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  • मात्र हस्ताक्षर के लिए गरीब देश में इतना वेतन और सुविधाएं देना कैसे न्यायोचित ?

    अमेरिका में प्रति लाख जनसंख्या 256 और भारत में 130 पुलिस है जबकि अमेरिका में भारत की तुलना में प्रति लाख जनसंख्या 4 गुणे मामले दर्ज होते हैं| फिर भी भारत में प्रति लाख जनसंख्या 56 केन्द्रीय पुलिस बल इसके अतिरिक्त हैं| अमेरिका में प्रति लाख जनसंख्या 5806 मुकदमे दायर होते हैं जबकि भारत में […]

  • अपराध जगत में महिलाओं की घुसपैठ

    भारतवर्ष में महिलाओं को प्राय: अबला अथवा बेचारी के रूप में देखा जाता है। महिला उत्पीडऩ की घटनाएं भी देश में प्रतिदिन कहीं न कहीं घटित होती ही रहती हैं। खासतौर पर पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों ने विशेषकर सेक्स अपराधों ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। […]

  • ‘आप’: भारतीय लोकतंत्र का नया राजनैतिक अवतार

    मध्यप्रदेश,राजस्थान,छत्तीसगढ़,दिल्ली तथा मिज़ोरम आदि पांच राज्यों मेंं पिछले दिनों हुए विधानसभा चुनावों के परिणाम आने के बाद अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनावों के परिणामों को लेकर अभी से कयास लगाए जाने लगे हैं। इन पांच राज्यों में जहां कांग्रेस पार्टी को राजस्थान की सत्ता गंवानी पड़ी है वहीं मिज़ोरम में कांग्रेस ने सत्ता पर […]

  • काँग्रेस ने अपने दुश्मन को देर से पहचाना

    विधानसभा चुनाव की जंग और बयानों की उलटबांसियों के बीच एक अचरजभरा बयान केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश की ओर से आया. जीत या हार के कयासों के बीच एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हमारी लड़ाई भाजपा से नहीं बल्कि आरएसएस यानि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से है! इस पर बात आगे बढ़े, उसके […]

  • हे बेशर्मी तेरा आसरा!

    दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा 2009 में जिस समय समलैंगिक संबंधों को वैध कऱार देने संबंधी एक याचिका पर निर्णय सुनाते हुए इसे वैध ठहराया था उस समय भी देश में यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना था। गौरतलब है कि 2001 में समलैंगिक संबंधों को वैध ठहराने हेतु ऐसे संबंधों की पैरवी व […]

  • गम, गुस्से व जनाक्रोश की तपिश से झुलस रही लोहिया की जन्मस्थली

    डॉ. राममनोहर लोहिया की जन्मस्थली वाले जिले अम्बेडकरनगर में खाकी पर खादी की बढ़ती हनक व अपराध एवं अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पाने से जहां लोगों में काफी गम, गुस्सा है वहीं व्यवस्था से भी भरोसा उठ रहा है। गम, गुस्से एवं ब्यापक जनाक्रोश की तपिश से समाजवाद के पुरोधा रहे डॉ. राममनोहर […]

  • इन्डियननेस बनाम भारतीयता

    �“इन्डियननेस इन कम्युनिकेशन” या “इन्डियननेस इन एडवरटाइज़िग” जब मैंने पहली बार इन शीर्षकों को देखा तो बहुत अच्छा महसूस हुआ. लगा जैसे “चलो कहीं से तो बात शुरू हुई.” कुछ तो है ज़रूर कि लोग आज इसकी ज़रूरत महसूस कर रहे हैं और इसपर बड़े पैमाने पर गहन चर्चा हो रही है. वास्तविक तौर पर […]

  • कमजोर कांग्रेस और मोदी की मजबूती का कमाल

    कांग्रेस हार गई। इस हार के बाद बहुत लोग बोलते लगे हैं। शरद पवार भी बोले। पवार सही बोले। किसी भी देश को नेता तो मजबूत ही चाहिए। क्या गलत कहा। मजबूती नहीं थी, इसीलिए राजस्थान में कांग्रेस अपनी ऐतिहासिक हार भुगत रही है। एक सौ उन्तीस साल पुरानी कांग्रेस राजस्थान में सिर्फ 21 सीटों […]

  • हिन्दू होने की सजाः हर जगह अपमान, आतंक और मौत का सामना

    अभी-अभी मानवाधिकार दिवस बीता है। मानवाधिकार की कथित लड़ाई लड़ने वालों ने जोर-शोर से यह बताने की कोशिश कि उन्होंने उपेक्षित,दबे-कुचले और मानवीय अधिकारों से वंचित लोगों को उनके अधिकार दिलाने के लिए बड़े-बड़े आन्दोलन किए,लेख लिखे और उन्हें अपना हक दिलाया। पर उनके दावे कितने सही हैं,ये लोग किन लोगों के अधिकारों की बात […]

  • दूध की शुद्धता को बचाने हेतु अदालती संज्ञान

     'स्वतंत्र भारत के स्वतंत्र नागरिकÓ गत् कई दशकों से अपने ही देशवासियों को नकली व मिलावटी खाद्य पदार्थ परोसते आ रहे हैं। और इस गोरखधंधे से होने वाली अपनी काली कमाई को मानवता के यह दुश्मन 'मां लक्ष्मीÓ की कृपा मानते हैं। मिलावटखोरों का यह कारोबार जहां अन्य और कई प्रकार की खाद्य सामग्री को […]

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