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  • क्या राहुल के कारण झुकी मोदी सरकार

    कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के गुजरात दौरे से केंद्र की भाजपा सरकार में हड़कंप मचा हुआ है. जीएसटी में बदलाव इसकी ताज़ा मिसाल है.

  • संकीर्णता नहीं, स्वस्थ राजनीतिक मुद्दें हो

    संकीर्णता नहीं, स्वस्थ राजनीतिक मुद्दें हो

    मुंबई में पिछले दो सप्ताह से महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना बाहर से आकर बसे और कारोबार कर रहे लोगों के खिलाफ हिंसक आंदोलन चला रही है, उन्हें खदेड़ रही है, उनके रोजी-रोटी को बाधित कर रही है, इस तरह अपनी राजनीति को मजबूत करने की सोच एवं रणनीति लोकतांत्रिक दृष्टि से कत्तई उचित नहीं है।

  • आधार को लेकर ममता के तेवर

    आधार को लेकर ममता के तेवर

    एक बार फिर आधार की अनिवार्यता का प्रश्न चर्चा में हैं। यह इसलिये चर्चा में है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे चुनौती देने का दुस्साहस किया है। इसके लिये उन्होंने सरकारी योजनाओं को आधार से जोड़ने के खिलाफ सुप्रीम कोई में याचिका दाखिल कर दी।

  • दिग्विजय सिंह नहीं,अमृता सिंह होंगी म.प्र. कांग्रेस की भावी रणनीतिकार

    दिग्विजय सिंह नहीं,अमृता सिंह होंगी म.प्र. कांग्रेस की भावी रणनीतिकार

    मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह इन दिनों राजनीति से 6 माह का अवकाश लेकर पवित्र नर्मदा नदी की परिक्रमा कर रहे हैं। धार्मिक दृष्टि से देखें तो यह अत्यंत पुण्य का काम है परंतु दिग्विजय सिंह और राजनीति से अवकाश यह बात आसानी से हजम होने वाली नहीं है।

  • अमित शाह के आत्मविश्वास की असलियत

    अमित शाह के आत्मविश्वास की असलियत

    बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने सन 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए पार्टी के लिए 360 से ज़्यादा सीटें जीतने का ऐलान किया है।राजनीति के जानकारों के दिमाग में सवाल है कि इतना बड़ा लक्ष्य रखने की वजह क्या है।

  • अमित शाह होने का मतलब

    अमित शाह होने का मतलब

    अर्थ है- जो सो रहा है वह कलि है, निद्रा से उठ बैठने वाला द्वापर है, उठकर खड़ा हो जाने वाला त्रेता है लेकिन जो चल पड़ता है, वह कृतयुग, सतयुग और स्वर्णयुग बन जाता है। इसलिए चलते रहो, चलते रहो। यही मंत्र भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष श्री अमित शाह ने अपना कर पूरी तरह साकार किया है।

  • सावर्जनिक संवाद में गिरावटः सनक में बदलती उत्तेजना

    सावर्जनिक संवाद में गिरावटः सनक में बदलती उत्तेजना

    भारतीय राजनीति और समाज में संवाद के गिरते स्तर और संवाद माध्यमों पर भीड़ के मुखर हो उठने का यह विचित्र समय है। यह वाचाल भीड़ समाज से लेकर सोशल मीडिया तक हर जगह अपनी ‘खास राय’ के साथ खड़ी है।

  • राहुल पर नहीं, ये लोकतंत्र पर हमला है

    राहुल पर नहीं, ये लोकतंत्र पर हमला है

    गुजरात में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की कार पर किए गए हमले को किसी भी सूरत में हल्के में नहीं लिया जा सकता है.

  • उपराष्ट्रपति के रुप में वेंकैया की उम्मीदवारी के राजनीतिक मायने

    उपराष्ट्रपति के रुप में वेंकैया की उम्मीदवारी के राजनीतिक मायने

    भाजपा या राजग की ओर से उपराष्ट्रपति पद के लिए वेंकैया नायडू को उम्मीदवार बनाए जाने से किसी केा आश्चर्य नहीं हुआ है। उनका नाम कई दिनों से हवा में तैर रहा था।

  • सवाल यह भी तो है कि अब उपराष्ट्रपति कौन होगा?

    सवाल यह भी तो है कि अब उपराष्ट्रपति कौन होगा?

    राष्ट्रपति तो रामनाथ कोविंद होंगे, लेकिन उपराष्ट्रपति कौन होगा। भैरोंसिंह शेखावत की तरह कोई तेजतर्रार राजनीतिक व्यक्ति उपराष्ट्रपति बना, तो वह राष्ट्रपति पद पर बैठे कोविंद के कद पर भारी पड़ जाएगा। क्योंकि कोविंद पद में भले ही बड़े साहित हो सकते हैं

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