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श्रद्धांजलि
 

  • विनोद खन्ना के स्टार होने का मतलब

    विनोद खन्ना के स्टार होने का मतलब

    विनोद खन्ना स्टार थे। वे सुपरस्टार कभी माने नहीं गए, लेकिन हमारे सिनेमा के संसार के इतने बड़े सुपरस्टार रहे हैं, उनमें सभी को चमकाने में उनकी सबसे बड़ी मदद लगती थी। विनोद खन्ना ऐसे एक स्टार रहे,

  • स्व. किशोरी अमोणकर की यादों में लिपटी सुरमयी श्रध्दांजलि

    स्व. किशोरी अमोणकर की यादों में लिपटी सुरमयी श्रध्दांजलि

    मुंबई की चौपाल एक ऐसा अद्भुत मंच है जहाँ हर महीने सुधी श्रोता एक नए संस्कार से रससिक्त होते हैं। इस बार चौपाल में महान शास्त्रीय गायिका स्व. किशोरी अमोणकर को उनकी यादों के साथ संगीतमयी श्रध्दांजलि दी गई। स्व. किशोरी ताई की पटु शिष्या सुश्री देवकी पंडित ने ने जब किशोरी जी

  • स्व.  रमेश अग्रवाल : सड़क पर हुई मुलाकात और फिर संघर्ष में साथ के दो दशक

    स्व. रमेश अग्रवाल : सड़क पर हुई मुलाकात और फिर संघर्ष में साथ के दो दशक

    रमेश अग्रवालजी ने कोई आठ साल पहले अपने बारे में और अपनी उपलब्धियों को लेकर कहा था :” आज जो भी सफलता मेरे पास है उसमें अपने स्वाभाव की तीन बातों को मैं सामने रखता हूं– सहज-सरल रहना’ स्वयं का लो –प्रोफाइल प्रेजेंटेशन और काम के प्रति जुनून”। रमेशजी की शायद ये ही खूबियां थी

  • दैनिक भास्कर समुूह के अध्यक्ष श्री रमेश अग्रवाल का निधन

    दैनिक भास्कर समुूह के अध्यक्ष श्री रमेश अग्रवाल का निधन

    दैनिक भास्कर समूह के चेयरमैन रमेश चंद्र अग्रवाल का बुधवार को निधन हो गया है। सुबह अहमदाबाद एयरपोर्ट पर उन्होंने सीने में दर्द की शिकायत की थी, जिसके कुछ समय बाद वे गिर पड़े और तत्काल उन्हें अहमदाबाद के अपोलो अस्पताल ले जाया गया, जहां हार्टअटैक से उनका निधन हो गया। वे 77

  • किशोरी अमोनकर के शास्त्रीय संगीत में भारतीय संस्कृति की आत्मा बसती थी

    किशोरी अमोनकर के शास्त्रीय संगीत में भारतीय संस्कृति की आत्मा बसती थी

    किशोरी अमोनकर एक भारतीय शास्त्रीय गायक थीं। जिन्होंने अपने शास्त्रीय संगीत के बल पर दशकों तक हिन्दुस्तान के संगीत प्रेमियों के दिल में अपनी जगह बनाये रखी। किशोरी अमोनकर का जन्म 10 अप्रैल 1932 को मुंबई में हुआ था। किशोरी अमोनकर को हिंदुस्तानी परंपरा के अग्रणी गायकों में से एक माना जाता है।

  • 109वीं जयन्ती के अवसर पर पण्डित मोहन प्यारे द्विवेदी को श्रद्धान्जलि

    109वीं जयन्ती के अवसर पर पण्डित मोहन प्यारे द्विवेदी को श्रद्धान्जलि

    पंडित मोहन प्यारे द्विवेदी ’’मोहन’’ का जन्म संवत 1966 विक्रमी तदनुसार 01 अप्रैल 1909 ई. में उत्तर प्रदेश के बस्ती जिला के हर्रैया तहसील के कप्तानगंज विकास खण्ड के दुबौली दूबे नामक गांव मे एक कुलीन परिवार में हुआ था। इनके पिता जी का नाम पंडित रामनाथ तथा पितामह का नाम पण्डित देवी पल्ट था। पंडित जी का ननिहाल कप्तानगंज के निकट स्थित राजाजोत गांव में था। उनका बचपन वहुत ही कष्ट के साथ बीता था। उनके ननिहाल के लोगों ने अपने पास रखकर पंडित जी को कप्तानगंज के प्राइमरी विद्यालय

  • बलिदानदिवस :  “एक ऐसा पत्रकार जिसके लिए पत्रकारिता सदैव एक मिशन रहा

    बलिदानदिवस : “एक ऐसा पत्रकार जिसके लिए पत्रकारिता सदैव एक मिशन रहा

    25 मार्च के ही दिन गणेश शंकर विद्यार्थी जैसे महान शख्सियत ने देश की अखण्डता को बनाये रखने के लिए अपना बलिदान दिया था । आज वो हमारे बीच नही हैं पर उनके बताये गए आदर्श व् सिद्धांत जरूर आज भी हमें मजबूती प्रदान करते हैं । गणेश शंकर विद्यार्थी भारतीय पत्रकारिता के पितामह हैं ।

  • गौरक्षक समाजसेवी पत्रकार अशोक लुनिया नही रहे

    गौरक्षक समाजसेवी पत्रकार अशोक लुनिया नही रहे

    ज्जैन। गत दो दशको से गौरक्षा की लड़ाई लड़ने वाले समाजसेवी वरिष्ठ पत्रकार सच्चा दोस्त मीडिया समूह के स्वामी श्री अशोक लुनिया नही रहे. उज्जैन CHL अपोलो अस्पताल में दिनांक 16 मार्च को हार्ट फ़ैल होने के कारण श्री अशोक लुनिया का देहांत हो गया. उनके पुत्र विनायक लुनिया ने किया ने स्वर्गीय लुनिया को मुखाग्नि दी व अंतिम संस्कार किया।

  • देह के बाद अनुपम

    देह के बाद अनुपम

    जब देह थी, तब अनुपम नहीं; अब देह नहीं, पर अनुपम हैं। आप इसे मेरा निकटदृष्टि दोष कहें या दूरदृष्टि दोष; जब तक अनुपम जी की देह थी, तब तक मैं उनमें अन्य कुछ अनुपम न देख सका, सिवाय नये मुहावरे गढ़ने वाली उनकी शब्दावली, गूढ से गूढ़ विषय को कहानी की तरह पेश करने की उनकी महारत और चीजों को सहेजकर सुरुचिपूर्ण ढंग से रखने की उनकी कला के।

  • फिराक़ गोरखपुरीः   तू एक था मेरे अशआर में हज़ार हुआ

    फिराक़ गोरखपुरीः तू एक था मेरे अशआर में हज़ार हुआ

    फ़िराक़ गोरखपुरी बीसवीं सदी के वह शायर हैं, जो जंगे-आज़ादी से लेकर प्रगतिशील आंदोलन तक से जुडे रहे. उनकी ज़ाती ज़िंदगी बेहद कड़वाहटों से भरी हुई थी, इसके बावजूद उन्होंने अपने कलाम को इश्क़ के रंगों से सजाया. वह कहते हैं

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