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  • किसान अपनी माँगें कैसे मनवाएँ

    दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2002 में एम्स के र्डॉक्टरों की हड़ताल पर पाबंदी लगा दी थी, न्यायालय का मानना था के डॉक्टरों की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि उन्होंने स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवानी ही है।

  • जनता का सिरदर्द बनते अनियोजित कार्य

    जनता का सिरदर्द बनते अनियोजित कार्य

    गत् दो दशकों से देश में विकास कार्यों की मानो बाढ़ सी आई हुई है। देश में प्रतिदिन नई सडक़ों का निर्माण हो रहा है, नई रेल लाईनें बिछाई जा रही हैं, सेतु तथा ऊपरगामी पुल बनाए जा रहे हैं। उपमार्गों व भूमिगत मार्गों के निर्माण भी हो रहे हैं ।अनेकानेक नए सरकारी भवन निर्मित किए जा रहे हैं। कहा जा सकता है कि उदारीकरण के दौर की शुरुआत होने के बाद देश निश्चित रूप से बदलता हुआ दिखाई देने लगा है। इसमें भी कोई शक नहीं कि विकास संबंधी इन योजनाओं में जहां अधिकांश योजनाएं किसी प्रस्तावित योजना का पूर्व अध्ययन करने के बाद उचित तरीके

  • काम करके काम का श्रेय लेना गलत कैसे?

    काम करके काम का श्रेय लेना गलत कैसे?

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे और ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे चिलचिलाती धूप में रोड शो के साथ लोकार्पण किया जाना स्वागतयोग्य है। इससे दिल्ली और एनसीआर की अनेक ज्वलंत समस्याओं का समाधान हो सकेगा, विशेषतः प्रदूषण से मुक्ति मिलेगी एवं यातायात सुगम होगा। इन एक्स्प्रेस वे के बन जाने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली एनसीआर में रहने वाले लो

  • हमारी नियति: हादसे और मुआवज़े?

    हमारी नियति: हादसे और मुआवज़े?

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में पिछले दिनों एक बड़ा हादसा दरपेश आया। लगभग 1700 मीटर लंबे निर्माणाधीन फ्लाईओवर पर बीम चढ़ाने व उसके एलाईनमेंट के दौरान हुए हादसे में 18 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। सूत्रों के अनुसार जिस समय वाराणसी कैंट तथा लहरतारा के मध्य बन रहे इस ऊपरिगामी पुल की बीम अचानक नीचे गिरी उस समय भीड़-भाड़ वाले इ

  • कब मिलेगा घाटी के विस्थापित हिंदुओं को न्याय ?

    कब मिलेगा घाटी के विस्थापित हिंदुओं को न्याय ?

    जम्मू-कश्मीर से हिंदू समाज को बाहर करने की तैयारी तो मुसलमानों ने आजादी के समय 1947 से पहले शुरू कर दी थी। पर उस समय तब उनकी आबादी इतनी ज्यादा नही थी, लेकिन बहुसंख्यक समाज पर उनके अत्याचार शुरु होने शुरु हो गए थे। 1980 के दशक में आते-आते उन्होंने हिंदुओं को सरेराह पीटना शुरु कर दिया था और माताओं बहनों की इज्जत को सरेराह बीच बाजार

  • सांकेतिक दलित भोज: इस ‘नाटक’ की ज़रूरत ही क्यों?

    सांकेतिक दलित भोज: इस ‘नाटक’ की ज़रूरत ही क्यों?

    भारतवर्ष कभी विश्वगुरू हुआ करता था,इस कथन को विश्व कितनी मान्यता देता है इस बात का तो पता नहीं परंतु इतना ज़रूर है कि हमारे देश में 21वीं शताब्दी में भी लोगों को इस बात के लिए शिक्षित किया जा रहा है कि वे खुले में शौच करने से बाज़ आएं,अपने घर व पास-पड़ोस में सफ़ाई रखें,जनता को अभी तक यही समझाया जा रहा है कि गंदगी फैलने से बीमारी व संक्रमण फैलता

  • हर गांव में पहुंची बिजली, अब हर घर को रौशन करने का लक्ष्य

    देश के सभी गांवों तक बिजली पहुंचाए जाने की सूचना से हर भारतवासी प्रसन्न होगा। हालांकि इस पर राजनीतिक बयानवाजी चलती रहेगी, इसका श्रेय लेने की होड़ भी पार्टियों के बीच जारी रहने वाली है। सरकार के दावों पर प्रश्न भी उठेंगे। यह हमारी राजनीति का स्थायी चरित्र है। लेकिन प्रधानमंत्री के ट्वीट एवं उर्जा मंत्रालय के दावों को स्वीकार करें तो मणिपुर के लेइसांग गांव के साथ दे

  • जनप्रतिनिधियों की सुविधाओं पर उठते सवाल

    सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश विधानसभा द्वारा पारित वह कानून निरस्त कर दिया है जिसके मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी बंगले में रहने की सुविधा दी गई थी। कोर्ट का कहना है कि किसी को इस आधार पर सरकारी बंगला अलॉट नहीं किया जा सकता कि वह अतीत में किसी सार्वजनिक पद पर रह चुका है। बात केवल उत्तर प्रदेश की नहीं हैं, बात केवल सरकारी बंगले की ही नहीं है, बात जनप्रतिनिधियों को मिलने वाले वेतन, पेंशन एवं अन्य सुविधाओं की भी है। संविधान में सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य, स्पीकर, डिप्टी स्पीकर, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मंत्रियों के वेतन-भत्ते और अन्य सुविधाओं के संबंध में निर्णय लेने का अधिकार संसद, विधानसभा और विधान परिषद को दिया गया है। दुनिया के अनेक देशों में जनप्रतिनिधियों को वेतन व अन्य सुविधा

  • न्यूनतम मजदूरी का कानून बनाने की जरुरत

    न्यूनतम मजदूरी का कानून बनाने की जरुरत

    हर वर्ष अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस मई महीने की पहली तारीख को मनाया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस को मई दिवस भी कहकर बुलाया जाता है। अमेरिका में 1886 में जब मजदूर संगठनों द्वारा एक शिफ्ट में काम करने की अधिकतम सीमा 8 घंटे करने के लिए हड़ताल की जा रही थी। इस हड़ताल के दौरान एक अज्ञात शख्स ने शिकागो की हेय मार्केट में बम फोड़ दिया, इसी दौरान पुलिस ने मजदूरों पर गोलियां चला दीं, जिसमें 7 मजदूरों की मौत हो गयी। इस घटना के कुछ समय बाद ही अमेरिका ने मजदूरों के एक शिफ्ट में काम करने की अधिकतम सीमा 8 घंटे निश्चित कर दी

  • कानून से ज्यादा जरूरी है सोच का बदलना

    कानून से ज्यादा जरूरी है सोच का बदलना

    बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण कानून यानी पॉक्सो में संशोधन संबंधी अध्यादेश को केंद्रीय मंत्रिमंडल और फिर राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई। अब बारह साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ बलात्कार करने वालों को मौत की सजा का प्रावधान किया जा सकेगा। प्रश्न है कि अभी तक पाॅक्सो कानून ही पूरी तरह से सख्ती से जमीन पर नहीं उतरा है तो उसे और कड़ा करना क्यों जरूरी है? हमारे देश में कानून बनाना आसान है लेकिन उन कानूनों की क्रियान्विति समुचित ढं़ग से न होना, एक बड़ी विसंगति है। क्या कारण है कि पाॅक्सों कानून बनने के बावजूद एवं उसकी कठोर कानूनी स्थितियों के होने पर भी नाबालिग बच्चियों से बलात्कार की घटनाएं बढ़ रही है। पिछले दिनों उन्नाव, कठुआ और सूरत आदि में नाबालिग बच्चियों के साथ सामूहिक बलात्कार की घटनाएं सामने आईं, तो देश भर से मांग उठी कि पॉक्सो कानून में बदलाव कर नाबालिगों के साथ बलात्कार मामले में फांसी का प्रावधान किया जाना चाहिए। क्या फांसी की सजा का प्रावधान कर देने से इस अपराध को समाप्त किया जा सकेगा? सोच एवं व्यवस्था में बदलाव लाये बिना फांसी की सजा का प्रावधान कारगर नहीं होगा।

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