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राजनीति
 

  • अमित शाह के आत्मविश्वास की असलियत

    अमित शाह के आत्मविश्वास की असलियत

    बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने सन 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए पार्टी के लिए 360 से ज़्यादा सीटें जीतने का ऐलान किया है।राजनीति के जानकारों के दिमाग में सवाल है कि इतना बड़ा लक्ष्य रखने की वजह क्या है।

  • अमित शाह होने का मतलब

    अमित शाह होने का मतलब

    अर्थ है- जो सो रहा है वह कलि है, निद्रा से उठ बैठने वाला द्वापर है, उठकर खड़ा हो जाने वाला त्रेता है लेकिन जो चल पड़ता है, वह कृतयुग, सतयुग और स्वर्णयुग बन जाता है। इसलिए चलते रहो, चलते रहो। यही मंत्र भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष श्री अमित शाह ने अपना कर पूरी तरह साकार किया है।

  • सावर्जनिक संवाद में गिरावटः सनक में बदलती उत्तेजना

    सावर्जनिक संवाद में गिरावटः सनक में बदलती उत्तेजना

    भारतीय राजनीति और समाज में संवाद के गिरते स्तर और संवाद माध्यमों पर भीड़ के मुखर हो उठने का यह विचित्र समय है। यह वाचाल भीड़ समाज से लेकर सोशल मीडिया तक हर जगह अपनी ‘खास राय’ के साथ खड़ी है।

  • राहुल पर नहीं, ये लोकतंत्र पर हमला है

    राहुल पर नहीं, ये लोकतंत्र पर हमला है

    गुजरात में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की कार पर किए गए हमले को किसी भी सूरत में हल्के में नहीं लिया जा सकता है.

  • उपराष्ट्रपति के रुप में वेंकैया की उम्मीदवारी के राजनीतिक मायने

    उपराष्ट्रपति के रुप में वेंकैया की उम्मीदवारी के राजनीतिक मायने

    भाजपा या राजग की ओर से उपराष्ट्रपति पद के लिए वेंकैया नायडू को उम्मीदवार बनाए जाने से किसी केा आश्चर्य नहीं हुआ है। उनका नाम कई दिनों से हवा में तैर रहा था।

  • सवाल यह भी तो है कि अब उपराष्ट्रपति कौन होगा?

    सवाल यह भी तो है कि अब उपराष्ट्रपति कौन होगा?

    राष्ट्रपति तो रामनाथ कोविंद होंगे, लेकिन उपराष्ट्रपति कौन होगा। भैरोंसिंह शेखावत की तरह कोई तेजतर्रार राजनीतिक व्यक्ति उपराष्ट्रपति बना, तो वह राष्ट्रपति पद पर बैठे कोविंद के कद पर भारी पड़ जाएगा। क्योंकि कोविंद पद में भले ही बड़े साहित हो सकते हैं

  • माननीयों  का महाचुनाव….!!

    माननीयों का महाचुनाव….!!

    देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद यानी राष्ट्पति के बारे में मुझेे पहली जानकारी स्कूली जीवन में मिली , जब किसी पूर्व राषट्रपति के निधन के चलते मेरे स्कूल में छुट्टी हो गई थी। तब में प्राथमिक कक्षा का छात्र था। मन ही मन तमाम सवालों से जूझता हुआ मैं घर लौट आया था।

  • उप्र के दलित नेता को उम्मीदवार बनाकर मोदी ने सबको चौंकाया

    उप्र के दलित नेता को उम्मीदवार बनाकर मोदी ने सबको चौंकाया

    शायद यही राजनीति की नरेंद्र मोदी शैली है। राष्ट्रपति पद के लिए अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाले श्री रामनाथ कोविंद का चयन कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिर बता दिया है कि जहां के कयास लगाने भी मुश्किल हों, वे वहां से भी उम्मीदवार खोज लाते हैं।

  • कम्युनिस्टों का एजेंडा, सेना को बदनाम करो

    कम्युनिस्टों का एजेंडा, सेना को बदनाम करो

    भारतीय सेना सदैव से कम्युनिस्टों के निशाने पर रही है। सेना का अपमान करना और उसकी छवि खराब करना, इनका एक प्रमुख एजेंडा है। यह पहली बार नहीं है, जब एक कम्युनिस्ट लेखक ने भारतीय सेना के विरुद्ध लेख लिखा हो।

  • वाघेला ‘बापू’ कांग्रेस को गच्चा देने की फिराक में

    वाघेला ‘बापू’ कांग्रेस को गच्चा देने की फिराक में

    शंकरसिंह वाघेला धुरंधर किस्म के राजनेता हैं। वे असल में संघ परिवार के स्वयंसेवक रहे हैं, इसीलिए डाल का पंछी फिर डाल पर लौटने को बेताब है। कांग्रेस के पास उनको देने के लिए कुछ भी नहीं है और बीजेपी बांटने को बेताब है ही। ऐसे में वाघेला के लिए अपनी पुरानी मंजिल पर पहुंचने के रास्ते खुले हुए हैं। कभी भी कोई बड़ी खबर आ सकती है।

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