आप यहाँ है :

पुस्तक चर्चा
 

  • ‘बुंदेली दोहे’ सांस्कृतिक शब्द छवियाँ मन मोहे

    ‘बुंदेली दोहे’ सांस्कृतिक शब्द छवियाँ मन मोहे

    विश्ववाणी हिंदी का कालजयी छंद दोहा अपनी मिसाल आप है। संक्षिप्तता, सारगर्भितता, लाक्षणिकता, मर्मबेधकता, कालजयिता, उपयोगिता तथा लोकप्रियता के सप्त सोपानी निकष पर दोहा जन सामान्य से लेकर विद्वज्जनों तक अपनी प्रासंगिकता निरंतर बनाए रख सका है।

  • आत्ममंथन से व्यंग्यमंथन तक

    आत्ममंथन से व्यंग्यमंथन तक

    वरिष्ठ व्यंग्यकार हरीश नवल की पुस्तक "कुछ व्यंग्य की कुछ व्यंग्यकारों की " जब मेरे हाथों में उन्होंने सौंपी, तो कुछ समय के लिए तो मुझे विश्वास ही नहीं हुआ. बस दो पल का आत्मीय मिलन सदियों पुराना बन गया.

  • कश्मीर की एक क्रांतिकारी जोगन थी ललद्दद

    कश्मीर की एक क्रांतिकारी जोगन थी ललद्दद

    मेरा उपन्यास *ललद्यद* कश्मीरी भाषा की आदि-कवयित्री ललद्यद के जीवन संघर्षों पर आधारित है।वह एक जुनूनी जोगन थी । इसी संसार में रहकर वह वहां पहुंची जहां संसार नहीं पहुंचता, जहां सारे धर्म और विश्वास पीछे छूट जाते हैं ।

  • मन के तलघर का प्रकाश – काव्य संग्रह का लोकार्पण समारोह

    मन के तलघर का प्रकाश – काव्य संग्रह का लोकार्पण समारोह

    मुंबई। प्रकाश गणपत जाधव के मूल मराठी कविता संग्रह का हिन्दी अनुवाद “ मन के तलघर का प्रकाश “ तथा “ एकताच्या पाऊलखुणा “ नामक संकलित मराठी कविताओं के पुस्तक का लोकार्पण समारोह रवीन्द्र नाट्य मंदिर के मिनी थिएटर में संपन्न हुआ. इस अवसर पर बतौर प्रमुख अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सूर्यबाला ने कहा कि संग्रह की कविताएं दिल को छू लेती हैं, जितनी अच्छी कविताएं हैं उतना ही सुंदर अनुवाद रमेश यादव और अरविंद लेखराज ने किया है.

  • किताब खरीदकर पढ़ें तो ही उसका लाभ मिलता हैः श्री राम नाईक

    किताब खरीदकर पढ़ें तो ही उसका लाभ मिलता हैः श्री राम नाईक

    आगरा। हिंदी दैनिक हिन्दुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर की किताब ‘लीक से हटकर’ बाज़ार में आ गई है। इस किताब का विमोचन उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाइक ने आगरा के जेपी पैलेस होटल में आयोजित एक कार्यक्रम में किया।

  • भारत को चाहिए राष्ट्रपति प्रणाली

    भारत को चाहिए राष्ट्रपति प्रणाली

    नई दिल्ली। संसदीय प्रणाली बनाम राष्ट्रपति प्रणाली की बहस नई नहीं है। स्वतंत्रता से पहले, स्वतंत्रता के बाद और संविधान अपनाए जाने तक संसदीय शासन प्रणाली की क्षमता पर गहन बहस चलती रही है। संविधान सभा में भी बहुत से सदस्यों ने भारत जैसे बड़े और विविधता वाले देश में संसदीय

  • ‘चिनगारी बन गयी मशाल’ काव्य कृति का विमोचन

    ‘चिनगारी बन गयी मशाल’ काव्य कृति का विमोचन

    कांग्रेस के पूर्व नगरसेवक और कवि दिवंगत दशरथ कृष्णाजी मधुकुंटा द्वारा रचित काव्य कृति 'चिनगारी बन गयी मशाल' का विमोचन साकीनाका के सेंट ज्यूड स्कूल में किया गया। एक मजदूर से मजदूर नेता, फिर नगरसेवक और बाद में कवि का सफर तय करनेवाले मधुकुंटा तेलगू भाषी होते हुए हिंदी पर वर्चस्व रखते थे।

  • सामाजिक प्रतिबद्धताओं से सजा व्यंग्य संग्रह: शोरूम में जननायक

    सामाजिक प्रतिबद्धताओं से सजा व्यंग्य संग्रह: शोरूम में जननायक

    अनूप मणि त्रिपाठी का पहला व्यंग्य संग्रह “शोरूम में जननायक” में लगभग तीन दर्जन व्यंग्य है. व्यंग्य संग्रह में भूमिका नहीं है, सुधी पाठक इससे अंदाज लगा सकते है कि नव लेखन के सामने आने वाली चुनौतियां कम नहीं होती. पुस्तक में भूमिका का न होना एक तरह अच्छा ही हुआ है. अब पाठक अपनी स्वतंत्र सोच से पुस्तक पढ़ने का साहस जुटा सकते हैं. क्योंकि देखा जाता है यदि पुस्तक में किसी बड़े लेखक की भूमिका हो तो पुस्तक पर नये सिरे से सोचना किसी वैचारिक संघर्ष से कम नहीं होता है.

  • तब  भाजपा के विधायक ने बचाई थी मायावती की जान

    तब भाजपा के विधायक ने बचाई थी मायावती की जान

    मायावती के जीवन पर आधारित अजय बोस की किताब ‘बहनजी : अ पॉलिटिकल बायोग्राफी ऑफ मायावती’ में लखनऊ के गेस्टहाउस में 2 जून, 1995 को घटी घटना की जानकारी पूरे विस्तार से दी गई है। 1993 में बीजेपी को सत्ता से बाहर करने के लिए समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव और बीएसपी प्रमुख कांशीराम ने गठजोड़ किया था. उस समय उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश का हिस्सा था और कुल सीट थीं 422. मुलायम 256 सीट पर लड़े और बीएसपी को 164 सीट दी थीं. चुनाव में एसपी और बीएसपी गठबंधन जीता. एसपी को 109 और बीएसपी को 67 सीट मिली थीं इसके बाद मुलायम सिंह यादव बीएसपी के समर्थन से मुख्यमंत्री बने. लेकिन, आपसी मनमुटाव के चलते 2 जून, 1995 को बसपा ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया और समर्थन वापसी की घोषणा कर दी. इस वजह से मुलायम सिंह की सरकार अल्पमत में आ गई.

  • संजय द्विवेदी द्वारा संपादित पुस्तक ‘मीडिया की ओर देखती स्त्री’ का लोकार्पण

    संजय द्विवेदी द्वारा संपादित पुस्तक ‘मीडिया की ओर देखती स्त्री’ का लोकार्पण

    माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में जनसंचार विभाग के अध्यक्ष संजय द्विवेदी द्वारा संपादित किताब 'मीडिया की ओर देखती स्त्री' का लोकार्पण 'मीडिया विमर्श' पत्रिका की ओर से गांधी भवन, भोपाल में आयोजित पं. बृजलाल द्विवेदी स्मृति अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान समारोह में निशा राय (भास्कर डाटकाम),आर जे अनादि( बिग एफ.एम),कौशल वर्मा(कोएनजिसिस,दिल्ली),अनुराधा आर्य(महिला बाल विकास अधिकारी बिलासपुर), शिखा शर्मा( इन्सार्ट्स),अन्नी अंकिता (दिल्ली प्रेस, दिल्ली),ऋचा चांदी( मीडिया प्राध्यापक),शीबा परवेज (फारच्यूना पीआर, मुंबई), श्रीमती भूमिका द्विवेदी (प्रकाशकः मीडिया विमर्श) ने किया।

  • Page 2 of 17
    1 2 3 4 17

ईमेल सबस्क्रिप्शन

PHOTOS

VIDEOS

Back to Top

Page 2 of 17
1 2 3 4 17