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दुनिया मेरे आगे
 

  • ये संदिग्ध माओवादी और इनका साथ देने वाले

    ये संदिग्ध माओवादी और इनका साथ देने वाले

    अब हमारी नजर 6 सितंबर को होनेवाली अगली सुनवाई पर है। किंतु यह सोचने की बात है कि आखिर इनकी कितनी बड़ी हैसियत है कि इतिहासकार रोमिला थापर, अर्थशास्त्री प्रभात पटनायक,

  • रेल की खिड़की से शहर – दर्शन …!!

    बचपन में केवल एक बार मैं अपने पिता के साथ नागपुर होते हुए मुंबई तक गया था। इसके बाद फिर कभी मेरा

  • आश्रय स्थल में ही आसरा नहीं तो फिर आसरा कहाँ साहेब

    आश्रय स्थल में ही आसरा नहीं तो फिर आसरा कहाँ साहेब

    अब तक जो बलात्कार के मामले सामने आते थे उनमें कोई व्यक्ति अकेला या अपने दोस्तों के साथ कभी नशे में तो कभी आवेश में

  • जिन पे तकिया था वही पत्ते हवा देने लगे

    एक बार फिर लगभग उसी प्रकार की आवाज़ मुज़फ्फरपुर स्थित बालिका गृह में सुनियोजित ढंग से लंबे समय से चलने वाले

  • शक्ति से पहले शांति की स्थापना जरूरी

    शक्ति से पहले शांति की स्थापना जरूरी

    विश्व के विभिन्न देशों की यात्रा के दौरान भौतिक विकास के शिखर पर पहुंचे लोगों से

  • मॉब लिंचिंग की अराजकता का त्रासद होना

    मॉब लिंचिंग की अराजकता का त्रासद होना

    उन्मादी भीड़ के द्वारा जान लेने की एक घटना शांत नहीं होती कि कोई दूसरी हत्या की खबर सामने आ जाती है। लगातार हो रही मॉब लिंचिंग की ये घटनाएँ अब न केवल चिन्ता का विषय है बल्कि असहनीय एवं शर्मनाक है। सुप्रीम कोर्ट की फटकार और अलवर में एक और घटना के बाद ही सही, भीड़ द्वारा कि

  • प्रतिकूल परिस्थिति में संतुलन कैसे रहे?

    हर व्यक्ति को जीवन में निराशा एवं प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना ही पड़ता है, लेकिन सफल और सार्थक जीवन वही है जो सफलता और असफलता, अनुकूलता और प्रतिकूलता, दुख और सुख, हर्ष और विषाद के बीच संतुलन स्थापित करते हुए अपने चिंतन की धारा को सकारात्मक ब

  • ब्रांड तिलामूक : छोटे से गांव के गौ पालक किसानों की पहचान

    ब्रांड तिलामूक : छोटे से गांव के गौ पालक किसानों की पहचान

    भारत में अमूल का नाम जबान पर आते ही उत्कृष्ट किस्म के दूध का ख्याल आ जाता है। इसे अमूल ब्रांड गुणवत्ता का प्रभाव कह सकते हैं. अमूल की कहानी पचास साल पहले गुजरात के अनजान से आणंद क्षेत्र के दुग्ध उत्पादक किसानों के सहकारिता अभियान से जुडी है. ठीक ऐसी ही कहानी अमरीका के तिलामूक ब्रांड की है. तिलामूक कहते ही उत्कृष्ट चीज (cheese) का नाम जबान पर आ जाता है.

  • समाज में उजालें कम क्यों हो रहे हैं?

    समाज में उजालें कम क्यों हो रहे हैं?

    स्वार्थ चेतना अनेक बुराइयांे को आमंत्रण है। क्योंकि व्यक्ति सिर्फ व्यक्ति नहीं है, वह परिवार, समाज और देश के निजी दायित्वों से जुड़ा है। अपने लिए जीने का अर्थ है अपने सुख की तलाश और इसी सुख की तलाश ने अनेक समस्याएं पैदा की हैं। सामाजिक जीवन का एक आधारभूत सूत्र है सापेक्ष

  • प्लास्टिक कचरे से गहराता संकट

    प्लास्टिक कचरे से गहराता संकट

    प्लास्टिक ज़िन्दगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है। अमूमन हर चीज़ के लिए प्लास्टिक का इस्तेमाल हो रहा है, वो चाहे दूध हो, तेल, घी, आटा, चावल, दालें, मसालें, कोल्ड ड्रिंक, शर्बत, सनैक्स, दवाएं, कपड़े हों या फिर ज़रूरत की दूसरी चीज़ें सभी में प्लास्टिक का इस्तेमाल हो रहा है। बाज़ार से

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