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अध्यात्म गंगा
 

  • क्षमा  का भाव जागते ही पूरा परिवार एक हो गया

    क्षमा का भाव जागते ही पूरा परिवार एक हो गया

    साधक ने दामाद से रूपये लिये और अपनी इच्छानुसार बेटी व नातियों में बाँट दिये । सब कार में बैठे, घर पहुँचे। पन्द्रह वर्ष बाद उस अर्धरात्रि में जब माँ-बेटी, भाई-बहन, ननद-भाभी व बालकों का मिलन हुआ तो ऐसा लग रहा था

  • ओ३म् का जाप आपको कितनी ही ऊर्जाओँ से भर देता है

    ओ३म् का जाप आपको कितनी ही ऊर्जाओँ से भर देता है

    कठोपनिषद में आगे कहा है-ओ३म् अनित्यों में एक नित्य है।अनेकों में वही एक है।श्रेष्ठ कामनाओं का वही एक पूरक है।जो धीर पुरुष इस ओ३म् को अपनी आत्मा में देखते हैं केवल उन्हें ही परम शान्ति प्राप्त होती है,अन्यों को नहीं ।।५/१३ ।।

  • रामायण में सीता की अग्निपरीक्षा

    रामायण में सीता की अग्निपरीक्षा

    इसी पुस्तक में रामायण के प्रक्षिप्त (मिलावट) होने (विशेष रूप से उत्तर कांड) का वर्णन अन्य लेख में किया गया है। उस आधार पर सीता की अग्निपरीक्षा का प्रसंग प्रक्षिप्त होने के कारण अस्वीकार्य है।

  • जनक अष्टावक्र संवाद

    जनक अष्टावक्र संवाद

    तब बंदी बोला, “हे महाराज! मैं वरुण का पुत्र हूँ और मैंने सारे हारे हुये ब्राह्मणों को अपने पिता के पास भेज दिया है। मैं अभी उन सबको आपके समक्ष उपस्थित करता हूँ। “

  • हमारी सनातन संस्कृति और वेदों में गाय का महत्त्व

    हमारी सनातन संस्कृति और वेदों में गाय का महत्त्व

    "जिन्होंने पिता बनकर हमें गो-धन प्राप्त कराया, जिन्होंने वर्ष भर निरन्तर संघर्ष करके अपने सत्य के अस्त्र से पाप अन्याय-अत्याचार के वलासुर को छिन्न-भिन्न कर दिया,

  • स्वस्तिक चिह्न ( ओम् का प्राचीनतम रूप )

    स्वस्तिक चिह्न ( ओम् का प्राचीनतम रूप )

    उपर्युक्त संक्षिप्त वर्णन से यह सुतरां सिद्ध है कि स्वस्तिकरूपी ओम् का चिह्न विश्व के विस्तृत क्षेत्र में प्रचलित रहा है , और भारत में तो आज भी सर्वत्र इसका प्रयोग हो रहा है , परन्तु आजकल इसके लिखने और प्रयोग करनेवाले इस रहस्य से सर्वथा ही अनभिज्ञ हैं कि यह चिह्न कभी ओम् का प्राचीनतम रूप रहा है ।

  • राष्ट्र की सेवा ही ईश्वर की सेवा है

    राष्ट्र की सेवा ही ईश्वर की सेवा है

    हम इजराइल जैसे छोटे से देश से सीख सकते हैं, जिसकी आबादी केवल 85 लाख है लेकिन वह दुश्मनों से घिरा हुआ है। प्रत्येक इजरायली नागरिक के लिए राष्ट्र से बड़ा कुछ भी नहीं है, और जब देश पर हमला होता है,

  • हिंदू देह है और हिंदुत्व उसकी आत्मा

    हिंदू देह है और हिंदुत्व उसकी आत्मा

    स्वतंत्र भारत में सत्ता मिलते ही जिन्होंने गंगा को सांस्कृतिक विरासत के स्थान पर भौतिक समृद्धि का प्राकृतिक संसाधन मात्र माना और तथाकथित विकास के नाम पर पवित्र गंगा जल प्रदूषित कर विषाक्त बना दिया।

  • भारतीय परम्परा में कन्यादान का वास्तविक स्वरुप

    भारतीय परम्परा में कन्यादान का वास्तविक स्वरुप

    पहले मंत्र में वधु के गुणों का वर्णन है। वधु कुलवधू भगं अर्थात आतंरिक एवं वाह्य सौंदर्य से परिपूर्ण एवं वर्च: अर्थात तेजस्विता से युक्त हो।

  • गीता का वो अद्भुत रहस्य जो आज तक किसी ने नहीं बताया

    गीता का वो अद्भुत रहस्य जो आज तक किसी ने नहीं बताया

    यह जो अर्जुन को दिखाई पड़ा विराट, अप्रमेय, जिसकी बुद्धि कभी कोई कल्पना भी नहीं कर सकती थी, अनुमान भी नहीं कर सकती थी, सोच भी नहीं सकती थी, जिसकी तरफ कोई उपाय न था, वह उसे दिखाई पड़ा है।

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