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श्रद्धांजलि
 

  • पत्रकार, चिंतक और दार्शनिक मुज़फ्फर हुसैन नहीं रहे

    पत्रकार, चिंतक और दार्शनिक मुज़फ्फर हुसैन नहीं रहे

    मुजफ्फर हुसैन (२० मार्च १९४० — १३ फरवरी २०१८) हिंदी और उर्दू पत्रकारिता को एक नई धार देने वाले और हिंदी पाठकों को मध्य पूर्व से लेकर इस्लामी देशों की राजनीति, भूगोल, इतिहास, अर्थशास्त्र से लेकर सामाजिक और इस्लामिक दुनिया की जानी अनजानी सच्चाई से अवगत कराने वाले मूर्धन्य पत्रकार, लेखक और दार्शनिक पद्मश्री सम्मान […]

  • सरकारी दस्तावेजों से मिटा दिया, मगर दिलों में ज़िंदा हैं बंधु सिंह

    सरकारी दस्तावेजों से मिटा दिया, मगर दिलों में ज़िंदा हैं बंधु सिंह

    देश, 69 वें गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारियों में जुटा है। यह मौका राष्ट्रहित के लिए अपना सर्वस्व न्यौच्छावर कर देने वाले क्रांतिकारियों को याद करने का है। लेकिन ऐसे वीर सेनानियों की संख्या भी कम नहीं जिनके योगदान को लम्बे अर्से तक भुलाए रखा गया। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पूर्वांचल में क्रांति के अग्रदूत रहे बंधू सिंह ऐसे ही वीर सेनानियों में से एक हैं। जिनकी विरासत को सम्भालने की शुरुआत ही डेढ़ सदी बाद हुई।

  • वरिष्ठ पत्रकार नंदकिशोर त्रिखा का निधन

    वरिष्ठ पत्रकार नंदकिशोर त्रिखा का निधन

    नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्‍ट्स (इंडिया) के पूर्व राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष और नवभारत टाइम्‍स के पूर्व स्थानीय संपादक डॉ. नंदकिशोर त्रिखा का सोमवार को नई दिल्‍ली स्‍थित एम्‍स में निधन हो गया। वे 80 की उम्र पार कर चुके थे। उनका अंतिम संस्कार आज देर शाम लोधी रोड स्थित निगम बोध घाट पर किया जाएगा।

  • हिंदी साहित्य को एक नई पहचान दी दूधनाथ सिंह ने

    हिंदी साहित्य को एक नई पहचान दी दूधनाथ सिंह ने

    हिंदी के वरिष्ठ कथाकार दूधनाथ सिंह का गुरुवार देर रात इलाहाबाद के फीनिक्स अस्पताल में निधन हो गया. दूधनाथ काफी लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थे. दूधनाथ सिंह की मौत के बाद पूरे साहित्य जगत के चेहरों पर उदासी छा गई है. उसने जुड़ा हर कवि, कथाकार और साहित्यकार उन्हें याद करके अपने तरीकों से श्रद्धांजलि दे रहे हैं. कोई मीडिया को संबोधित करके दूधनाथ को याद कर रहा है तो कोई सोशल मीडिया पर उनके साथ गुजारे पल को याद कर रहा है. श्री दूधनाथ सिंह को उत्तर प्रदेश के सर्वोच्च साहित्य सम्मान भारत भारती, मध्य प्रदेश सरकार के मैथिलीशरण गुप्त सम्मान से भी सम्मानित किया गया था। मूलतः जनपद बलिया के रहने वाले श्री दूधनाथ सिंह इलाहाबाद विश्वविद्यालय से सन् 1994 में अवकाश प्राप्त कर लेखन क्षेत्र में सक्रिय रहे। उन्होंने कई कालजयी रचनाएं देकर हिन्दी साहित्य जगत की अतुलनीय शुरुआत की।

  • असम में तीस सालों में 32 पत्रकार मार दिए गए

    असम में तीस सालों में 32 पत्रकार मार दिए गए

    पिछले तीस वर्षों में असम के 32 पत्रकार या तो मार दिए गए, या ऐसे गायब हुए कि कभी वापस नहीं लौटे। इन 32 पत्रकारों के परिवारों की जिंदगी असम के उग्रपंथियों, लैंड माफिया या तस्करों के चलते तबाही के रास्ते पर चली गई। इन सभी परिवारों का दुख दिसम्बर 2017 में बांटने की कोशिश की असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने और हर परिवार को पांच पांच लाख रुपए की मदद दी।

  • ओमपुरी ने फिल्मी परदे पर एक नए नायक को जन्म दिया

    ओमपुरी ने फिल्मी परदे पर एक नए नायक को जन्म दिया

    महान कलाकार ओम पुरी का जन्म 18 अक्टूबर 1950 में हरियाणा के अम्बाला शहर में एक पंजाबी परिवार में हुआ। ओम पुरी के पिता भारतीय सेना में थे। अमरीश पुरी और मदन पुरी उनके चचेरे भाई थे। ओमपुरी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने ननिहाल पंजाब के पटियाला से पूरी की। ओमपुरी ने पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से अपना ग्रैजुएशन पूरा किया। इसके साथ उन्होंने दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) से भी पढ़ाई की। एनएसडी में नसीरुद्दीन शाह उनके सहपाठी थे। 1976 में ओमपुरी ने पुणे फिल्म संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद लगभग डेढ़ वर्ष तक एक स्टूडियो में अभिनय की शिक्षा दी। ओमपुरी ने अपने निजी थिएटर ग्रुप ‘मजमा’ की स्थापना की। ओमपुरी का विवाह 1991 में अभिनेता अन्नू कपूर की बहिन सीमा कपूर से हुआ।

  • गालिब के बिना अधूरी है शेरो-शारी की दुनिया

    गालिब के बिना अधूरी है शेरो-शारी की दुनिया

    आज (बुधवार) महान शायर मिर्जा गालिब की 220वीं जयंती है. गूगल ने आज अपना डूडल उर्दू के इस महान शायर को समर्पित किया है. मिर्जा गालिब का पूरा नाम मिर्जा असल-उल्लाह बेग खां था. उनका जन्म 27 दिसंबर 1797 को मुगल शासक बहादुर शाह के शासनकाल के दौरान आगरा के एक सैन्य परिवार में हुआ था. उन्होंने फारसी, उर्दू और अरबी भाषा की पढ़ाई की थी.

  • मोहम्मद रफ़ीः तुम मुझे यूं भुला न पाओगे

    मोहम्मद रफ़ी साहब की जयंती 24 दिसम्बर पर विशेष

  • हिमालय का अनुपम व्याख्यान

    हिमालय का अनुपम व्याख्यान

    श्री अनुपम मिश्र जी कागज़ से लेकर ज़मीन तक पानी की अनुपम इबारतें लिखने वाली शख्सियत थे। उनकी देह के पंचतत्वों में विलीन जाने की तिथि होने के कारण 19 दिसम्बर हम सभी पानी कार्यकर्ताओं तथा लेखकों के लिए खास स्मरण की तिथि है। किंतु अनुपम संबंध में 22 दिसम्बर का भी कोई महत्व है; यह मुझे ज्ञात न था। मैं, श्री अनुपम मिश्र के जन्म की तिथि भी पांच जून को ही जानता था। बाद में पता चला कि पांच जून तो सिर्फ स्कूल में लिखा दी गई तिथि थी। श्री अनुपम मिश्र का जन्म असल में 22 दिसम्बर, 1947 को वर्धा के महिला आश्रम में हुआ था। गांधी स्मृति एवम् दर्शन समिति, नई दिल्ली ने बीते 22 दिसम्बर, 2017 दिन शुक्रवार को ’अनुपम व्याख्यान’ का प्रथम आयोजन कर यह ज्ञान कराया। सोने पर सुहागा यह कि प्रथम अनुपम व्याख्यान का एकल वक्ता खुद हिमालय को बनाया। विषय रखा - ''हिमालय: बदलते हालात में हमारी संवेदना की कसौटी''। हिमालय का प्रतिनिधि बन पधारे श्री चंडीप्रसाद भट्ट जी।

  • रामानुजन मानते थे कि गणित से ही ईश्वर का सही स्वरूप स्पष्ट हो सकता है

    रामानुजन मानते थे कि गणित से ही ईश्वर का सही स्वरूप स्पष्ट हो सकता है

    सिर्फ 32 साल जिए श्रीनिवास रामानुजन की प्रतिभा का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि उनके काम के कई हिस्से दुनिया उनकी मौत के एक सदी बाद आज समझ पा रही है

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