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वार त्यौहार
 

  • वसंतोत्सव : प्रेम का पर्व

    वसंतोत्सव : प्रेम का पर्व

    प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति में ऋतुओं का विशेष महत्व रहा है. इन ऋतुओं ने विभिन्न प्रकार से हमारे जीवन को प्रभावित किया है. ये हमारे जन-जीवन से गहरे से जुड़ी हुई हैं. इनका अपना धार्मिक और पौराणिक महत्व है. वसंत ऋतु का भी अपना ही महत्व है.

  • दीपोत्सव : अंधकार की जड़ता पर चेतना का स्वर्णिम हस्ताक्षर

    दीपोत्सव : अंधकार की जड़ता पर चेतना का स्वर्णिम हस्ताक्षर

    संसार की असंख्य दीपकों की उज्ज्वल प्रकाश रश्मियों से मन मंदिर को अालोकित करने की अनंत कामना का अपूर्व पर्व है दीपोत्सव। दीपावली केवल बाहर रोशनी जलाने का नाम नहीं, बल्कि अंतर को भी प्रज्ज्वलित करने का पर्व है। हमारी चेतना बाहर की ओर देखती है, अगर हम अंदर की ओर देखें तो कायाकल्प हो सकता है।

  • धनतेरस, दिवाली और भाई दूज के मुहुर्त

    धनतेरस, दिवाली और भाई दूज के मुहुर्त

    इस वर्ष धनतेरस 9 नवम्बर दिन सोमवार 2015 को त्रयोदशी रात्रि 7:10 बजे तक रहेगी। चौघड़िया का मुहूर्त इस प्रकार रहेगा- सांय 6:17 से 07:45 बजे तक।

  • नवसृजन का पर्व है नवरात्रि

    नवसृजन का पर्व है नवरात्रि

    भारतीय वाङमय में हर दिन और हर समय काल का महत्व है। नवरात्रि का तो विशेष महत्व है, क्योंकि यह ऋतु परिवर्तन के साथ ही प्रकृति के नवसृजन का शुभारंभ भी है। नवरात्रि के प्रथम दिवस से ही संपूर्ण प्रकृति एक नई अंगड़ाई लेती है। नवरात्रि के ये नौ दिन धर्म, अध्यात्म, साधना, मानसिक शांति, नए कार्य के शुभारंभ से लेकर जीवन के किसी भी क्षेत्र में एक नई शुरुआत करने की दृष्टि से उत्तम माने गए हैं।

  • इतिहास के आइने में रक्षाबंधन का पर्व

    रक्षाबंधन हिन्दुओं का प्रमुख त्यौहार है। श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला यह त्यौहार भाई बहन के प्यार का प्रतीक है। सात्विकता एवं पवित्रता का सौंदर्य लिए यह त्यौहार सभी जन के हृदय को अपनी खुशबू संवेदनाओं से महकाता है।

  • रक्षाबंधनः भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधि पर्व

    रक्षाबंधनः भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधि पर्व

    रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधि पर्व है ।अनेकानेक श्रेष्ठतम आदर्शों उच्चतम प्रेरणाओ,महान प्रतिमानों और वैदिक वांग्मय से लेकर अद्यतन संस्कृति तक फैले हुए भारतीयता के समग्र जीवन का प्राण है|यह पर्व श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को आयोजित किया जाता जाता है, जब चन्द्रमा श्रवण नक्षत्र में विचरण करते हों तो यह पर्व आता है।

  • मन डोलय रे मांघ फगुनवा,रस घोलय रे मांघ फगुनवा

    अनुराग की मादक छाई छटा,अलि के मन को नशीला किया। तितली बन नाच परी-सी चली,अनुशासन धर्म-का ढीला किया। रंग देख पिकी हो विभोर उठी,विधि ने शिखी आँचल गीला किया ऋतुराज पिता ने बड़े सुख से,जब मेदिनी का कर पीला किया। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में भले ही विविध प्रकार से रंगों का उत्सव मनाया जाता […]

  • होली के आध्यात्मिक रंग

    भारतवर्ष की ख्याति पर्व-त्यौहारों के देश के रूप में है। इन पर्व-त्यौहारों की श्रृंखला में होली का विशेष महत्व है। होली का आगमन इस बात का सूचक है कि अब चारों तरफ वसंत ऋतु का सुवास फैलनेवाला है। यह पर्व शिशिर ऋतु की समाप्ति और ग्रीष्म ऋतु के आगमन का प्रतीक है। वसंत के आगमन […]

  • इस बार दीपावली पर 149 वर्ष पुराना संयोग

    दीपावली पर इस बार १४९ साल बाद धन लक्ष्मी योग बन रहा है। इस योग में धन की अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी के पूजन का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस संयोग में लक्ष्मी को प्रसन्न करने से निरंतर धन-धान्य की प्राप्ति होती है। पंचग्रही योग सिद्घांत के अनुसार ऐसा योग ५०० साल में केवल […]

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