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भारत में चीन के व्यावसायिक अतिक्रमण की जड़ें बहुत गहरी हो चुकी है

इन दिनों चीन लगातार हमारी सीमा पर अपने मांसल जिस्म का प्रदर्शन कर रहा है . इसके मद्देनज़र लोग बाग चीन सेआयातित समान के बहिष्कार के लिए सड़क पर उतरे हुए हैं . उनका कहना है हम चीन से आए हुए सामान का बहिष्कारकरेंगे तो चीन घुटनों पर आ जाएगा लेकिन उनके दिमाग़ में चीनी सामान से आशय दीवाली के पटाखे , रोशनी की लड़ियाँ , होली की पिचकारियाँ, रंग हैं . लेकिन क्या आपको पता है चीनी कम्पनियों की हमारे देश में कितनी ज़बरदस्त घुसपैठ बनचुकी है .

इन दिनों चीन लगातार हमारी सीमा पर अपने मांसल जिस्म का प्रदर्शन कर रहा है . इसके मद्देनज़र लोग बाग चीन सेआयातित समान के बहिष्कार की बात कर रहे हैं . उनका कहना है हम चीन से आए हुए सामान का बहिष्कार करेंगे तो चीनघुटनों पर आ जाएगा लेकिन यह पूरा सच नहीं है . क्या आपको पता है कि चीनी कम्पनियों ने हाल ही के कुछ वर्षों मेंहमारे देश में ज़बरदस्त घुसपैठ बना ली है आपको पता ही नहीं उनका हमारे देश में ही बना सामान हम यूरोपीय समझ करख़रीद रहे हैं . यदि कोई दीर्घक़ालीन नीति पर तत्काल काम शुरू नहीं हुआ तो उनके चंगुल से निकलना मुश्किल होजाएगा.

पिछले वर्षों में सीधे विदेशी निवेश के रूप में चीनी कम्पनियों ने हमारे देश में ज़बरदस्त पैसा लगाया है, उनका बहुत सारातैयार माल चीन से नहीं आता , यहीं बनता है . यही नहीं भारतीय कम्पनियों में उनका निवेश भी भर भर के हो रहा है. मार्चकी तिमाही में एचडीएफसी बैंक ने अपने निवेश डिस्क्लोजर में प्यूपिल बैंक आफ चायना के १.७५ करोड़ शेयर में निवेशदिखाया था , मैंने इस बारे में किसी भी टीवी चैनल पर कोई बहस मुहाबसा होते नहीं सुना.

पहले हम सुनते थे कि चीनी मोबाइल कम्पनियाँ भारत के बाज़ार पर हावी हैं पर अब उनका इलेक्ट्रोनिक और घरेलूउपकरणों के क्षेत्र में भी बड़ा हिस्सा होता जा रहा है . सड़क पर चीनी दामन के आयात के ख़िलाफ़ मोर्चा निकालने वालेभी चीनी कम्पनियों के इन उत्पादों को जम के ख़रीद रहे हैं.

टीसीएल , हेयर और मिदिया समूह न केवल अपने उत्पाद बेच रही हैं वरन वे तोशिबा जैसे ब्रांड भी बना कर बेच रही हैं. यह बाज़ार धीरे धीरे हमारे निम्न मध्यम वर्ग के आर्थिक मुख्य धारा में आने के कारण लगातार बढ़ रहा है इन दिनों फ्रिज , वाशिंग मशीन और टीवी का बाज़ार बहुत बड़ा हो चुका है .

हेयर कम्पनी ने ग्रेटर नायडा में ३००० करोड़ रुपए की लागत से फ्रिज बनाए का कारख़ाना लगा लिया है जहां २० लाखफ्रिज और १० लाख वाशिंग मशीन बनाने का लक्ष्य है . मीदिया समूह केरियर की सहायता से वातनुकूलित उपकरण औरअन्य घरेलू उपकरण बनाने जा रहा है जिसमें वह १३०० करोड़ रुपए लगा रहे हैं .

यही कोई तीन वर्ष पूर्व इस कम्पनी ने पुणे में ८० करोड़ रुपए का निवेश किया था .

इन बड़ी बड़ी राशियों को देख कर चौंकिए नहीं , यह भारतीय उद्योग में चीनी घुसपैठ का पहला और छोटा सा चरण है . डॉनल्ड ट्रम्प ने जो चीनी कम्पनियों के खिलाफ ऐंटी ट्रेड अभियान चलाया था उससे सजग हो कर वे भारत में अपना औरभी बड़ा आधार बनाने जा रही हैं .

मजे की बात यह है कि चीनी कम्पनियाँ देश के कोने कोने में निवेश करने में लगी हुई हैं . आंध्र प्रदेश के श्रीसिटी में दोबहुराष्ट्रीय चीनी कम्पनियों ने अपने प्लांट शुरू करने के काग़ज़ों पर हस्ताक्षर किए हैं . कुछ महीनों पहले इलेक्ट्रॉनिककम्पनियों के एक बीस सदस्यीय चीनी प्रतिनिधि मण्डल ने निर्माण प्रक्रिया के सम्भावना का पता लगने के लिए श्रीसिटीका दौरा किया था . इस औद्योगिक क्षेत्र में १०-१५ चीनी कम्पनियों के समूह ने विशाल निवेश में दिलचस्पी दिखाई थी .

चीन की एक बड़ी कम्पनी शाओमी भारतीय बाज़ार पर ज़बरदस्त पकड़ बना चुकी है केवल पाँच वर्ष पहले यह कम्पनीमोबाइल फोन के साथ उतरी थी अब हमारे देश से २३००० हज़ार करोड़ रुपए का राजस्व कमाने के साथ सबसे बड़ी बाहरीकम्पनी बन चुकी है , भारत के मोबाइल बाज़ार में इसकी भागीदारी २९ प्रतिशत है , अब वह टीवी, पावर बैंक , ऐयरप्युरिफ़ायर, साउंड बार, हेडसेट, ब्लू टूथ में भी बड़ा खिलाड़ी बन रही है , उसके टीवी सेट बाज़ार में सबसे सस्ते और सबसेबेहतर हैं जल्दी ही वह बड़े बड़े टीवी ब्रांड को ठिकाने लगा देगी . पिछले साल उसके व्यवसाय में १५० प्रतिशत वृद्धि हुई है .

हम और आप भारतीय ब्रांड के जो मोबाइल देखते हैं वे भी चीनी आयात पर निर्भर हैं . टेलिकाम इक्विप्मेंट मेन्यूफ़ेकचरर्सएसोसिएशन के अध्यक्ष एन के गोयल का कहना है कि भारत में बनने वाले मोबाइल के ९० प्रतिशत हिस्से चीन से आते हैं .

इससे भी गम्भीर बात यह है इस समय चीनी उत्पाद स्वीडिश , जापानी ब्रांड पर सवार हो कर भारत में आ रहे हैं . चीन कीएक रीटेल शृंखला मिनिसो एक जापानी रीटेल ब्रांड पर सवार हो कर हमारे देश में धंधा कर रही है . यह ब्रांड इन दिनोंअपने बेहतरीन डिज़ाइन और वाजिब दाम के कारण युवाओं में बेहद लोकप्रिय है.

कितने ही वित्तीय लेनदेन , गेमिंग और शिक्षा के मोबाइल ऐप , ई-डिलीवरी प्लेटफ़ार्म प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चीनीकम्पनियों के हैं या फिर उनमें चीनी निवेश है .

इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालीन योजना बनाने की तत्काल ज़रूरत है ताकि चीनी व्यावसायिक घुसपैठ केमकड़जाल से छुटकारा मिल सके . यही नहीं हमारे उद्योग को चीनी कम्पनियों की सप्लाई पर निर्भरता भी कम से कम हो सके .

(लेखक ब्रांड सलाहकार हैं एवं स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से सेवा निवृत्त हैं)

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