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  • नववर्ष की राह: शांति की चाह

    नववर्ष की राह: शांति की चाह

    नया वर्ष है क्या? मुड़कर एक बार अतीत को देख लेने का स्वर्णिम अवसर। क्या खोया, क्या पाया, इस गणित के सवाल का सही जवाब। आने वाले कल की रचनात्मक तस्वीर के रेखांकन का प्रेरक क्षण। क्या बनना, क्या मिटाना, इस अन्वेषणा में संकल्पों की सुरक्षा पंक्तियों का निर्माण। ‘आज’, ‘अभी’, ‘इसी क्षण’ को पूर्णता के साथ जी लेने का जागृत अभ्यास। नयेवर्ष की शुरूआत हर बार एक नया सन्देश, नया संबोध, नया सवाल लेकर आती है। एक सार्थक प्रश्न यह भी है कि व्यक्ति ऊर्जावान ही जन्म लेता है या उसे समाज ऊर्जावान बनाता है? तब मस्तिष्क की सुन्दरता का क्या अर्थ रह जाता है। मनुष्य जीवन की उपलब्धि है चेतना, अपने अस्तित्व की पहचान। इसी आधार पर वस्तुपरकता से जीवन में आनन्द। अपनी अपार आंतरिक सम्पदा से हम वर्षभर ऊर्जावान बने रह सकते हैं। लेकिन इसके लिये हमारी तैयारी भी चाहिए और संकल्प भी। इस वर्ष का हमारा भी कोई-न-कोई संकल्प हो और यह संकल्प हो सकता है कि हम स्वयं शांतिपूर्ण जीवन जीये और सभी के लिये शांतिपूर्ण जीवन की कामना करें। ऐसा संकल्प और ऐसा जीवन सचमुच नये वर्ष को सार्थक बना सकते हैं।

  • ब्रह्मपुत्र मसले पर संजीदगी ज़रूरी

    ब्रह्मपुत्र मसले पर संजीदगी ज़रूरी

    ब्रह्मपुत्र मूल के तिब्बती हिस्से में अपने हिस्से में अपनी हरकतों को लेकर चीन एक बार फिर विवाद में है। हालंकि यह पहली बार नहीं है कि तिब्बती हिस्से वाले ब्रह्मपुत्र नद पर चीन की अनैतिक हरकतों को लेकर विवाद खड़ा हुआ हो।

  • एक ज़रूरी बहस, छत्तीसगढ़ भूजल प्रतिबंध

    05 नवम्बर को एक एजेंसी के हवाले से छपी एक खबर के मुताबिक, छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने रबी की फसलों के लिए भूमिगत जल के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है।

  • महिलाओं की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य की बदहाली क्यों?

    महिलाओं की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य की बदहाली क्यों?

    देश में अस्तित्व एवं अस्मिता की दृष्टि से ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से महिलाओं के हालात बदतर एवं चिन्तनीय है।

  • दलाई लामा, बाबा रामदेव के साथ रविवार को विभिन्न धर्मगुरु एक मंच पर

    दलाई लामा, बाबा रामदेव के साथ रविवार को विभिन्न धर्मगुरु एक मंच पर

    मुम्बई | अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त जैन आचार्य डा. लोकेश मुनि द्वारा स्थापित अहिंसा विश्व भारती संस्था द्वारा 13 अगस्त 2017 को प्रात: 10 बजे मुंबई के एन.एस.सी.आई डॉम, वर्ली में वर्ल्ड पीस कोनक्लेव के अंतर्गत ‘अनेकता में एकता- भारतीय संस्कृति’ अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया है |

  • चंपारण सत्याग्रह शताब्दी पर विशेष कौन सुनेगा स्वच्छाग्रह का सच ?

    चंपारण सत्याग्रह शताब्दी पर विशेष कौन सुनेगा स्वच्छाग्रह का सच ?

    किसानों का शोषण बंद हो। चंपारण सत्याग्रह, इसी सच का आग्रह था। चंपारण सत्याग्रह के सौ साल पूरे होने पर भी क्या किसानों को शोषण रुका है ? मृत किसानों के नरमुण्डों को तमिलनाडु से

  • समय का प्रत्युत्तर देने वाला बजट

    समय का प्रत्युत्तर देने वाला बजट

    वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा प्रस्तुत बजट में किसी को आश्चर्य में डालने वाला कोई तत्व नहीं है। एक दिन पहले आर्थिक सर्वेक्षण में जो विचार एवं सुझाव पेश किए गए थे बजट मुख्यतः उसी को साकार करने वाला दस्तावेज है।

  • आज़ादी कितनी अधूरी, कितनी पूरी

    आज़ादी कितनी अधूरी, कितनी पूरी

    हासिल स्वतंत्रता, किसी के लिए भी निस्संदेह एक गर्व करने लायक उपलब्धि होती है और स्वतंत्रता दिवस, स्वतंत्रता दिलाने वालों की कुर्बानी को याद करने व जश्न मनाने का दिन। एक देश के लिए उसका स्वतंत्रता दिवस, स्वतंत्रता के मायने, सपने, लक्ष्य और उसके हासिल का आकलन का भी दिन होता है।

  • कहाँ हैं यश भारती पुरस्कार पाने वाले वो 56 लोग?

    कहाँ हैं यश भारती पुरस्कार पाने वाले वो 56 लोग?

    देश का हर संवेदनशील व्यक्ति इस मर्माहत कर देने वाली घटना से दुःखी है, आप इस मुद्दे पर किसी भी संजीदा व्यक्ति से बात कीजिए सकी पहली प्रतिक्रिया यही होती है

  • मातृभाषा में है संस्कृति की आत्मा का संगीत

    मातृभाषा में है संस्कृति की आत्मा का संगीत

    हमारी नई शिक्षा नीति पर विगत कुछ महीनों से चर्चा का जो सिलसिला चल पड़ा उसमें भाषाओं के विकास तथा राष्ट्रीय एकीकरण में भाषाओं की भूमिका पर भी विमर्श किया गया है।

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