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  • मालामाल माल्या की कंगाली कथा

    मालामाल माल्या की कंगाली कथा

    अब आप इसे ख्याति कहें या कुख्याति, कि संसार में शराब के सबसे बड़े व्यापारियों में से एक भारत में कभी अमीरों की जमात के सरदार रहे विजय माल्या कंगाली की कगार पर देश छोड़ कर फुर्र हो गए हैं।

  • गौरैया हमारी परम्पराओं में रची बसी है बेटी की तरह …

    गौरैया हमारी परम्पराओं में रची बसी है बेटी की तरह …

    होली का तीसरा दिन था साल 2010 का, मैं जयपुर से लौट रहा था, तभी छत्तीसगढ़ से मेरे एक परिचित का फोन आया की एक अखबार में रवीश कुमार ने आपके दुधवा लाइव पर गौरैया से सम्बंधित लेख पर संपादकीय लिखा है,

  • सूखा आसमान में या दिमाग में ?

    सूखा आसमान में या दिमाग में ?

    यह सच है कि 1960 के दशक में अमेरिका की औद्योगिक चिमनियों से उठते गंदे धुएं के खिलाफ आई जन-जागृति ही एक दिन ’अंतर्राष्ट्रीय पृथ्वी दिवस’ की नींव बनी। यह भी सच है कि धरती को आये बुखार और परिणामस्वरूप बदलते मौसम में हरित गैसों के उत्सर्जन में हुई बेतहाशा बढ़ोत्तरी का बङा योगदान है।

  • 22 अप्रैल कैसे बना पृथ्वी दिवस !

    22 अप्रैल कैसे बना पृथ्वी दिवस !

    भारतीय कालगणना दुनिया में सबसे पुरानी है। इसके अनुसार, भारतीय नववर्ष का पहला दिन, सृष्टि रचना की शुरुआत का दिन है। आई आई टी, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डाॅ. बिशन किशोर कहते हैं कि यह एक तरह से पृथ्वी का जन्मदिन की तिथि है।

  • आत्मदैन्य से मुक्त हो रहा है नया भारत

    आत्मदैन्य से मुक्त हो रहा है नया भारत

    देश में परिवर्तन की एक लहर चली है। सही मायनों में भारत जाग रहा है और नए रास्तों की तरफ देख रहा है। यह लहर परिर्वतन के साथ संसाधनों के विकास की भी लहर है।

  • गौरैया फिर से लौटेगी!

    गौरैया फिर से लौटेगी!

    मेरे पक्षियों पर किए गए शोध व् वन्यजीवन के प्रति प्रेम पर लोगों की यह अपेक्षा एक उत्साह भर गयी नतीजतन मैंने निर्णय लिया की पक्षी सरंक्षण की मुहिम हम अपने जनपद से शुरू करेंगे, और ऐसा ही हुआ लोगों का साथ मिलता गया और इस कारवाँ ने खीरी से निकल कर आसपास के जनपदों से गुजरता हुआ पूरे भारत की फेरी लगा ली।

  • क्या शिक्षक हार रहे हैं?

    क्या शिक्षक हार रहे हैं?

    भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में रहते हुए, जैसी बेसुरी आवाजें शिक्षा परिसरों से आ रही हैं, वह बताती हैं कि राजनीति और राजनेता तो जीत गए हैं, किंतु शिक्षक और विद्यार्थी हार रहे हैं।

  • आहत यमुना: क्रोधित देव

    आहत यमुना: क्रोधित देव

    हां, हां मैं यमुना हूं। मैने ज़रखेज जमीनों को खूबसूरत बागीचों में बदला है। मैने भूख से बिलखते बचपन को जिंदगी दी है।

  • प्रसिद्धि पाने के ये सस्ते  ‘टोटके’

    प्रसिद्धि पाने के ये सस्ते ‘टोटके’

    धनवान बनने की यही प्रवृति इंसान को भ्रष्टाचार,जमाख़ोरी,रिश्वतख़ोरी,कालाबाज़ारी,तस्करी तथा अन्य कई प्रकार के अपराधों की ओर भी धकेल देती है।

  • वर दे, वीणा वादिनि वर दे  !

    वर दे, वीणा वादिनि वर दे !

    प्रकृति जब शीतकाल के अवसान के पश्चात् नवल स्वरुप धारण करती है, तब मनुष्य धरती पर विद्या और संगीत की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती का आह्वान एवं पूजन करते हैं, जो उनमें नव रस एवं नव स्फूर्ति का संचार करती है.

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