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  • आहत यमुना: क्रोधित देव

    आहत यमुना: क्रोधित देव

    हां, हां मैं यमुना हूं। मैने ज़रखेज जमीनों को खूबसूरत बागीचों में बदला है। मैने भूख से बिलखते बचपन को जिंदगी दी है।

  • प्रसिद्धि पाने के ये सस्ते  ‘टोटके’

    प्रसिद्धि पाने के ये सस्ते ‘टोटके’

    धनवान बनने की यही प्रवृति इंसान को भ्रष्टाचार,जमाख़ोरी,रिश्वतख़ोरी,कालाबाज़ारी,तस्करी तथा अन्य कई प्रकार के अपराधों की ओर भी धकेल देती है।

  • वर दे, वीणा वादिनि वर दे  !

    वर दे, वीणा वादिनि वर दे !

    प्रकृति जब शीतकाल के अवसान के पश्चात् नवल स्वरुप धारण करती है, तब मनुष्य धरती पर विद्या और संगीत की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती का आह्वान एवं पूजन करते हैं, जो उनमें नव रस एवं नव स्फूर्ति का संचार करती है.

  • डेनमार्क सबसे कम भ्रष्ट देश – भारत 76 वें स्थान पर

    डेनमार्क सबसे कम भ्रष्ट देश – भारत 76 वें स्थान पर

    करप्शन परसेप्शन इंडेक्स (Corruption Perceptions Index) 2015 के अनुसार 168 देशों की सूची में डेनमार्क सबसे कम भ्रष्ट देश है।

  • 26 जनवरी पर भारत व ऑस्ट्रेलिया पर गूगल डूडल

    26 जनवरी पर भारत व ऑस्ट्रेलिया पर गूगल डूडल

    26 जनवरी 2016: आज गूगल ने अपना डूडल भारत व ऑस्ट्रेलिया को समर्पित किया है। भारत का आज गणतंत्र-दिवस है व ऑस्ट्रेलिया का राष्ट्रीय-दिवस है।

  • संवेदना के गंगाजल के साथ साकार हुआ 2500 साल पुराना अतीत

    संवेदना के गंगाजल के साथ साकार हुआ 2500 साल पुराना अतीत

    मुंबई का अंधेरी स्थित भुवंस कल्चरल सेंटर मुंबई का ऐसा पहला गौरवशाली केंद्र है, जहाँ पूरे साल साहित्य, कला, संस्कृति, योग, दर्शन, धर्म, अध्यात्म, मनोरंजन से नृत्य, संगीत, फिल्म प्रदर्शन आदि के श्रेष्ठतम कार्यक्रम होते हैं।

  • नंगे पैरो से उड़ती धूल, उतरते शामियाने, उदास आँखें और वीतरागी संत का विहार…

    मध्यप्रदेश के सागर नगर के निकट एक उनींदा सा कस्बा रहली, अचानक गुलजार हो उठा है ,कस्बे की सुबह चमकदार सी हो उठी है, तंग गलियो मे एक दूसरे से जुड़े मकानो से जहा तहा रास्ता निकाल झांकती धूप मे मुस्कराहट सी है, आस पास फुर्सत से बैठे लोगो के जमघट है.

  • श्री सुरेश प्रभु के साथ एक नहीं बस आधा दिन!

    श्री सुरेश प्रभु के साथ एक नहीं बस आधा दिन!

    टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज़ के रूप में धाराप्रवाह चलने वाले बयानवीरों के मूर्खतापूर्ण आख्यानों के बीच एक दिन अचानक केंद्रीय रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु के साथ तीन अलग-अलग कार्यक्रमों में जाने का संयोग मिला, तो ऐसा लगा इस देश में अगर कोई समझदारी, संजीदगी और राष्ट्रीय हित की बात करे तो इस देश के मीडिया में उसके लिए कोई जगह नहीं है।

  • रचनात्मक शक्ति और स्वच्छता : एक अनुचिंतन

    रचनात्मक शक्ति और स्वच्छता : एक अनुचिंतन

    स्वच्छ भारत अभियान एक अधिक उन्नत भारत का पैगाम बनकर आया है। स्वच्छता के कई पहलू हैं, जिनमें खुले में शौच की चुनौती वास्तव में अहम है। एक नए शोध के आने के बाद, जिसका यह निष्कर्ष था कि साफ-सफाई में लापरवाही भी बच्चों में कुपोषण बढ़ाती है, इसमें यूनिसेफ का एक सम्मलेन लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से आयोजित गया ताकि बच्चों को अपूर्ण शारीरिक विकास जैसी समस्याओं से बचाया जा सके। इस सम्मलेन में खुले में शौच का मुद्दा पूरी गंभीरता से उठाया गया।

  • कहां खो गई ‘शुद्ध देसी दीवाली’

    कहां खो गई ‘शुद्ध देसी दीवाली’

    करीब डेढ़ से दो दशक पहले आपके-हमारे घरों में जो शुद्ध देसी दीवाली मनाई जाती थी उसकी जगह अब मिलावटी और दिखावटी दीवाली ने ले ली है। दीवाली के करीब महीनेभर पहले से ही तैयारियां शुरू हो जाती थीं। क्या बच्चे क्या बड़े हिंदू धर्म के इस सबसे त्योहार का उत्साह और उमंग देखते ही बनती थी। सबसे पहले बारी आती घरों की साफ-सफाई की।

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