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राजनीति
 

  • उपराष्ट्रपति के रुप में वेंकैया की उम्मीदवारी के राजनीतिक मायने

    उपराष्ट्रपति के रुप में वेंकैया की उम्मीदवारी के राजनीतिक मायने

    भाजपा या राजग की ओर से उपराष्ट्रपति पद के लिए वेंकैया नायडू को उम्मीदवार बनाए जाने से किसी केा आश्चर्य नहीं हुआ है। उनका नाम कई दिनों से हवा में तैर रहा था।

  • सवाल यह भी तो है कि अब उपराष्ट्रपति कौन होगा?

    सवाल यह भी तो है कि अब उपराष्ट्रपति कौन होगा?

    राष्ट्रपति तो रामनाथ कोविंद होंगे, लेकिन उपराष्ट्रपति कौन होगा। भैरोंसिंह शेखावत की तरह कोई तेजतर्रार राजनीतिक व्यक्ति उपराष्ट्रपति बना, तो वह राष्ट्रपति पद पर बैठे कोविंद के कद पर भारी पड़ जाएगा। क्योंकि कोविंद पद में भले ही बड़े साहित हो सकते हैं

  • माननीयों  का महाचुनाव….!!

    माननीयों का महाचुनाव….!!

    देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद यानी राष्ट्पति के बारे में मुझेे पहली जानकारी स्कूली जीवन में मिली , जब किसी पूर्व राषट्रपति के निधन के चलते मेरे स्कूल में छुट्टी हो गई थी। तब में प्राथमिक कक्षा का छात्र था। मन ही मन तमाम सवालों से जूझता हुआ मैं घर लौट आया था।

  • उप्र के दलित नेता को उम्मीदवार बनाकर मोदी ने सबको चौंकाया

    उप्र के दलित नेता को उम्मीदवार बनाकर मोदी ने सबको चौंकाया

    शायद यही राजनीति की नरेंद्र मोदी शैली है। राष्ट्रपति पद के लिए अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाले श्री रामनाथ कोविंद का चयन कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिर बता दिया है कि जहां के कयास लगाने भी मुश्किल हों, वे वहां से भी उम्मीदवार खोज लाते हैं।

  • कम्युनिस्टों का एजेंडा, सेना को बदनाम करो

    कम्युनिस्टों का एजेंडा, सेना को बदनाम करो

    भारतीय सेना सदैव से कम्युनिस्टों के निशाने पर रही है। सेना का अपमान करना और उसकी छवि खराब करना, इनका एक प्रमुख एजेंडा है। यह पहली बार नहीं है, जब एक कम्युनिस्ट लेखक ने भारतीय सेना के विरुद्ध लेख लिखा हो।

  • वाघेला ‘बापू’ कांग्रेस को गच्चा देने की फिराक में

    वाघेला ‘बापू’ कांग्रेस को गच्चा देने की फिराक में

    शंकरसिंह वाघेला धुरंधर किस्म के राजनेता हैं। वे असल में संघ परिवार के स्वयंसेवक रहे हैं, इसीलिए डाल का पंछी फिर डाल पर लौटने को बेताब है। कांग्रेस के पास उनको देने के लिए कुछ भी नहीं है और बीजेपी बांटने को बेताब है ही। ऐसे में वाघेला के लिए अपनी पुरानी मंजिल पर पहुंचने के रास्ते खुले हुए हैं। कभी भी कोई बड़ी खबर आ सकती है।

  • कहीं अपने होने का अर्थ ही न खो दें राहुल गांधी !

    कहीं अपने होने का अर्थ ही न खो दें राहुल गांधी !

    समय आ गया है जब राहुल गांधी कांग्रेस की समान संभाल लें। लेकिन राहुल हैं कि पता नहीं किस दिन का इंतजार कर रहे हैं। वक्त बीता जा रहा है। कुछ समय और निकल गया, फिर अगर वे अध्यक्ष बन भी जाएंगे, तो भी इस देश में कोई बहुत बड़ा तूफान खड़ा नहीं होनेवाला। क्योंकि तब तक कांग्रेस के फिर से खड़े होने की क्षमता ही खत्म हो जाएगी।

  • केजरीवालः हर रोज नया बवाल

    केजरीवालः हर रोज नया बवाल

    अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी में इन दिनों जो कुछ चल रहा है, उससे राजनीतिज्ञों के प्रति अविश्वास और गहरा हुआ है। वे उम्मीदों को तोड़ने वाले राजनेता

  • केजरीवाल: बद अच्छा बदनाम बुरा?

    केजरीवाल: बद अच्छा बदनाम बुरा?

    भारतीय राजस्व सेवा की प्रथम श्रेणी की अफ़सरशाही छोडक़र जन आंदोलनों से गुज़रते हुए भ्रष्टाचार मिटाने के उद्देश्य से राजनीति में क़दम रखने वाले अरविंद केजरीवाल इन दिनों विभिन्न राजनैतिक दलों के अतिरिक्त मीडिया के लिए भी घोर आलोचना का केंद्र बने हुए हैं। जिस भारतीय मीडिया को अरविंद केजरीवाल में एक

  • सवाल केजरीवाल का नहीं, आम आदमी के सपनों का है

    सवाल केजरीवाल का नहीं, आम आदमी के सपनों का है

    आम आदमी पार्टी गंभीर संकट से जूझ रही है। देश के आम आदमी को उम्मीदों की नयी रोशनी दिखाते हुए साढ़े चार साल पहले जब पार्टी सामने आयी थी,

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