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मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान: छत्तीसगढ़ में कुपोषण और एनीमिया मुक्ति का महायज्ञ

छत्तीसगढ़ को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए 2 अक्टूबर 2019 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी कीे 150वीं जयंती के अवसर पर प्रदेशव्यापी ‘मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान‘ का शुभारंभ किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के बस्तर सहित वनांचल के कुछ ग्राम पंचायतों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सुपोषण अभियान की सफलता को देखते हुए अब इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के अनुसार वर्तमान में छत्तीसगढ़ के पांच वर्ष से कम आयु के 35.6 प्रतिशत बच्चे कुपोषित और 15 से 49 वर्ष की 41.5 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। ये आंकड़े न सिर्फ प्रभावित व्यक्ति के परिवारों के लिए बल्कि प्रदेश के आर्थिक, समाजिक विकास के लिए भी चिंताजनक हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए प्रदेश के मुखिया श्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में कुपोषण मुक्ति को एक महाअभियान के रूप में शुरू करने का निर्णय लिया है।

विश्व का प्रत्येक देश आज कुपोषण के किसी न किसी रूप से प्रभावित हैं। कुपोषण वास्तविक अर्थों में शरीर में आवश्यक पोषक पदार्थों असंतुलन है। इससे प्रभावित व्यक्ति गंभीर बीमारियों के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं और आसानी से कई तरह की बीमारियों के शिकार बन जाते हैं। इससे शारीरिक और बौद्धिक विकास भी रूक सकता है। शिशु,बच्चे तथा महिलाएं इससे सबसे अधिक ग्रसित पाए गए हैं। माताओं और शिशुओं की मृत्यु का एक प्रमुख कारण समुचित पोषण आहार का न मिल पाना पाया गया है। गरीबी, अशिक्षा और अज्ञानता, स्वच्छता की कमी, कम उम्र में विवाह और गर्भधारण, लिंग भेद जैसे कई कारण इसके लिये जिम्मेदार हैं। पूरी दुनिया की एक बड़ी आबादी के स्वास्थ्य और विकास के लिए कुपोषण एक बड़ा खतरा है।

कुपोषण को हराना वर्तमान समय की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। इसी चुनौती को स्वीकार करते हुए प्रत्येक शून्य से 5 वर्ष तक के बच्चों और गर्भवती महिलाओं सहित 15 से 49 आयु वर्ग की महिलाओं को कुपोषण और एनीमिया मुक्त कराने के लिए ‘मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान‘ को एक महायज्ञ के रूप लेकर सफल बनाने का प्रयास किया जाएगा। आगामी 3 वर्षों में प्रदेश केा कुपोषण से मुक्ति दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभागों के समन्वय से जिला स्तर पर कुपोषण मुक्ति के प्रयास किये जाएंगे। अभियान का क्रियान्वयन, अनुश्रवण, मूल्यांकन और अभिलेख संधारण जिला प्रशासन करेगा। इसके लिए जिला स्तर पर कलेक्टर, विकासखण्ड स्तर पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) और ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच की अध्यक्षता में अनुश्रवण एवं मूल्यांकन समिति का गठन किया जाएगा। धमतरी जिले में लइका जतन ठउर और दंतेवाड़ा में कुछ पंचायतों के माध्यम से गर्म पोष्टिक भोजन देने जैसे नवाचार कार्यक्रमों के जरिए इसकी शुरूआत कर दी गई हैं।

सुपोषण अभियान के लिए वजन त्यौहार में लिये गये आंकड़ों के आधार पर शून्य से 5 आयु वर्ग के कुपोषित बच्चों का चिन्हांकन कर लिया गया है। एनीमिया पीड़ित बच्चों और महिलाओं की वास्तविक संख्या की जानकारी के लिए गांवों में ग्राम पंचायतों और शहरों के वार्डों में शिविर लगाया जाएगा। ग्रामवार और नामवार चिन्हांकन की प्रक्रिया जैसे-जैसे पूरी होती जाएगी, चिन्हांकित हितग्राहियों को चरणबद्ध रूप से अभियान में शामिल कर लाभान्वित किया जाएगा। अभियान के तहत कुपोषण प्रभावित बच्चों और महिलाओं को आंगनवाड़ी केन्द्र में दिए जाने वाले पूरक पोषण आहार के अतिरिक्त स्थानीय स्तर पर उपलब्ध और आवश्यकतानुसार पौष्टिक आहार निःशुल्क दिया जाएगा। निःशुल्क काउंसलिंग और परामर्श सेंवाएं देने के साथ नियमित मॉनिटरिंग भी जाएगी जाएंगी। प्रभावितों को आयरन पोलिक एसिड, कृमिनाशक गोली देने की व्यवस्था की जाएगी। जनजागरूकता के लिए सुपोषण रथ, शिविरों और परिचर्चा का आयोजन किया जाएगा।

प्रदेश में कुपोषण दूर करने के लिए पूरक पोषण आहार, महतारी जतन योजना,मुख्यमंत्री अमृत योजना, किशोरी बालिका योजना, पोषण अभियान, मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना और प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना का संचालन किया जा रहा है। इन योजनाओं के तहत प्रदेश के 50 हजार से अधिक आंगनबाड़ियो और मिनी आंगनबाड़ियों में शिशुओं,बच्चों को और गर्भवती महिलाओं और शिशुवती माताओं को पूरक पोषण आहार और रेडी टू ईट की व्यवस्था की गई है। महतारी जतन योजना के तहत गर्भवती माताओं को गर्म भोजन भी दिया जाता है।

कुपोषण एक समाजिक कुरीती है,इसका निदान जन जागरूकता और समाज के प्रत्येक वर्ग के सक्रिय भागीदारी से ही संभव है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल और महिला बाल विकास विभाग की मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया ने भी कुपोषण मुक्ति के लिए जनसहयोग की अपील की है। सरकार के सभी प्रयासों के बावजूद ‘स्वस्थ छत्तीसगढ़‘ की कल्पना को साकार रूप देने के लिए अधिक से अधिक जनप्रतिनिधियों, नागरिकों, स्वयं सेवी संगठनों को अभियान से जुड़ना होगा। इससे हम विकास के चमकते सितारे के रूप में एक ‘नवा छत्तीसगढ़‘ देख पाएंगे।

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