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  • संवेदना के गंगाजल के साथ साकार हुआ 2500 साल पुराना अतीत

    संवेदना के गंगाजल के साथ साकार हुआ 2500 साल पुराना अतीत

    मुंबई का अंधेरी स्थित भुवंस कल्चरल सेंटर मुंबई का ऐसा पहला गौरवशाली केंद्र है, जहाँ पूरे साल साहित्य, कला, संस्कृति, योग, दर्शन, धर्म, अध्यात्म, मनोरंजन से नृत्य, संगीत, फिल्म प्रदर्शन आदि के श्रेष्ठतम कार्यक्रम होते हैं।

  • नंगे पैरो से उड़ती धूल, उतरते शामियाने, उदास आँखें और वीतरागी संत का विहार…

    मध्यप्रदेश के सागर नगर के निकट एक उनींदा सा कस्बा रहली, अचानक गुलजार हो उठा है ,कस्बे की सुबह चमकदार सी हो उठी है, तंग गलियो मे एक दूसरे से जुड़े मकानो से जहा तहा रास्ता निकाल झांकती धूप मे मुस्कराहट सी है, आस पास फुर्सत से बैठे लोगो के जमघट है.

  • श्री सुरेश प्रभु के साथ एक नहीं बस आधा दिन!

    श्री सुरेश प्रभु के साथ एक नहीं बस आधा दिन!

    टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज़ के रूप में धाराप्रवाह चलने वाले बयानवीरों के मूर्खतापूर्ण आख्यानों के बीच एक दिन अचानक केंद्रीय रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु के साथ तीन अलग-अलग कार्यक्रमों में जाने का संयोग मिला, तो ऐसा लगा इस देश में अगर कोई समझदारी, संजीदगी और राष्ट्रीय हित की बात करे तो इस देश के मीडिया में उसके लिए कोई जगह नहीं है।

  • रचनात्मक शक्ति और स्वच्छता : एक अनुचिंतन

    रचनात्मक शक्ति और स्वच्छता : एक अनुचिंतन

    स्वच्छ भारत अभियान एक अधिक उन्नत भारत का पैगाम बनकर आया है। स्वच्छता के कई पहलू हैं, जिनमें खुले में शौच की चुनौती वास्तव में अहम है। एक नए शोध के आने के बाद, जिसका यह निष्कर्ष था कि साफ-सफाई में लापरवाही भी बच्चों में कुपोषण बढ़ाती है, इसमें यूनिसेफ का एक सम्मलेन लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से आयोजित गया ताकि बच्चों को अपूर्ण शारीरिक विकास जैसी समस्याओं से बचाया जा सके। इस सम्मलेन में खुले में शौच का मुद्दा पूरी गंभीरता से उठाया गया।

  • कहां खो गई ‘शुद्ध देसी दीवाली’

    कहां खो गई ‘शुद्ध देसी दीवाली’

    करीब डेढ़ से दो दशक पहले आपके-हमारे घरों में जो शुद्ध देसी दीवाली मनाई जाती थी उसकी जगह अब मिलावटी और दिखावटी दीवाली ने ले ली है। दीवाली के करीब महीनेभर पहले से ही तैयारियां शुरू हो जाती थीं। क्या बच्चे क्या बड़े हिंदू धर्म के इस सबसे त्योहार का उत्साह और उमंग देखते ही बनती थी। सबसे पहले बारी आती घरों की साफ-सफाई की।

  • खूबसूरत जौनसार का घिनौना सामाजिक यथार्थ

    खूबसूरत जौनसार का घिनौना सामाजिक यथार्थ

    उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में स्थित जौनसार-बावर अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। यह परगना क्षेत्र विशेष के आधार पर जनजाति घोषित है। देहरादून से जौनसार क्षेत्र महज 50 किमी की दूरी पर है। करीब 369 गांव के इस घोषित जनजाति क्षेत्र में महासू समेत कई देवी-देवताओं के सैकड़ों मंदिर हैं, जिनमें दलितों और महिलाओं का प्रवेश आज भी वर्जित है।

  • चीन से सीखिये, समय की पाबंदी और मातृभाषा का सम्मान

    चीन से सीखिये, समय की पाबंदी और मातृभाषा का सम्मान

    केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राजग सरकार आने के बाद दुनिया के कई प्रमुख देशों, खासकर पड़ोसी चीन, के साथ भारत के संबंधों को लेकर नयी आशाएं जगी हैं. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आगमन और नरेंद्र मोदी के चीन दौरे के दौरान दिखे उत्साह से इन आशाओं काे बल मिला है.

  • लद्दाख में शिक्षा का स्तर

    लद्दाख में शिक्षा का स्तर

    जम्मू काश्मीर अध्ययन केंद्र, एवं गरवारे कॉलेज पुणे इनके संयुक्त्त प्रयास से विगत दिनों में लद्दाख में शिक्षा के स्तर को जानने के लिए एक टीम भेजी गयी थी । जिसमें जम्मू काश्मीर अध्ययन केंद्र की और से रंजन जी, अरविन्द जी, अंजलि जी, और गरवारे कॉलेज की और से विनय जी तथा 12 पत्रकारिता के छात्र शामिल थे।

  • हमारे बचपन के वो खेल, जिन्हें हम भूल गए

    क्रिकेट, हॉकी, बास्केटबाल, वॉलीबाल, सक्वाश और टेनिस आदि खेलों के सामने ऐसे लगने लगा है कि हमारे देश में कोई भी खेल नहीं खेला जाता था और खेलना कूदना हमें अंग्रेज़ों ने ही सिखाया।

  • एक जैसी हो सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए पेंशन नीति

    एक जैसी हो सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए पेंशन नीति

    आज के भारत में अगर अपनी बात कहने के लिए यह कहा जाए की भारत की १०% के करीब जन संख्या बरिष्ठ नागरिकों की है ( ६० वर्ष आयु से ऊपर) एवं इस में से करीब ७० से ७५% प्रतिशत भारत के देहात में बस्ती है तो यह गलत नहीं होगा और उन में से अधिकांश को किसी प्रकार की ‘सेवा निब्रिती’ पेंशन नहीं मिलती है.

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