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  • ये किसका और कैसा नववर्ष है?

    ये किसका और कैसा नववर्ष है?

    भारत व्रत पर्व त्यौहारों का देश है जिसका हर दिन कोई न कोई विशिष्टता लिए हुए होता है. कोई किसी महापुरुष का जन्मदिवस है तो कोई पुण्य तिथि. कोई फसल से सम्बंधित होता है तो कोई किसी खगोलीय घटना से सम्बन्धित. कोई समाज जीवन को प्रेरणा स्वरूप मनाया जाता है तो कोई किसी घटना विशेष को याद रख कर उससे सदैव ऊर्जावान बने रहने के लिए. एक बात तय है कि हमारे यहाँ कुछ भी यूं ही नहीं मनाया जाता बल्कि, प्रत्येक उत्सव/त्यौहार का कोई न कोई एक सामाजिक, वैज्ञानिक, आध्यात्मिक या राष्ट्रीय कारण अवश्य होता है. किन्तु हां! कालान्तर में हमारे देश में कुछ पर्व त्यौहार या परम्पराएं ऎसी भी घुस आईं जो हमारे इन सिद्धांतों से कभी मेल नहीं खातीं फिर भी हमने उन्हें अपना लिया. अंग्रेजी कैलेंडर के प्रथम दिवस यानी एक

  • अन्यथा सारी प्रगति को भ्रष्टाचार खा जाएगा

    अन्यथा सारी प्रगति को भ्रष्टाचार खा जाएगा

    देश में भ्रष्टाचार पर जब भी चर्चा होती है तो राजनीति को निशाना बनाया जाता है। आजादी के सत्तर साल बीत जाने के बाद भी हम यह तय नहीं कर पाये कि भ्रष्टाचार को शक्तिशाली बनाने में राजनेताओं का बड़ा हाथ है या प्रशासनिक अधिकारियों का? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भ्रष्टाचार को समाप्त करने की योजनाओं को लेकर सक्रिय है, लेकिन वे इसके लिये अब तक राजनेताओं को ही निशाना बनाते रहे हैं, यह पहली बार हो रहा है कि प्रशासनिक अधिकारियों पर भी शिकंजा कसा जा रहा है। रिश्वत और सुविधा शुल्क लेने वाले अफसरों का पर्दाफाश करने के लिए केंद्र सरकार ने एक और सख्त कदम उठाया है। मेरी दृष्टि में यह एक सही दिशा में सही शुरुआत है।

  • यरूशलम विवाद : शिया-सुन्नी संघर्ष की अमेरिकी साजि़श

    यरूशलम विवाद : शिया-सुन्नी संघर्ष की अमेरिकी साजि़श

    ‘बांटो और राज करो’ की जिस नीति पर चलते हुए ब्रिटिश राज ने लगभग पूरे विश्व में अपने साम्राज्य का विस्तार कर लिया था ठीक उसी नीति का अनुसरण आज अमेरिका द्वारा किया जा रहा है। परंतु बड़े आश्चर्य की बात है कि दुनिया का हर देश तथा वहां के बुद्धिमान समझे जाने वाले शासक भी अमेरिका की इस चाल से वािकफ होने के बावजूद किसी न किसी तरह उसके चंगुल में फंस ही जाते हैं। यह और बात है

  • आइए, वंशवादी नेतृत्व के चंगुल से लोकतंत्र को बचाएं

    आइए, वंशवादी नेतृत्व के चंगुल से लोकतंत्र को बचाएं

    राजतंत्रीय शासन व्यवस्था का सबसे बड़ा दोष यही माना जाता है कि उसमें वंशानुगत नेतृत्व की परंपरा होती है। राजा का पुत्र या राजा द्वारा नामित व्यक्ति ही युवराज होता है तथा बाद में राजा। विवेक यह नहीं कहता कि किसी वंश में जो भी पैदा होगा उसमें शासन चलाने के लिए आवश्यक सारे गुण होंगे ही। उसमें आवश्यक क्षमताएं होंगी हीं। हालांकि राजतंत्र में भी अनेक राजा अपने पुत्रों या वारिसों में सबसे गुणी, सबसे क्षमतावान को प्रश्रय देते थे।

  • निजी अस्पतालों की लूट कब तक?

    निजी अस्पतालों की लूट कब तक?

    देश के निजी अस्पतालों में स्वास्थ्य की दृष्टि से तो हालात बदतर एवं चिन्तनीय है ही, लेकिन ये लूटपाट एवं धन उगाने के ऐसे अड्डे बन गये हैं जो अधिक परेशानी का सबब है। हमारे देश में जगह-जगह छोटे शहरों से लेकर प्रान्त की राजधानियों एवं एनसीआर तक में निजी अस्पतालों में मरीजों की लूट-खसोट, इलाज में कोताही और मनमानापन कोई नई बात नहीं है। विशेषतः देश के नामी निजी अस्पतालों की श्रृंखला में इलाज एवं जांच परीक्षण के नाम पर जिस तरह से लाखों रूपये वसूले जा रहे हैं, वह तो इलाज के नाम पर जीवन की बजाय जान लेने के माध्यम बने हुए हैं।

  • मनीला में भारत की सफल कूटनीति

    मनीला में भारत की सफल कूटनीति

    यह आजाद भारत के इतिहास में पहली बार होगा कि हमारे गणतंत्र दिवस समारोह में इस बार एक साथ दस देशों के राष्ट्राध्यक्ष मुख्य अतिथि के रुप में विराजमान होंगे।

  • मनीला में भारत की सफल कूटनीति

    मनीला में भारत की सफल कूटनीति

    यह आजाद भारत के इतिहास में पहली बार होगा कि हमारे गणतंत्र दिवस समारोह में इस बार एक साथ दस देशों के राष्ट्राध्यक्ष मुख्य अतिथि के रुप में विराजमान होंगे।

  • यही है मोदी के आर्थिक सुधारों का प्रयोजन

    यही है मोदी के आर्थिक सुधारों का प्रयोजन

    विश्व बैंक ने भारत में विदेशी व्यापार की संभावनाओं को नई ऊर्जा दे दी है। इससे आशा की जाती है कि आने वाले समय में भारत में देसी एवं विदेशी निवेश की बाढ़ आएगी, क्योंकि दूसरे देशों की तुलना में भारत में व्यापार करना आसान हो गया है।

  • क्या कुछ हासिल होगा कश्मीर वार्ता से

    क्या कुछ हासिल होगा कश्मीर वार्ता से

    कश्मीर अगर शांत हो जाए तो भारत के कलेजे में चुभता हुआ शूल हमेशा के लिए बाहर निकल जाएगा। हर भारतवासी चाहता है कि कश्मीर में शांति और स्थिरता कायम हो, वह अन्य राज्यों की तरह एक सामान्य राज्य बने। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने जब कश्मीर में सभी पक्षों से बातचीत की घोषणा करते हुए खुफिया ब्यूरो के पूर्व निदेशक दिनेश्वर शर्मा को वार्ताकार नियुक्त किया तो उनके कथनों के सार भी यही था।

  • दिल्ली जल बोर्डः बदहाल आपूर्ति, तरक्की पर भ्रष्टाचार

    दिल्ली जल बोर्डः बदहाल आपूर्ति, तरक्की पर भ्रष्टाचार

    मुख्यमंत्री श्री केजरीवाल के लिए यह याद करने का एकदम सही वक्त है कि यदि पानी के बिल में छूट का लुभावना वायदा आम आदमी पार्टी के लिए दिल्ली विधानसभा की राह आसान बना सकता है, तो दिल्ली जलापूर्ति की गुणवत्ता और मात्रा में मारक दर्जे की गिरावट तथा मीटर रीडरों की कारस्तानियां राह में रोड़े भी अटका सकती हैं।

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