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अध्यात्म गंगा
 

  • …और छज्जू भाटिया  वहीं ध्यान करने बैठ गए

    …और छज्जू भाटिया वहीं ध्यान करने बैठ गए

    महाराजा रणजीत सिंह ने अपने शासन काल में यहां पर यात्रियों के लिए नए कमरे, तालाब और सुंदर बागीचे बनवाकर उसकी शोभा में चार चांद लगा दिए।

  • श्री-सम्प्रदाय के आचार्य  विश्वक्सेन

    श्री-सम्प्रदाय के आचार्य विश्वक्सेन

    विश्वसेना को संस्कृत में व्वक्सेन कहा जाता है। विश्वसेना , जिसे सेनाई मुदलवार (सेना मुदलियार) और सेनाधिपति ( सेना-प्रमुख ) के नाम से भी जाना जाता है।

  • ‘आंख-मूसली, ओखल-काम, देते ये संकेत ललाम’

    तरकस बांधे तरकस बन्द, राजा भोज हैं पूनम के चन्द।।' सुनकर राजा भोज एकदम रुष्ट होकर बोल पड़े। आपकी तीन पंक्तियां तो ठीक है, किन्तु चौथी पंक्ति का मेल तीन पंक्तियों से नहीं बैठता।

  • वेद और शूद्र ः भ्रम जो फैलाए गए

    वेद और शूद्र ः भ्रम जो फैलाए गए

    वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था प्रधान थी जिसके अनुसार जैसा जिसका गुण वैसे उसके कर्म, जैसे जिसके कर्म वैसा उसका वर्ण। जातिवाद रूपी विष वृक्ष के कारण हमारे समाज को कितने अभिशाप झेलने पड़े।

  • ऋषि दयानन्द की दृष्टि में शिक्षक/अध्यापक/आचार्य की योग्यता व गुण

    ऋषि दयानन्द की दृष्टि में शिक्षक/अध्यापक/आचार्य की योग्यता व गुण

    -जो श्रेष्ठ आचार को ग्रहण कराके सब विद्याओं को पढ़ा देवे, उसको आचार्य कहते हैं। - आर्योद्देश्यरत्नमाला। -जो सांगोपांग वेद विद्याओं का अध्यापक, सत्याचार का ग्रहण और मिथ्याचार का त्याग करावे वह आचार्य कहता है। - स्वमन्तन्यामन्तव्यप्रकाश।

  • योग का मूल भी वेद ही है

    योग का मूल भी वेद ही है

    प्रायः हर विदेशी लेखक संस्कृत से अनभिज्ञ होता है, इसलिए वह विदेशी अन्य लेखकों द्वारा अंग्रेजी में लिखित पुस्तकों पर निर्भर होता है। इन पुस्तकों के अधकचरे विवरण प्रायः सत्य से दूर होते हैं और खास करके आज के नवबौद्ध इनके बहुत ढोल पीटते हैं।

  • क्या वेद-मन्त्र अधूरे हैं?

    क्या वेद-मन्त्र अधूरे हैं?

    वेद-मन्त्रों को लेकर यह आक्षेप प्रायः पौराणिकों एवं मुल्लों द्वारा किया जाता है कि किसी भी वेद-मन्त्र के शुरुआत में 'ओ३म्' नहीं लगा होता है, इस कारण सभी मन्त्र अधूरे हैं।

  • शिव पुराण की पार्वती से रामायण की सीता तक का पतिव्रत धर्म की विवेचना

    शिव पार्वती विवाह के उपरान्त ब्रह्मा जी कहते हैं- नारद ! तदनन्तर सप्तर्षियों ने हिमालय से कहा-‘गिरिराज ! अब आप अपनी पुत्री पार्वती देवी की यात्रा का उचित प्रबन्ध करें।’ मुनीश्वर! यह सुनकर पार्वती के भावी विरह का अनुभव करके गिरिराज कुछ काल तक अधिक प्रेम के कारण विषाद में डूबे रह गये।

  • वेद और देवः भ्रांतियाँ और समाधान

    वेद और देवः भ्रांतियाँ और समाधान

    जेनयू की वाईस चांसलर ने बयान दिया है डॉ अम्बेडकर स्मृति व्याख्यान माला में कहा कि कोई भी देवता ब्राह्मण नहीं थे और शिवजी शूद्र थे। यह तथ्यों के विपरीत बयान एक उच्च पद पर बैठे हुए व्यक्ति द्वारा दिया है। ऐसे विषयों पर केवल विद्वान् लोगों को अपनी प्रतिक्रिया देनी चाहिए। वेद और देव विषय पर इस लेख में वैदिक पक्ष को प्रस्तुत किया गया है।

  • क्या श्रीमद्भागवत महापुराण में ‘राधा’ की चर्चा है?

    आज पौराणिक श्रीकृष्ण के साथ राधा का नाम अवश्य जोड़ते हैं। ‘राधा’ के बिना ‘कृष्ण’ का नाम आधा ही समझा जाता है। यदि श्रीकृष्ण जी योगीराज थे और ‘राधा’ उनकी धर्मपत्नी नहीं थी तो ऐसा पौराणिक क्यों करते हैं? मेरे विचार से पौराणिकों की यह भयंकर भूल है। ‘श्रीमद् भागवत महापुराण’ वैष्णवों का एक प्रामाणिक […]

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