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  • जानिए भारत के किन शहरों में कितने पति और कितनी पत्नियाँ बेवफा है?

    जानिए भारत के किन शहरों में कितने पति और कितनी पत्नियाँ बेवफा है?

    शादी के बाद भी थी प्यार की तलाश करने वाले लोगों की इच्छा पूरी करती थी दुनिया की मशहूर डेटिंग साइट एशले मेडिसन। इस साइट की सदस्यता लेकर कई लाख लोगों के प्यार पाने की ख्वाहिश पूरी भी हुई। भारत के भी लाखों लोग उनमें शामिल हैं।

  • फ़िल्मी धुनों व धार्मिक भजनों का यह ‘कॉकटेल

    फ़िल्मी धुनों व धार्मिक भजनों का यह ‘कॉकटेल

    भारतीय फ़िल्म उद्योग प्रत्येक वर्ष अरबों रुपये का कारोबार करता है। इसमें एक बड़ा हिस्सा इन्हीं फ़िल्मों में इस्तेमाल होने वाले गीत-संगीत पर भी खर्च होता है। प्रत्येक फ़िल्म निर्माताओं की हमेशा यही कोशिश रहती है कि वे अच्छी से अच्छी,मधुर व आकर्षक धुनों पर आधारित गीत अपनी फ़िल्मों में शामिल कर उसकी सफलता सुनिश्चित करें।

  • ऑटो में मेरे पीछे कोई चाकू लिए बैठा था, एक यवती के खौफनाक अनुभव

    बेंगलुरु: बेंगलुरु की युवती रंजनी शंकर के रात में सुरक्षित घर पहुंचने और एक ऑटो चालक के उसके लिए मददगार साबित होने संबंधी पोस्ट बीते सप्ताह फेसबुक पर वायरल हुआ था। इसके बाद इस घटना के विपरीत बेंगलुरु से ही अब एक ऐसा पोस्ट सामने आया है जो महिलाओं की सुरक्षा पर फिर सवाल खड़े […]

  • गिलगिट बास्टिस्तान को लेकर भारत को आगे आना होगा

    गिलगिट बल्टिस्तान को लेकर भारत सरकार को स्पष्ट नीति अपनाना चाहिए, क्योंकि ये क्षेत्र शताब्दियों से भारतीय क्षेत्र रहा है और आज भी यहाँ के लोग चाहते हैं कि उनके बच्चों के लिए भारत के मेडिकल, इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेजों में कोटा रखा जाए।   ये बात दक्षिण एशियाई राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ श्री आलोक […]

  • मुंबई रेलः मुंबई की धड़कनों को सुनने और समझने की ज़रुरत

    सुचेता दलाल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक ऐसा नाम है जिनके नाम की वजह से देश की पत्रकारिता को गौरव और सम्मान की नज़रों से देखा जाता है। आज जहाँ खबरिय़ा चैनल को गला पाड़ू और कान फोड़ू एंकर रिपोर्टर किसी मदारी और बंदर के तमाशे का लाईव शो करते दिखाई देते हैं, वहीं सुचेता […]

  • मुख्यमंत्री बाल ह्रदय सुरक्षा : संवेदनशील सेवा की मिसाल

    बच्चों के दिलों की धड़कनों को सुनने के लिए सचमुच बच्चों जैसा कोमल दिल चाहिए। एक मासूम-सी चाहत जहाँ अनजाने में ही आने वाले कल को कुछ कर दिखाने का वचन दे रही हो उस चाहत को किसी भी सूरत में आहत नही न होने देना वास्तव में एक बड़ी जिम्मेदारी और समझदारी से भरा […]

  • टुकड़े-टुकड़े हो बिखरती मर्यादा का महीन सवाल

    पीढ़ियों का अंतराल तो हमेशा होता है समय के आगे – हर अगला कदम पिछले कदम से खौफ खाता है कि हर पिछला कदम अगले कदम से बढ़ गया है रश्मि प्रभा की ऊपर दी गईं पंक्तियाँ चंद अल्फ़ाज़ों में पीढ़ी अंतराल की एक दास्तान का मुकम्मल बयान मालूम पड़ती हैं। बहरहाल, एक और सीन […]

  • भ्रष्टाचार का गरलःनिजात नहीं सरल

    चाणक्य ने कहा था कि जिस तरह अपनी जिह्ना पर रखे शहद या हलाहल को न चखना असंभव है, उसी प्रकार सरकारी कोष से संबंधित व्यक्ति राजा के धन का उपयोग न करे, यह भी असंभव है। जिस प्रकार पानी के अन्दर मछली पानी पी रही है या नहीं, जानना कठिन है, उसी प्रकार राज […]

  • 15 वीं सदी का वो रहस्यमयी रुसी यात्री जो भारत आया था!

    15 वीं सदी में भौगोलिक खोजों का युग शुरू हुआ| लोगों ने दुनिया के बारे में जानने की कोशिशें शुरू कीं; निडर यात्री नई दुनिया, नए मार्ग, नए देश तलाशने में जुट गए| यूरोप से अनेक भारत तक पहुँचने की चाह लेकर अनजान और लम्बी समुद्रीयात्राओं पर निकल पड़े| भारत उन दिनों एक ऐसा रहस्यमयी […]

  • भारत में जन्म लेने वाले अधिकतर बच्चे और उन्हें जन्म देने वाली गर्भवती माताएँ कुपोषित

    विकास के लम्बे-चौड़े दावों और ‘बेटी बचाओ’ जैसे सरकारी नुमायशी अभियानों के बावजूद एक नंगी सच्चाई यह है कि भारत में  जन्म लेने वाले अधिकतर बच्चे और उन्हें जन्म देने वाली गर्भवती माँएँ कुपोषित होती हैं। यहाँ तक कि उनकी स्थिति कांगो, सोमालिया और जिम्बाब्वे जैसे ग़रीब अफ्रीकी देशों के बच्चों और गर्भवती स्त्रियों से […]

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