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  • आनन्द कुमार पाण्डेय चिंरजीवी हो!

    आनन्द कुमार पाण्डेय चिंरजीवी हो!

    आज 24सितंबर,2022 है। आज ही के दिन मेरे छोटे बेटे आनन्द कुमार पाण्डेय का जन्म 1986 में हुआ। आनन्द की आरंभिक शिक्षा भुवनेश्वर काण्वेंट स्कूल की नर्सरी कक्षा से हुई।

  • भारत में क्यों है मंदी की शून्य सम्भावना

    भारत में क्यों है मंदी की शून्य सम्भावना

    अभी हाल ही में एक अमेरिकी बहुराष्ट्रीय निवेश प्रबंधन एवं वित्तीय सेवा कम्पनी मोर्गन स्टेनली के अर्थशास्त्रियों ने एक प्रतिवेदन जारी कर कहा है कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में भारत एशिया में सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था बन कर उभरने जा रहा है। इनके अनुमान के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था वित्तीय वर्ष 2022-23 में 7 प्रतिशत से अधिक की विकास दर हासिल कर लेगी जो विश्व में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक होगी एवं भारत का एशियाई एवं वैश्विक अर्थव्यवस्था के विकास दर में क्रमश: 28 प्रतिशत एवं 22 प्रतिशत का योगदान रहने जा रहा है।

  • एक लेख  और दस घंटेः  लेखक की मेहनत अनमोल है

    एक लेख और दस घंटेः लेखक की मेहनत अनमोल है

    वास्तविक लेखन करना आसान नहीं होता है। लेखन का कार्य एक कठिन और वर्षो-वर्षो के अनुभव का प्रतिफल होता है। बिना अनुभव का आप बेजोड़ कल्पना नही कर सकते हैं,

  • मातृभाषा: अपना गौरव अपनी पहचान

    मातृभाषा: अपना गौरव अपनी पहचान

    आज अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर प्रत्येक देशवासी को संकल्पबद्ध होना होगा की भारत के समुचित विकास, राष्ट्रीय एकात्मता एवं गौरव को बढ़ाने हेतु शिक्षण, दैनंदिन कार्य तथा लोक-व्यवहार में

  • राम मोहन रायः न राजा था न हिंदू था, अदालत का मुंशी और इसाई  धर्म प्रचारक था

    राम मोहन रायः न राजा था न हिंदू था, अदालत का मुंशी और इसाई धर्म प्रचारक था

    उस कब्रिस्तान के पादरी लोग प्रतिवर्ष 27 सितंबर को राम मोहन राय की स्मृति में प्रार्थना करने उस कब्र पर इकट्ठा होते हैं और नेहरू जी की प्रेरणा से तथा कांग्रेस शासन

  • खतरे में है भारत की सांस्कृतिक अखंडता और विरासत

    खतरे में है भारत की सांस्कृतिक अखंडता और विरासत

    भारत देश एक बहु-सांस्कृतिक परिदृश्य के साथ बना एक ऐसा राष्ट्र है जो दो महान नदी प्रणालियों, सिंधु तथा गंगा, की घाटियों में विकसित हुई सभ्यता है, यद्यपि हमारी संस्कृति हिमालय की वजह से अति विशिष्ट भौगोलीय क्षेत्र में अवस्थित, जटिल तथा बहुआयामी है, लेकिन किसी भी दृष्टि से अलग-थलग सभ्य

  • मुसलमान : वक़्त बदला, हालात नहीं

    देश को आज़ाद हुए सात दशक बीत चुके हैं। इस दौरान बहुत कुछ बदल गया, लेकिन अगर कहीं कुछ नहीं बदला है, तो वह है देश के मुसलमानों की हाल

  • राजनीतिक चंदे का नियमन जरूरी

    राजनीतिक चंदे का नियमन जरूरी

    राजनीतिक दलों को मिलने वाले विदेशी चंदे का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। मामला 2016 में बने विदेशी चंदा नियमन कानून और 2018 में उसमें किए गए संशोधन का है। वर्ष 2019 में होने वाले आम चुनाव से पूर्व राजनीतिक दलों के पास आ रहे धन का नियमन एवं नियंत्रण जरूरी है। राजनी

  • कब रुकेगा भूख से मौतों का सिलसिला

    कब रुकेगा भूख से मौतों का सिलसिला

    देश में भूख से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले दिनों भारतीय जनता पार्टी शासित प्रदेश झारखंड से भूख से मरने की ख़बरें आईं।

  • पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र और मानवता की हत्या

    पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र और मानवता की हत्या

    पश्चिम बंगाल में खूनी राजनीति के शिकंजे में फंसे लोकतंत्र का दम घुंट रहा है और वह सिसकियां ले रहा है। पंचायत चुनावों में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जिस प्रकार हिंसा का नंगा नाच किया था, उससे ही साफ जाहिर हो गया था कि बंगाल की राजनीति के मुंह खून लग गया है।

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