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अध्यात्म गंगा
 

  • भारत के इतिहास में राम की वंश परंपरा

    भारत के इतिहास में राम की वंश परंपरा

    लक्ष्मण के दो पुत्र अंगद और चन्द्रकेतु हुये । ये दोनों अंगद नगर और चंद्रावती के स्वामी हुये । शत्रुघ्न के दोनों पुत्रों में सुबाहु को मथुरा तथा शत्रुघाती को विदिशा के राज्य विरासत में मिले ।

  • राम बिना अन्तर्मन सूना

    राम बिना अन्तर्मन सूना

    जाने अनजाने कितने जुड़े हुये हैं हम राम नाम से ,कितना रच बस गया है यह राम नाम हमारे अन्तर्मन की गहनतम गहराइयों ।

  • ‘नरसीजी रो माहेरा’ और उसका साँवरा सेठ

    ‘नरसीजी रो माहेरा’ और उसका साँवरा सेठ

    श्रीरंग ने कहा कि आप अशरण के शरण और भक्तों के रक्षक हैं. कृष्ण ने कहा, आप द्वारिका पधारें, वहाँ भी आपका घर है.

  • विद्वान और विद्यावान में अन्तर

    विद्वान और विद्यावान में अन्तर

    विद्वान व विद्यावान में अंतर समझना हो तो हनुमान जी व रावण के चरित्र के अंतर को समझना पडे़गा* | आइए शुरू करते हैं श्री हनुमान चालीसा से | तुलसी दास जी ने हनुमान को विद्यावान कहा , विद्वान नहीं|

  • मोह का अर्थ क्या होता है?

    मोह का अर्थ क्या होता है?

    मोह का अर्थ होता है मेरा, ममत्व; जो मुझे मिल गया है, वह छूट न जाए। लोभ का क्या अर्थ होता है? लोभ का अर्थ होता है. जो मुझे अभी नहीं मिला है, वह मिले। और मोह का अर्थ होता है. जो मुझे मिल गया है, वह मेरे पास टिके। ये दोनों एक ही पक्षी के दो पंख हैं। उस पक्षी का नाम है तृष्णा, वासना, कामना।

  • कुंड़ली में राहु की दशा हो तो क्या करें

    कुंड़ली में राहु की दशा हो तो क्या करें

    राहु ध्यान को खींचने को वाला एक ग्रह है। राहु के पास सिर है, आंखे हैं, दिमाग है परन्तु राहु के पास दिल नहीं है। राहु के पास खुद की दृष्टि नहीं है। राहु पर जिसकी दृष्टि पड़ती है या युति होती है तो उसे उस ग्रह की दृष्टि मिल जाती है। गले के नीचे को भाग न होने की वजह से कुछ नहीं है, भूख नहीं है।

  • जन्म कुंडली में  शनि की चालें कैसे आपका जीवन बदल सकती है

    जन्म कुंडली में शनि की चालें कैसे आपका जीवन बदल सकती है

    जन्म कुंडली के बारह भावों मे जन्म के समय शनि अपनी गति और जातक को दिये जाने वाले फ़लों के प्रति भावानुसार जातक के जीवन के अन्दर क्या उतार और चढाव मिलेंगे, सबका वृतांत कह देता है।

  • शिव और कालरात्रि

    भगवान शिव भारतीय संस्कृति को दर्शन ज्ञान के द्वारा संजीवनी प्रदान करने वाले देव हैं। इसी कारण अनादिकाल से भारतीय धर्म साधना में निराकार होते हुए भी शिवलिंग के रूप में साकार मूर्ति की पूजा होती हैं, तो उनके पूर्ण रूप को महेश कहते है जिसका अर्थ होता है ‘महान इश’।

  • रूद्र से शिव तक की यात्रा : एक विमर्श

    बारह मास में से सिर्फ दो मास ही पूर्ण रूपेण देव को समर्पित है।पहला श्रावण शिव को और दूसरा कार्तिक विष्णु को । अन्य किसी भी देवता को कोई माह नहीं दिया गया। इन के आलावा बस "अधिक मास" श्री कृष्ण को समर्पित है और "पुरुषोत्तम" मास के नाम से प्रसिद्ध है।

  • शिव हैं शाश्वत का प्रतीक

    शिव हैं शाश्वत का प्रतीक

    शिव को अपनी प्रिया देवी के साथ देखो। वे दो नहीं मालूम होते, एक ही हैं। यह एकता इतनी गहरी है कि प्रतीक बन गई है। ध्यान की पहली विधि शिव प्रेम से शुरू करते हैं: प्रिय देवी, प्रेम किए जाने के क्षण में प्रेम में ऐसे प्रवेश करो जैसे कि वह नित्य जीवन हो।

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