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श्रद्धांजलि
 

  • माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक अभिजीत बाजपेई का निधन

    माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक अभिजीत बाजपेई का निधन

    माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक अभिजीत बाजपेई का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया| वे 45 साल के थे और पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे|

  • शुभ्रा मुखर्जी का यूं चुपचाप चले जाना…!

    शुभ्रा मुखर्जी का यूं चुपचाप चले जाना…!

    शुभ्रा मुखर्जी चली गईं। वे देश के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का पत्नी थीं। पर, दो बेटियों और एक बेटे के अलावा अपने जैसे कुछ लोगो के लिए भी वे मां थीं। मां इसलिए, क्योंकि होने को तो वे शर्मिष्ठा मुखर्जी की माताजी थीं।

  • तुम न जाने किस जहां में खो गए…

    अबुल पाकिर जैनुलआबदीन अब्दुल कलाम जिन्हें देश डा० एपीजे अब्दुल कलाम के नाम से जानता था की आकस्मिक मृत्यु ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। महात्मा गांधी से लेकर राजीव गांधी तक देश के महान से महानतम नेताओं तक का विछोह हमारे देश ने देखा है। ऐसे कई नेताओं की मौत पर समूचे […]

  • ऐसे थे चाचा कलाम, छात्रों को खुद दी थी अपनी ईमेल आइडी…!!

    साधारण डाक और इंटरनेट में एक बड़ा फर्क यही है कि डाक से आई चिट्ठियों की प्राप्ति स्वीकृति या आभार व्यक्त करने के लिए भी आपको खत लिखना और उसे डाक के बक्से में डालना पड़ता है। लेकिन इंटरनेट से मिलने वाले संदेशों  में इसका जवाब देने या अग्रसारित करने की सुविधा है। जिसके जरिए […]

  • डॉ. कलाम के वो अंतिम क्षण, उनके सहयोगी की जुबानी

    पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने जिस वक्त आखिरी सांस ली थी, उस वक्त उनके करीबी सहयोगी सृजन पाल सिंह वहीं थे। उन्होंने अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर डॉक्टर कलाम के आखिरी पलों का जिक्र किया है। हम सृजन पाल सिंह की फेसबुक पोस्ट से उन पलों की कहानी आपके सामने रख रहे हैं: "हम […]

  • ऐसा था डॉ. कलाम का बचपनः जब दो रोटी खाने पर बड़े भाई ने डाँट लगाई

    सादगी की प्रतिमूर्ति रहे कलाम अपनी मां को ही अपना प्रेरणा स्रोत मानते थे। मां के प्रति असीम स्नेह का उन्होंने अपनी किताब 'अदम्य साहस' में भी वर्णन किया है। किताब में उन्होंने अपने बचपन और उनके प्रति मां के विशेष दुलार से जुड़े कई किस्सों का जिक्र किया है। बाद में अपनी मां के […]

  • हे अमर बलिदानी तुझे शत शत प्रणाम

    हिंदुस्तान को फ़िरंगियों की ग़ुलामी से आज़ाद कराने के लिए इस धरती के सपूतों ने अपनी जान तक कुर्बान कर दी, लेकिन यह हमारे देश की बदक़िस्मती ही है कि राजनेताओं ने इस आज़ादी को केवल सत्ता हासिल करने का ज़रिया ही समझा. देश की अधिकांश आबादी आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही […]

  • पाकिस्तानी फिल्म में काम करने वाली पहली भारतीय अभिेनेत्री का महू मे निधन

    इंदौर. पचास के दशक में पाकिस्तान के सिंध में जन्मी और शिमला में पली-बढ़ी एक खूबसूरत लड़की मुंबई आई और देखते ही देखते अपने दौर के सबसे खूबसूरत चेहरों में शुमार हो गई। नाम था शीला रमानी। उनका महू में बुधवार को निधन हो गया। वे पिछले कुछ सालों से महू में ही रह रही […]

  • अक्षय नहीं रहा: खबरों में जिन्दगी जीने के जुनून में डोर टूटी या तोड़ी गई?

    अगर स्टेट ही टैरर में बदल जाये तो आप क्या करेंगे। मुश्किल तो यही है कि समूची सत्ता खुद के लिये और सत्ता के लिये तमाम संस्थान काम करने लगे तब आप क्या करेंगे। तो फिर आप जिस तरह स्क्रीन पर तीन दर्जन लोगों के नाम, मौत की तारीख और मौत की वजह से लेकर […]

  • अफ़सोस है ये खबर हिन्दी अखबारों और चैनलों पर गुम हो गई

    ‘बेशक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कूटनीतिक स्तर पर हिंदी कुछ आगे बढ़ी है, लेकिन हिंदी को उसका उचित स्थान दिलाने का सपना अब भी अधूरा है।’ हिंदी दैनिक अखबार हिन्दुस्तान में छपे अपने आलेख के जरिए ये कहा उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के प्रोफेसर गोविंद सिंह का। उनका पूरा आलेख आप यहां पढ़ सकते […]

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