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श्रद्धांजलि
 

  • वरिष्ठ पत्रकार, लेखक अरुण साधु नहीं रहे

    वरिष्ठ पत्रकार, लेखक अरुण साधु नहीं रहे

    जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार व लेखक अरुण साधु का सोमवार यानी आज 25 सितंबर को मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया। वे 76 साल के थे और हृदय संबंधी बीमारी से पीड़ित थे।

  • पीवीआर के प्रसादः काजल की कोठरी में देवदूत!

    पीवीआर के प्रसादः काजल की कोठरी में देवदूत!

    महीनों, सालों बाद यह कॉलम लिख रहा हूं और यदि वजह पीवीआरके प्रसाद के निधन, उनकी स्मृति शेष है तो आप सोच सकते हैं कि मेरे लिए पीवीआरके प्रसाद क्या अर्थ लिए हुए होंगे! पीवीआरके प्रसाद आईएएस अफसर थे।

  • लायी हयात आए,कज़ा ले चली चले

    लायी हयात आए,कज़ा ले चली चले

    क्या आप जानते हैं कि उपन्यासकार, इतिहासकार,राजनीतिक विश्लेषक और भारतीय पत्रकारिता की सबसे बुजुर्ग हस्ती खुशवंत सिंह दुनिया से खुद विदा लेना चाहते थे.

  • राजीव गांधी को शत-शत नमन

    राजीव गांधी को शत-शत नमन

    कुछ लोग ज़मीन पर राज करते हैं और कु्छ लोग दिलों पर। मरहूम राजीव गांधी एक ऐसी शख़्सियत थे, जिन्होंने ज़मीन पर ही नहीं, बल्कि दिलों पर भी हुकूमत की। वह भले ही आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन हमारे दिलों में आज भी ज़िंदा हैं।

  • एक लाख बच्चों की माँ’ भक्ति यादव का निधन

    एक लाख बच्चों की माँ’ भक्ति यादव का निधन

    पद्मश्री डॉक्टर भक्ति यादव का सोमवार सुबह निधन हो गया। वे 92 वर्ष की थीं और इस वर्ष ही उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था। जानकारी के मुताबिक वे लंबे समय से बीमार चल रहीं थी, लेकिन इस दौरान उन्होंने मरीजों को देखना नहीं छोड़ा था।

  • प्रेमचंद : संघर्ष और साहस से बने साहित्य-सम्राट

    प्रेमचंद : संघर्ष और साहस से बने साहित्य-सम्राट

    जलियाँवाला बाग काण्ड ने प्रेमचंद पर अमिट प्रभाव डाला था और ब्रिटिश सरकार के चेहरे को देखते हुए गाँधी जी की जनसभा में आने के बाद सहसा यह मानसिक परिर्वतन हुआ कि अब अपनी रचनाओं को किसी बड़े उद्देश्य के प्रति समर्पित करूँ।

  • गीतों के मसीहा और इन्सानियत की आवाज़

    गीतों के मसीहा और इन्सानियत की आवाज़

    जब मोहम्मद रफी साहब हम सब को छोड़ कर बहुत कम उम्र में चले गये तो लगता था हम और हमारा संगीत तन्हा हो गये हैं।

  • वैज्ञानिक सोच के लोकतंत्र’ के प्रतिष्ठापक थे प्रोफ़ेसर यशपालःडॉ. चन्द्रकुमार जैन

    वैज्ञानिक सोच के लोकतंत्र’ के प्रतिष्ठापक थे प्रोफ़ेसर यशपालःडॉ. चन्द्रकुमार जैन

    राजनांदगांव। प्रख्यात शिक्षाविद और धुरंधर वैज्ञानिक प्रोफ़ेसर यशपाल सही अर्थ में भारतीय वैज्ञानिक सोच के टर्निंग प्वाइंट थे। बहुविषयक चिंतन से जुड़े दिग्विजय कालेज के हिंदी विभाग के प्राध्यापक डॉ.चंद्रकुमार जैन ने उनके अवसान को एक युग का अंत मात्र नहीं, आने वाले युगों की भी एक अपूरणीय क्षति निरूपित किया है।

  • देश के करोडों युवाओं को नई दिशा देने वाले डॉ. कलाम

    देश के करोडों युवाओं को नई दिशा देने वाले डॉ. कलाम

    भारत माँ के सपूत, मिसाइल मैन, राष्ट्र पुरुष, राष्ट्र मार्गदर्शक, महान वैज्ञानिक, महान दार्शनिक, सच्चे देशभक्त ना जाने कितनी उपाधियों से पुकार जाता था भारत रत्न डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम जी को वो सही मायने में भारत रत्न थे।

  • आतंकी हमले में मारे गए यात्रियों को श्रध्दांजलि

    आतंकी हमले में मारे गए यात्रियों को श्रध्दांजलि

    मुंबई। 11 वर्ष पूर्व, 11 जुलाई, 2006 को आतंकवादियों द्वारा किये गये कायरतापूर्ण कार्य के फलस्वरूप मुंबई की सात उपनगरीय ट्रेनों के प्रथम श्रेणी डिब्बों में पश्चिम रेलवे के माटुंगा रोड, माहिम जं, बांद्रा, सांताक्रुज, जोगेश्वरी, बोरीवली तथा भायंदर स्टेशनों पर बम धमाके हुए थे।

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