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  • यह आंदोलन, वह आंदोलन  ….!!

    यह आंदोलन, वह आंदोलन ….!!

    इसे संयोग ही मानता हूं कि मध्य प्रदेश के मंदसौर में जिस दिन पुलिस फायरिंग में छह किसानों की मौत हुई, उसी रोज कभी मध्य प्रदेश का हिस्सा रहे छत्तीसगढ़ से मैं अपने गृहप्रदेश पश्चिम बंगाल लौटा था। मानवीय स्वभाव के नाते शुक्र मनाते हुए मैं खुद को भाग्यशाली समझने लगा कि इस मुद्दे पर विरोधियों की ओर से आयोजित बंद की चपेट में आने से पहले ही मैं ट्रेन से अपने गृहनगर लौट आया।

  • अमेरिका का पेरिस जलवायु समझौते से अलग होना

    अमेरिका का पेरिस जलवायु समझौते से अलग होना

    अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का पेरिस जलवायु समझौते से अलग होने का ऐलान पूरी दुनिया के लिए बड़े आघात जैसा है। लंबी कवायद के बाद तो दिसंबर 2015 में 195 देशों के बीच पेरिस में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन और धरती के बढ़ते तापमान को कम करने को लेकर एक सहमति बनी थी और स्वयं अमेरिका ने उसकी अगुवाई की थी।

  • शिक्षा से जुड़े सवालों पर न कोई सोच न कोई हलचल

    शिक्षा से जुड़े सवालों पर न कोई सोच न कोई हलचल

    दुनिया के परिदृश्य में भारत में जिस रफ्तार से प्रगति हो रही है, चाहे वह आर्थिक हो, सांस्कृतिक हो, वैज्ञानिक हो, कृषि की हो, तकनीक की हो, उस अनुपात में देश में शिक्षा की अपेक्षित प्रगति आजादी के 70 वर्ष बाद भी हासिल न होना शोचनीय है। नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने तब से […]

  • भीड़तंत्र की हिंसा से जख्मी होता समाज

    भीड़तंत्र की हिंसा से जख्मी होता समाज

    उत्तर प्रदेश के आगरा में भाजपा नेता की हत्या के बाद भीड़ ने ही दो हमलावरों में से एक को पीट-पीटकर मार डाला। दिल्ली में खुलेआम दो लड़कों को पेशाब करने से रोकने पर गतदिनों एक ई-रिक्शा चालक की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई।

  • पर्यावरण और विकास

    पर्यावरणीय समृद्धि की चाहत, जीवन का विकास करती है, विकास की चाहत, सभ्यताओं का। सभ्यता को अग्रणी बनाना है, तो विकास कीजिए। जीवन का विकास करना है, तो पर्यावरण को समृद्ध रखिए। स्पष्ट है कि पर्यावरण और विकास, एक-दूसरे का पूरक होकर ही इंसान की सहायता कर सकते हैं; बावजूद इस सच के आज पर्यावरण और विकास की चाहत रखने वालों ने एक-दूसरे को परस्पर विरोधी मान लिया है।

  • पेड़ों की पुकार सुनिए

    पेड़ों की पुकार सुनिए

    कुछ दिन पहले मुझे दिल्ली की भागदौड़ से दूर उत्तराँचल के एक छोटे से हिल स्टेशन पर जाने का मौका मिला. रास्ते भर हरे भरे चीड और देवदार के पेड़ और सुहानी हवा आँखों और मन को शीतल कर रहे थे. हिल स्टेशन पहुँचते ही सुंदर फूलों की क्यारियों और आडू, आलूबुखारे, खुमानी, सेब और नाशपाती से लदे पेड़ों ने हमारा स्वागत किया. इतनी सुंदर और फलों -फूलों से भरपूर जगह मैंने पहली बार देखी थी.

  • संभल : जहाँ एक मस्जिद आज भी हरिहर मंदिर कहलाती है

    संभल : जहाँ एक मस्जिद आज भी हरिहर मंदिर कहलाती है

    मेरा जन्म इसी हरिहर मंदिर के ठीक सामने ही हुआ था, कहते हैं कि इसी मंदिर के ऊपर बाबर ने मस्जिद बनाई थी

  • आखिर कैम्ब्रिज दुनिया का सर्व श्रेष्ट अध्ययन केंद्र क्यों है

    आखिर कैम्ब्रिज दुनिया का सर्व श्रेष्ट अध्ययन केंद्र क्यों है

    मेरी शुरआती पढाई किसी सेंट टाट पट्टी स्कूल (यानि सरकारी प्राइमरी स्कूल ) में भी नहीं हुई . हुआ. यूँ कि मेरा जन्म और बचपन उत्तर प्रदेश के बहुत छोटे कसबे संभल में हुआ , माँ और बाबूजी पोस्टिंग के कारण नगीना में थे, दादी मेरी पढाई को लेकर काफी प्रोटेक्टिव थीं, इसलिए उन्होंने

  • अम्ब्रेला शॉप : बुन्देलखण्ड के किसान की चलती फिरती दुकान

    अम्ब्रेला शॉप : बुन्देलखण्ड के किसान की चलती फिरती दुकान

    पिछले 2 महीनों में शायद ही कोई ऐसा दिन गया हो जब गाँव से निकलती खबर में किसी किसान के खलिहान में रखी फसल में आग लगने का मामला न आया हो । लेकिन इस पर भी सिर्फ सियासी दांवपेंच खेले जा रहे हैं। चारों तरफ सियासत का माहौल गर्म है मगर उन गाँव का हाल जस का तस है जहाँ

  • जहाँ  विदेश में भारतीयों को मिलता है अपने घर का माहौल

    जहाँ विदेश में भारतीयों को मिलता है अपने घर का माहौल

    भारतीय विद्यार्थी संगठन अमेरिकी विश्वविद्यालयों में भारत से आए विद्यार्थियों की मदद करते हैं और उन्हें अपनी जड़ों से जोड़े रखते हैं। पढ़ाई के लिए अमेरिकी कॉलेजों में दाखिला लेने जा रहे भारतीय विद्यार्थी खुशकिस्मत हैं। इंडियन स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (आईएसओ), इंडियन स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आईएसए), स्टूडेंट्स ऑफ इंडिया एसोसिएशन (एसआईए) और हिंदू स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (एचएसओ) जैसे संगठनों और एसोसिएशन

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