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दुनिया मेरे आगे
 

  • बच्चों और बुजुर्गों  के साझे और संवाद को प्रेरित करता एक प्रसंग

    बच्चों और बुजुर्गों के साझे और संवाद को प्रेरित करता एक प्रसंग

    राजनाथ शर्मा, वैसे तो काफी गंभीर आदमी थे। लेकिन जब से पचपन के हुए, उन पर अचानक जैसे बचपन का भूत सवार हो गया। जब देखो, तब बचपन की बातें और यादें। रास्ते चलते बच्चों को अक्सर छेड़ देते। रोता हो, तो हंसा देते। हंसता हो, तो चिढ़ा देते। 'हैलो दोस्त' कहकर किसी भी बच्चे के आगे अपना हाथ बढ़ा देते। उनकी जेबें टाॅफी, लाॅलीपाॅप, खट्टी-मिट्ठी गोलियों जैसी बच्चों को प्रिय चीजों से भरी रहतीं। कभी पतंग, तो कभी गुब्बारे खरीद लेते और बच्चों में बांट देते। तुतलाकर बोलते। कभी किसी के कान में अचानक से 'हू' से कर देते। बच्चों जैसी हरकते करने में उन्हे मज़ा आने लगा। अब वह जेब में एक सी

  • एक वरदान है पुस्तक मेला

    एक वरदान है पुस्तक मेला

    देश की राजधानी दिल्ली के प्रगति मैदान में 6 जनवरी से 14 जनवरी तक विश्व पुस्तक मेला आयोजित किया जा रहा है। मेले का उद्घाटन मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडे़कर करेंगे। वर्ष 1972 में प्रथम विश्व पुस्तक मेले का आयोजन किया गया था। उस समय इसमें 200 प्रतिभागी सम्मिलित हुए थे। इसके बाद तो निरंतर पुस्तक मेले लगने लगे और इसमें सम्मिलित होने वाले प्रतिभागियों की संख्या भी बढ़ती गई। इस वर्ष देश भर से आने वाले प्रकाशकों की संख्या लभगभ 800 रहेगी। मेले में 30 विदेशी प्रकाशक भी भाग लेंगे। इस वर्ष यूरोपियन यूनियन को अतिथि देश के रूप में आमंत्रित किया गया है।

  • अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में भारत की कूटनीतिक विजय

    अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में भारत की कूटनीतिक विजय

    भारत के न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी का इंटरनैशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस यानी अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में न्यायाधीश के तौर पर दोबारा चुना जाना कोई सामान्य घटना नहीं है। भारत के लोगों की नजर इस चुनाव पर इसलिए भाी टिकी थी कि उन्हें लगता था कि अगर हमारे देश का कोई न्यायाधीश होगा तो कुलभूषण जाधव के मामले में सहायता मिल सकती है। इस नाते हर भारतीय दलबीर भंडारी को उनकी जगह पर दोबारा देखना चाहता था। जिस तरह से ब्रिटेन अपने उम्मीदवार क्रिस्टोफर ग्रीनवुड के पक्ष मेें हर संभव कूटनीतिक दांव चल रहा था और सुरक्षा परिषद के शेष चार स्थायी सदस्य उसके साथ थे उसमें यह असंभव लग रहा था।

  • गाय ही बचा सकती है प्रदूषण के इस संकट से

    गाय ही बचा सकती है प्रदूषण के इस संकट से

    पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण के कारण विश्व भर में चिंता जतलाई जा रही है। किन्तु उसके समाधान के मूलभूत -आचरणीय आवश्यकता- की उपेक्षा हो रही है। भौतिक सुख की बढ़ती भूख के कारण आधुनिकता और प्रगतिशीलता के नाम पर प्रकृत्ति के शोषण पर विराम लगे बिना समाधान खोजना अंधेरे में सूई खोजने से भी कठिनाई भरा है। नित्य प्रति हम अपने आचरण से प्रकृति का संतुलन बिगाड़ रहे हैं। हरे भरे वनों का तो अभाव हो ही रहा है न जाने कितनी नदियां सूख गई है और जो हैं भी उनमें 20 वर्ष पूर्व के मुकाबले आधा भी जल नहीं प्रवाहित हो रहा है।

  • नोटबंदी का एक दूसरा पहलू ये भी

    नोटबंदी के एक वर्ष पूरा होने पर जिस तरह सरकार और विपक्ष में तलवारें खींची हुईं हैं उन्हें अस्वाभाविक नहीं कहा जा सकता।

  • ये ज़हर तो हमने ही उगला है

    ये ज़हर तो हमने ही उगला है

    उत्तर भारत का एक बड़ा हिस्सा इन दिनों प्रदूषण युक्त घने कोहरे से ढका हुआ है।

  • तब इंदिरा गाँधी ने कहा था ये खिचड़ी सरकार है

    तब इंदिरा गाँधी ने कहा था ये खिचड़ी सरकार है

    भारतीय परिवारों में खिचड़ी महज एक प्रकार का भोजन नहीं है, वरन् यह एक पारंपरिक पकवान है। खिचड़ी को भारत के त्यौहारों का मान समझा जाता है। ऐसे कई त्यौहार आते हैं, जिसके दौरान खिचड़ी बनाया जाना अनिवार्य है।

  • क्या असम भारत का स्पोर्ट्स हब बन सकता है?

    क्या असम भारत का स्पोर्ट्स हब बन सकता है?

    भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र ने देश को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन करने वाले खिलाड़ी दिए हैं। एम.सी. मैरी कोम ने 2012 के ओलंपिक खेलों की मुक्केबाज़ी प्रतिस्पर्धा में कांस्य पदक जीतने के अलावा मुक्केबाज़ी की चैंपियन्स ट्रॉफी में भी 5 बार पदक हासिल किए।

  • साहब भारत इसी तरह तो चलता है

    साहब भारत इसी तरह तो चलता है

    वैसे तो भारत में राहुल गाँधी जी के विचारों से बहुत कम लोग इत्तेफाक रखते हैं (यह बात 2014 के चुनावी नतीजों ने जाहिर कर दी थी) लेकिन अमेरिका में बर्कले स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में जब उन्होंने वंशवाद पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में "भारत इसी तरह चलता है

  • अथ गौरी लंकेश कथा और कर्नाटक में हुए हत्याकांड

    अथ गौरी लंकेश कथा और कर्नाटक में हुए हत्याकांड

    वामपंथी पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के बाद देश में जिस प्रकार का वातावरण बनाया गया है, वह आश्चर्यचकित करता है। नि:संदेह हत्या का विरोध किया जाना चाहिए। सामान्य व्यक्ति की हत्या भी सभ्य समाज के माथे पर कलंक है।

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