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जीवन में चरित्र रीढ़ की हड्डी –प्रो. त्रिपाठी

महू (इंदौर) । ‘जीवन में चरित्र रीढ़ की हड्डी है’ । यह बात गुरु-शिष्य परम्परा श्रृंखला के अंतर्गत स्कूल ऑफ वेद के प्रोफेसर निलिम्प त्रिपाठी आयोजित वेबीनार में कही। इस वेबीनार का आयोजन बी.आर. अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय, भारतीय शिक्षण मंडल, मालवा प्रांत एवं वेलवेदर इंटरनेशनल स्कूल द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था। प्रोफेसर त्रिपाठी ने कहा कि भारत में गुरु-शिष्य परम्परा आदिकाल से चली आ रही है और यह हमारी संस्कृति की बुनियाद है। गुरु को ईश्वर से भी ऊंचा स्थान दिया गया है ।

प्रोफेसर त्रिपाठी ने कहा कि समाज विज्ञान के इस विश्वविद्यालय का प्रयास अपने आपमें अनूठा है। समाज मनुष्य के लिए है और समाज विज्ञान मनुष्य के व्यवहार की पड़ताल करता है। कुलपति प्रो. आशा शुक्ला के मार्गदर्शन में लगातार हो रहे श्रेष्ठ आयोजनों की श्रृंखला में यह उत्तम आयोजन है। उन्होंने कहा कि मेरी जानकारी में संभवत: यह एकमात्र विश्वविद्यालय है जो सम-सामायिक विषयों के साथ हमें भारतीयता की ओर ले जाता है। उन्होंने श्रेष्ठ आयोजन के लिए कुलपति के साथ पूरे विश्वविद्यालय को अपनी शुभकामनाएं दी। वेबीनार में सहआयोजक भारतीय शिक्षण मंडल से एडव्होकेट नरेश मिश्रा जी एवं वेलवेदर इंटरनेशल स्कूल के संचालक श्री मुकेश पाटीदार भी उपस्थित थे।

कार्यक्रम की अध्यक्ष एवं कुलपति प्रो. आशा शुक्ला ने कहा कि गोधूली बेला में आयोजित यह संभाषण अपने आप में अद्भुत शांति और ज्ञान के दरवाजे खोलता है। उन्होंने कहा कि जब ज्ञान संस्कृति से उपजा हो तो अद्भुत भाव उत्पन्न होता है। उन्होंने इस अवसर पर विश्वविद्यालय की गतिविधियों से परिचय कराया। अतिथि व्याख्यान के पश्चात परम्परा अनुसार प्रत्येक शनिवार को किये जाने वाले महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया गया जिसका उद्देश्य एक पृथ्वी एक स्वास्थ्य है। वेबीनार का संयोजन डॉ. मनोज गुप्ता, श्री जितेंद्र पटीदार एवं श्री दीपक पाटीदार ने किया । वेबीनार का समन्वय एवं संचालन डॉ. अजय दुबे ने किया। इस वेबीनार को सफल बनाने में रजिस्ट्रार श्री अजय वर्मा तथा विश्वविद्यालय परिवार का सक्रिय सहयोग रहा।

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