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  • उपचुनावों की हार की दस्तक सुनें

    उपचुनावों की हार की दस्तक सुनें

    राजस्थान व पश्चिम बंगाल में हुए लोकसभा व विधानसभा उपचुनावों में देश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की करारी हार से साफ हो गया है कि भाजपा से जनता का मोहभंग होना शुरु हो गया है और उसकी उल्टी गिनती की संभावनाएं भी व्यक्त कीक जाने लगी है। जनता अब समझदार हो चुकी है। आसपास घटने वाली हर घटना को वह गुण-दोष के आधार पर परखकर, समीक्षा कर, प्रतिक्रिया ज़ाहिर कर देती है। अधिकांशतः ये प्रतिक्रियाएं राष्ट्रभर में एक-सी होती हैं और यही उनके सही होने का माप है। मतदाता अब समझदार और जागरूक है। वह उन मूल मुद्दों की परवाह करता हैं जिनसे उनके हितों का संबंध है और जिनसे भारत का लोकतन्त्र सशक्त होता है।

  • ये हैं वो सिपाहसालार, जिनके बिना राहुल गाँधी काम नहीं चलता

    ये हैं वो सिपाहसालार, जिनके बिना राहुल गाँधी काम नहीं चलता

    कांग्रेस में सोनिया युग खत्म हो चुका है और राहुल राज का आगाज। 19 साल पार्टी की बागडोर संभालने के बाद शुक्रवार को सोनिया गांधी की जगह राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष का कार्यभार सौंपा गया। लेकिन न्यूज18 के मुताबिक पुराने अध्यक्ष के जाने के बाद राहुल के पास अपनी एक खास टीम है, जो उन्हें कामकाज में मदद करेगी। आज हम आपको राहुल गांधी की खास टीम के सदस्यों से रूबरू कराएंगे।

  • जब राहुल गांधी ने मां की पेशानी चूमी

    जब राहुल गांधी ने मां की पेशानी चूमी

    कांग्रेस की वरिष्ठ नेता श्रीमती सोनिया गांधी ने बीते शनिवार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय में आयोजित एक समारोह में राहुल गांधी को पार्टी के अध्यक्ष पद की ज़िम्मेदारी सौंपी. इस मौक़े पर राहुल गांधी ने अपनी मां की पेशानी (माथे) को चूमकर अपने जज़्बात का इज़हार किया. हमेशा मौक़े की ताक में बैठे रहने वाले ’राष्ट्रवादी’ लोगों ने इस बात पर ही बवाल खड़ा कर दिया. उनका कहना था कि राहुल गांधी ने अपनी मां की पेशानी चूमकर विदेशी होने का सबूत दिया है. उन्हें सोनिया गांधी के पैर छूकर आशीर्वाद लेना चाहिए था. ऐसा नहीं है कि राहुल गांधी पहली बार ट्रोल हुए हैं. एक गिरोह उन्हें और उनकी मां को हमेशा विदेशी साबित करने पर आमादा रहता है.

  • गुजरात से निखरी राहुल गांधी की तस्वीर और गहलोत निकले चाणक्य

    गुजरात से निखरी राहुल गांधी की तस्वीर और गहलोत निकले चाणक्य

    गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजों को एक तरफ रख दीजिए। वे जो हैं, सो हैं। कांग्रेस, कांग्रेसियों और राहुल गांधी के शुभचिंतकों के लिए खुशी की बात यह है कि इस चुनाव में राहुल एक तपे हुए, मंजे हुए और धारदार नेता बनकर देशभर में ऊभरे हैं। इससे भी ज्यादा खुशी की बात यह है कि राहुल गांधी उस गुजरात से नेता बनकर निकले हैं, जहां बीजेपी के दो सबसे बड़े नेता, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह उनके सबसे मुख्य विरोधी के रूप में प्रमुख उपस्थिति में थे। गुजरात में पूरे चुनाव के दौरान राहुल गांधी बिल्कुल निखरे निखरे से, आक्रामक तेवरवाले पूरे देश के नेता से लगे। इस चुनाव में रणनीतिक सफलता के बाद उन्हें देश में सही मायने में राजनेता के रूप में स्वीकारा जाने लगा है। अब जब लोग राहुल गांधी को टीवी पर भाषण देता देखते हैं, तो चैनल नहीं बदलते, सुनते है। गंभीरता से लेते हैं।

  • राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बैद किस दिशा में जाएगी कांग्रेस

    एक लम्बे इंतज़ार के बाद आख़िरकार राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष बन गए। पिछले काफ़ी अरसे से पार्टी में उन्हें अध्यक्ष बनाए जाने की मांग उठ रही थी। कांग्रेस नेताओं का मानना था कि पार्टी की बागडोर अब राहुल गांधी के सुपुर्द कर देनी चाहिए। सोमवार को पार्टी अध्यक्ष पद के प्रस्तावित चुनाव के लिए नामांकन की आख़िरी तारीख़ थी। राहुल गांधी के ख़िलाफ़ किसी ने भी परचा दाख़िल नहीं किया था। कांग्रेस नेता मुल्लापल्ली रामचंद्रन ने कहा कि नामांकन के 89 प्रस्ताव दाख़िल किए गए थे। सभी वैध पाए गए। सिर्फ़ एक ही उम्मीदवार मैदान में है, इसलिए मैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर राहुल गांधी के निर्वाचन की घोषणा करता हूं। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद पर राहुल गांधी निर्विरोध चुन लिए गए हैं।

  • क्या राहुल के कारण झुकी मोदी सरकार

    कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के गुजरात दौरे से केंद्र की भाजपा सरकार में हड़कंप मचा हुआ है. जीएसटी में बदलाव इसकी ताज़ा मिसाल है.

  • संकीर्णता नहीं, स्वस्थ राजनीतिक मुद्दें हो

    संकीर्णता नहीं, स्वस्थ राजनीतिक मुद्दें हो

    मुंबई में पिछले दो सप्ताह से महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना बाहर से आकर बसे और कारोबार कर रहे लोगों के खिलाफ हिंसक आंदोलन चला रही है, उन्हें खदेड़ रही है, उनके रोजी-रोटी को बाधित कर रही है, इस तरह अपनी राजनीति को मजबूत करने की सोच एवं रणनीति लोकतांत्रिक दृष्टि से कत्तई उचित नहीं है।

  • आधार को लेकर ममता के तेवर

    आधार को लेकर ममता के तेवर

    एक बार फिर आधार की अनिवार्यता का प्रश्न चर्चा में हैं। यह इसलिये चर्चा में है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे चुनौती देने का दुस्साहस किया है। इसके लिये उन्होंने सरकारी योजनाओं को आधार से जोड़ने के खिलाफ सुप्रीम कोई में याचिका दाखिल कर दी।

  • दिग्विजय सिंह नहीं,अमृता सिंह होंगी म.प्र. कांग्रेस की भावी रणनीतिकार

    दिग्विजय सिंह नहीं,अमृता सिंह होंगी म.प्र. कांग्रेस की भावी रणनीतिकार

    मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह इन दिनों राजनीति से 6 माह का अवकाश लेकर पवित्र नर्मदा नदी की परिक्रमा कर रहे हैं। धार्मिक दृष्टि से देखें तो यह अत्यंत पुण्य का काम है परंतु दिग्विजय सिंह और राजनीति से अवकाश यह बात आसानी से हजम होने वाली नहीं है।

  • अमित शाह होने का मतलब

    अमित शाह होने का मतलब

    अर्थ है- जो सो रहा है वह कलि है, निद्रा से उठ बैठने वाला द्वापर है, उठकर खड़ा हो जाने वाला त्रेता है लेकिन जो चल पड़ता है, वह कृतयुग, सतयुग और स्वर्णयुग बन जाता है। इसलिए चलते रहो, चलते रहो। यही मंत्र भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष श्री अमित शाह ने अपना कर पूरी तरह साकार किया है।

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