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पुस्तक चर्चा
 

  • पत्रकारिता के दार्शनिक आयाम का आधार है ‘आदि पत्रकार नारद का संचार दर्शन’

    पत्रकारिता के दार्शनिक आयाम का आधार है ‘आदि पत्रकार नारद का संचार दर्शन’

    भारत में प्रत्येक विधा का कोई न कोई एक अधिष्ठाता है। प्रत्येक विधा का कल्याणकारी दर्शन है। पत्रकारिता या कहें संपूर्ण संचार विधा के संबंध में भी भारतीय दर्शन उपलब्ध है। देवर्षि नारद का संचार दर्शन हमारे आख्यानों में भरा पड़ा है। हाँ, यह और बात है कि वर्तमान में संचार के क्षेत्र में 'भारतीय दर्शन' की उपस्थिति दिखाई नहीं देती है। उसका एक कारण तो यह है कि लंबे समय तक संचार माध्यमों पर कम्युनिस्ट विचारधारा के लोगों को दबदबा रहा है। यह उजागर तथ्य है कि कम्युनिस्टों को 'भारतीय दर्शन' स्वीकार नहीं, वह प्रत्येक विधा को कार्ल माक्र्स या फिर विदेशी विचारकों के चश्मे से देखते हैं। अब यह स्थिति बदल रही है। देशभर में विभिन्न विषयों को भारतीय दृष्टिकोण से देखने की एक परंपरा विकसित हो रही है। उन लोगों को प्रोत्साहन मिल रहा है, जो ज्ञान-विज्ञान ए

  • कौन थे जनरल थिमैया, जिन्हें नेहरूजी और तत्कालीन रक्षा मंत्री कृष्ण मेनन ने अपमानित किया था

    कौन थे जनरल थिमैया, जिन्हें नेहरूजी और तत्कालीन रक्षा मंत्री कृष्ण मेनन ने अपमानित किया था

    बताया गया है कि चीन के मोर्चे पर भारत की नीतियों से शीर्ष स्‍तर पर मतांतर था. उसी कड़ी में रक्षा मंत्री कृष्‍णा मेनन और थिमैया की मीटिंग हुई. वहां पर मेनन ने जनरल से कहा कि वह अपनी बात प्रधानमंत्री से सीधे कहने के बजाय पहले उनसे साझा कर मामले को इसी स्‍तर पर सुलझाएं. इसके साथ ही यह कहते हुए मेनन ने मीटिंग खत्‍म कर दी कि यदि मसले सार्वजनिक हुए तो उसके राजनीतिक प्रभाव की कीमत चुकानी होगी. इसके तत्‍काल बाद थिमैया ने इस्‍तीफा दे दिया।

  • मुख्यमंत्री ने किया ‘विचार प्रवाह‘ का विमोचन

    मुख्यमंत्री ने किया ‘विचार प्रवाह‘ का विमोचन

    रायपुर। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने जिला मुख्यालय राजनांदगांव में श्री गौतम पारख की पुस्तक ‘विचार प्रवाह‘ का विमोचन किया। उन्होंने लेखक श्री पारख के व्यक्तित्व और कृतित्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि श्री पारख ने इस पुस्तक में अपने विचारों को बड़ी बेबाकी से प्रस्तुत किया है। श्री पारख में संत कबीर की तरह खरी-खरी बात कहने का साहस नजर आता है। लेखक सांसारिक जीवन में है और आजीविका के लिए व्यवसाय भी करते है लेकिन भीतर से उनका हृदय संन्यासी की तरह है।

  • रूमानियत और मधुर प्रेम की जो दुनियाः अभी तुम इश्क़ में हो

    रूमानियत और मधुर प्रेम की जो दुनियाः अभी तुम इश्क़ में हो

    "अकाल में उत्सव" "ये वो सहर तो नहीं" जैसे सामाजिक सरोकारों पर आधारित उपन्यास लिखने वाले पंकज सुबीर जी "कितने घायल कितने बिस्मिल" "रेपिश्क" जैसी देह के इस पार और उस पार गहरे अहसासों को खंगालती कहानियाँ लिखने वाले पंकज सुबीर "कसाब एट द रेट ऑफ यरवदा डॉट को डॉट इन" जैसी आतंकवाद की जड़ों को ढूंढती कहानी लिखने वाले पंकज सुबीर जब एक नई किताब लेकर आते हैं जिसका नाम हो "अभी तुम इश्क. में हो" तो हैरानी और जिज्ञासा एक साथ होती है,कि क्या लिखा होगा ? ज्यादा आश्चर्य जब होता है जब बुक हाथ में लेने पर मालूम होता है कि

  • राष्ट्रवाद से जुड़े विमर्शों को रेखांकित करती एक किताब

    राष्ट्रवाद से जुड़े विमर्शों को रेखांकित करती एक किताब

    देश में राष्ट्रवाद से जुड़ी बहस इन दिनों चरम पर है। राष्ट्रवाद की स्वीकार्यता बढ़ी है। उसके प्रति लोगों की समझ बढ़ी है। राष्ट्रवाद के प्रति बनाई गई नकारात्मक धारणा टूट रही है। भारत में बुद्धिजीवियों का एक वर्ग ऐसा है, जो हर विषय को पश्चिम के चश्मे से देखते है और वहीं की कसौटियों पर कस कर उसका परीक्षण करता है। राष्ट्रवाद के साथ भी उन्होंने यही किया। राष्ट्रवाद को भी उन्होंने पश्चिम के दृष्टिकोण से देखने का प्रयास किया। जबकि भारत का राष्ट्रवाद पश्चिम के राष्ट्रवाद से सर्वथा भिन्न है। पश्चिम का राष्ट्रवाद एक राजनीतिक विचार है। चूँकि वहाँ राजनीति ने रा

  • चिपको आंदोलन ने  एक नया इतिहास बनाया

    चिपको आंदोलन ने एक नया इतिहास बनाया

    चिपको आंदोलन की आज 45वीं वर्षगांठ है. इस मौके पर गूगल ने एक खूबसूरत डूडल इसे समर्पित किया है. साथ ही इस आंदोलन के बारे में गूगल ने लिखा है कि यह एक ‘ईको-फेमिनिस्ट’ आंदोलन था जिसका पूरा ताना-बाना महिलाओं ने ही बुना था.

  • दीपक चोऋषिया की पुस्तक कूड़ा धन का विमोचन किया श्रीमती सुमित्रा महाजन ने

    दीपक चोऋषिया की पुस्तक कूड़ा धन का विमोचन किया श्रीमती सुमित्रा महाजन ने

    वरिष्ठ पत्रकार और इंडिया न्यूज़ चैनल के मुख्य संपादक दीपक चौऋषिया की पुस्तक 'कूड़ा धन' का मंगलवार की शाम कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में विमोचन हुआ। इस कार्यक्रम के दौरान बतौर अतिथि लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की प्रतिमा के पर फूलों की माला अर्पित करने और दीप प्रज्जवलित करने के साथ की गई।

  • डॉ. रमन सिंह द्वारा शोध पत्रिका  ‘मेधा’ के 22वें अंक का का विमोचन

    डॉ. रमन सिंह द्वारा शोध पत्रिका ‘मेधा’ के 22वें अंक का का विमोचन

    मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने अपने निवास कार्यालय में संस्कृत शोध पत्रिका ‘मेधा’ के 22वें अंक का विमोचन किया। इसका प्रकाशन शासकीय दूधाधारी श्रीराजेश्री महन्त वैष्णवदास स्नातकोत्तर संस्कृत महाविद्यालय द्वारा किया गया है। उल्लेखनीय है कि यह महाविद्यालय संस्कृत भाषा का प्रमुख शोध केन्द्र भी है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्यामण्डलम् के पूर्व अध्यक्ष डॉ. गणेश कौशिक, महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. श्रीमती राधा पाण्डेय, उच्च शिक्षा विभाग की संयुक्त सचिव डॉ. किरण गजपाल, शोध पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ. सत्येन्दु शर्मा, संपादक डॉ. राघवेन्द्र शर्मा और अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजीव तिवारी इस अवसर पर उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने शोध पत्रिका के प्रकाशन पर सभी लोगों को बधाई और शुभकामनाएं दी। इस पत्रिका में संस्कृत, हिन्दी और अंग्रेजी भाषाओं में वेद, ज्योतिष, व्याकरण, दर्शन और साहित्य जैसे विषयों पर शोध पत्र प्रकाशित किए गए हैं।

  • ‘श्रीराम संस्कृति की झलक’ पुस्तक का विमोचन

    ‘श्रीराम संस्कृति की झलक’ पुस्तक का विमोचन

    रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने अपने निवास पर ‘श्रीराम संस्कृति की झलक’ पुस्तक का विमोचन किया। इस पुस्तक के लेखक पूर्व विधायक श्री राजेश्री डॉ. महंत राम सुन्दर दास हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि 946 पृष्ठों की इस पुस्तक में छत्तीसगढ़ के सभी मंदिरों की स्थापत्य कला, मंदिर के रख-रखाव, पूजा के विधान तथा छत्तीसगढ़ के विभिन्न धार्मिक पर्वों और व्रतों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है।

  • श्री राम नाईक के संस्मरणों की पुस्तक  ‘चरैवेति! चरैवेति को पुरस्कार

    श्री राम नाईक के संस्मरणों की पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति को पुरस्कार

    महाराष्ट्र राज्य साहित्य एवं संस्कृति विभाग द्वारा मराठी भाषा गौरव दिन के अवसर पर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक को उनके मराठी संस्मरण संग्रह ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ को लक्ष्मीबाई तिलक पुरस्कार तथा रुपये एक लाख रुपये की राशि प्रदान की गई। मुंबई में आयोजित समारोह में महाराष्ट्र सरकार के मंत्री विनोद तावड़े ने यह अवार्ड देकर राज्यपाल को सम्मानित किया।

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