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कृषि विकास के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने फिर फहराया परचम

रायपुर। कृषि विकास के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर अपनी श्रेष्ठता साबित की है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर को भारत सरकार द्वारा देश भर में संचालित 650 कृषि विज्ञान केन्द्रों में सर्वश्रेष्ठ कृषि विज्ञान केन्द्र के रूप में सम्मानित किया गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली में आज आयोजित सम्मान समारोह में कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर को पं. दीनदयाल उपाध्याय कृषि विज्ञान प्रोत्साहन पुरस्कार-2017 से सम्मानित किया। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह तथा कृषि मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने राष्ट्रीय स्तर का सम्मान मिलने पर कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर के अधिकारियों-कर्मचारियों तथा किसानों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के. पाटील और कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर के समन्वयक डॉ. बीरबल साहू ने यह पुरस्कार प्राप्त किया। पुरस्कार के रूप में अधोसंरचना विकास हेतु 25 लाख रूपये की राशि तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया है। इस अवसर पर केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री राधामोहन सिंह, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह, मेघालय के मुख्यमंत्री श्री कोनार्ड संगमा, कृषि राज्य मंत्री श्री पुरूषोत्तम रूपाला, श्री गजेन्द्र शेखावत और श्री कृष्णा राज तथा भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के महानिदेशक डॉ. टी. मोहापात्रा भी उपस्थित थे।

भारत सरकार द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर को यह सम्मान पोषण वाटिका, एकीकृत कृषि प्रणाली और कड़कनाथ मुर्गों के उत्पादन जैसे नवाचारों के माध्यम से कांकेर जैसे नक्सल प्रभावित और पिछड़े जिले में किसानों के स्वास्थ्य में सुधार और पोषण सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए दिया गया है। कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर ने पोषण साक्षरता और तकनीकी हस्तांतरण पर अग्रणी रूप से जिले में प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, जलसंचयन और एकीकृत खेती प्रणालियों श्रंृखलाबद्ध कार्य करते हुए किसानों को बड़ा लाभांश दिया है। इसके अतिरिक्त महिला सशक्तिकरण, फसल विविधिकरण, अकाष्ठीय वनोपज जैसे लाख की खेती के प्रसार तथा उच्चगुणवता वाले बीज उत्पादन, जैविक खाद, मशरूम उत्पादन जैसे उत्कृष्ट कार्य भी किए हैं। कृषि विज्ञान केन्द्र, कांकेर जिले के कृषक समूहों के बीच वर्ष 2008 से कार्य कर रहा है तथा कृषक समूहों के बीच अगुआ होने का गौरव प्राप्त कर चुका है। यह केन्द्र मुख्यतः लघु-सीमांत जनजातीय कृषकों के बीच नवीनतम कृषि तकनीक पहुंचाने में अग्रसर है। कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर द्वारा कांकेर जिले के लघु एवं सीमांत किसानों के लिए समन्वित कृषि प्रणाली का मॉडल तैयार किया गया है। इसके अलावा सामूहिक सब्जी उत्पादन एवं विपणन, विशिष्ट कुक्कुट प्रजाति कड़कनाथ मुर्गों के संरक्षण, स्व-रोजगार स्थापित करने के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण, किसानों की सहभागिता से बीज उत्पादन, दलहन और तिलहन फसलों के प्रोत्साहन तथा संस्थागत अभिकरण के क्षेत्र में सराहनीय कार्य किए गए हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत किसानों को प्रेरित कर लगभग 25 एकड़ क्षेत्र में लाख की खेती की जा रही है।

उल्लेखनीय है कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए पिछले पांच वर्षाें में चौथी बार राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। इसके पूर्व इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केन्द्र जगदलपुर को वर्ष 2010 और कृषि विज्ञान केन्द्र दंतेवाड़ा को वर्ष 2015 में सर्वश्रेष्ठ कृषि विज्ञान केन्द्र के रूप में सम्मानित किया जा चुका है। कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर को वर्ष 2012 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा आई.सी.ए.आर. बेस्ट जोनल कृषि विज्ञान केन्द्र, वर्ष 2016 में महिन्द्र समृद्धि, नई दिल्ली द्वारा सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय कृषि विज्ञान केन्द्र, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा अटल राष्ट्रीय कृषि विज्ञान प्रोत्साहन पुरस्कार तथा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की ओर से वर्ष 2015 में राज्य के सर्वश्रेष्ठ कृषि विज्ञान केन्द्र के पुरस्कार से नवाजा जा चुका है।



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