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सोशल मीडिया से
 

  • इसको ही तो प्यारे छप्पन इंची सीना कहते हैं

    इसको ही तो प्यारे छप्पन इंची सीना कहते हैं

    जिसकी आँखों में भारत की उन्नति का उजियारा है, जिसकी गलबहियां करने को व्याकुल भी जग सारा है,

  • सिक्ख भाईयों पर व्यंग करने से पहले जरा सोचें उनके त्याग और योगदान के बारे में

    दोस्तों ! कुछ नादान लोग सिक्ख भाइयों को अपनी ओर से शायद व्यंग करते हुए कहते हैं कि सरदारजी बारह बज गए। वे शायद नहीं जानते कि बारह बजे क्या होता था ?? शायद मेरे सभी सिक्ख भाई भी पूरी जानकारी नहीं रखते हैं। उन सभी लोगों के लिए वास्तविक जानकारी प्रस्तुत है जो इसका मतलब नहीं जानते हैं। इतिहास गवाह है कि सिक्खों ने असहाय और कमजोरों की मदद के लिए कभी भी अपनी जान की परवाह नहीं की।

  • बचपन का ये दौर याद कीजिए

    सबसे ज़्यादा फेमस और हमारे दिल के सबसे नज़दीक. एक बार में 15 बार बोल के दिखाओ तो वीर जानें. 1. कच्चा पापड़, पक्का पापड़ चैलेंज है कि 20 बार बिना रुके बोल कर दिखाओ

  • एक सांसद. क्रिकेटर और सैनिक का फर्क देखिये

    जहां डेढ लाख सैलरी हर महीना पाने वाले सांसदो की सैलरी आयकर नहीं देना पड़ता... और 24 घंटे मौत की छांव मे रहने वाले सिपाही को बीस हजार की तनख्वाह पर भी आयकर देना पडता है.... सांसदो को परिवार के साथ रहते हुए भी हर साल पचास हजार फोन काल फ्री घर से हजारो किमी. दूर बैठे सैनिक को एक काल भी फ्री नहीं

  • गोविंदाचार्य ने गूगल के सीईओ पर दागे तीखे सवाल

    गोविंदाचार्य ने गूगल के सीईओ पर दागे तीखे सवाल

    गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई भारत में अपने दो दिवसीय दौरे पर हैं। देश के रेल्वे स्टेशनों पर वाई फाई मुहैया करवाने और राजधानी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में छात्रों से मुलाकात के बीच एक वक्त भाजपा के 'थिंक टैंक' कहे जाने वाले गोविंदाचार्य ने सुंदर से कुछ सवालों के जवाब मांगे हैं।

  • पूरे देश में के ब्राह्मणों का लेखा जोखा

    पूरे देश में के ब्राह्मणों का लेखा जोखा

    ब्राह्मण साम्राज्य की टीम ने 2 महीने की मेहनत कर भारत के समस्त राज्यों से ब्राह्मण जनसंख्या की ये सूची तैयार की है।

  • दिल्ली हिन्दुस्तान मे है कि पाकिस्तान में

    जब आप भारत की राजधानी दिल्ली में अगर कभी घूमने आएँ तब आपको पता चलेगा कि आप "शाहजहां" रोड़ से निकलकर "अकबर" रोड़ पर पहुँच जायेंगे |

  • मैं एक मुस्लिम महिला हूँ, भारत में मुझे जो सम्मान और प्यार मिला वह दुनिया में कहीं नहीं मिला

    मैं एक मुस्लिम महिला हूँ, भारत में मुझे जो सम्मान और प्यार मिला वह दुनिया में कहीं नहीं मिला

    मैं एक मुसलमान महिला और पेशे से डॉक्टर हूं। बेंगलुरू में मेरा एक ‘हाई एण्ड लेजर स्किन क्लिनिक’ है। मेरा परिवार कुवैत में रहता है। मैं भी कुवैत में पली-बढ़ी हूं, लेकिन 18 वर्ष की उम्र में डॉक्टरी की पढ़ाई करने के लिए मैं भारत लौट आई थी। पढ़ाई खत्म होने के बाद जहां मेरे ज्यादातर साथी अच्छे भविष्य के सपने के साथ बाहर चले गए, मैंने भारत में ही रहने का निश्चय किया। आज तक मैंने एक बार भी कभी यह महसूस नहीं किया कि एक मुसलमान होने के कारण हमें कोई दिक्कत हुई हो।

  • जाने कहाँ गए सहिष्णुता के वो दिन!

    सच में क्या गजब की सहिष्णुता थी, जाने कहाँ गए वो दिन? ये नरेंद्र मोदी अच्छे दिन का बोलकर कहाँ लेकर आ गए.!!

  • ऐसे थे प्रभाष जोशी

    ऐसे थे प्रभाष जोशी

    साल 1994 के गहमा-गहमी वाले दिन थे और यूपी में तब सपा-बसपा की मिली-जुली सरकार थी। उस समय वहां पर एक गैर-आईएएस नौकरशाह शशांक शेखर सिंह की तूती बोला करती थी। सुना जाता था कि वे अखबारों को निर्देश देते कि अमुक खबर नहीं जाएगी तो सपा-बसपा सरकार से डरे-सहमे अखबार वाले मशीन पर चल रहा अखबार रुकवाते और खबर रोक लेते।

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