का वचन देते हैं.

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