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मीडिया चौपाल में सार्थक संवाद के साथ सुनी-अनसुनी, कही-अनकही का दौर भी

हरिद्वार स्थित निष्काम सेवा ट्रस्ट में चल रहे पाँचवे मीडिया चौपाल का अंतिम दिन ‘संदेशों के अकाल का कैसे हो समाधान’, ‘भारत के भावी विकास की दिशा’ , भावी भारतः मीडिया से अपेक्षाएं’ जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

चौपाल के दूसरे दिन कई मुद्दों पर सार्थक संवाद के साथ कही-अनकही, सुनी-अनसुनी का भी दौर चला, किसी विषय पर वक्ता ने शब्दों का जादू बाँधा तो कुछ वक्ताओं ने श्रोताओं को ऐसा निराश किया कि सिर पीटने की इच्छा होती रही। कई बार संवाद विवाद बन गया औरकार्यक्रम के सूत्रधार वक्ताओँ के विषय को ही नहीं समझ पाए और टीवी एंकरों वाली निरर्थक भूमिका में दिखाई दिए, इन तमाम कमियों के बावजूद चौपाल कई मायनों में एक सार्थक भूमिका के साथ कई उपयोगी संदेश देने में कामयाब रही। अगल बार चौपाल के आयोजकों को सूत्रधार के रूप में तथाकथित अनुभवी पत्रकारों की बजाय उन नए चेहरों को मौका देना चाहिए जो ऐसे आयोजनों में अपनी बात कहने आते हैं।

चौपाल के दूसरे दिन लखनऊ विश्वविद्यालय के मीडिया व दूरसंचार संस्थान की छात्राएँ सूत्रधार भास्कर भुवनेश के टीवी एंकर बन जाने की वजह से अपने शोध को लेकर बात तक नहीं कर पाई, न उनसे श्रोताओं का संवाद ही हो सका। आस्था तिवारी प्रधान मंत्री की जनधन योजना पर अपे शोध की रिपोर्ट प्रस्तुत कर रही थी मगर सूत्रधार की टोंका टोकी और बात पूरी होने के पहले ही श्रोताओं के सवाल पूछने की उत्सुकता ने उनका पूरा उत्साह ठंडा कर दिया। हालाँकि तमाम टोका-टाकी के बावजूद उन्होंने अपने शोध के कई रचनात्मक निष्कर्ष प्रस्तुत किए।

शोध छत्रा मोनिका सिंह गरीब परिवारों के लिए बनाई गई सरकारी योजनाओं के बारे में गरीब महिलाओं पर किए गए शोध पर अपना अनुभव साझा करना चाहती थी मगर सूत्रधार की टोंका-टाकी ने उनका उत्साह भी ठंडा कर दिया। सौम्या श्रीवास्तव को बाराबंकी जिले के किसानों को सरकारी संचार माध्यमों से मिलने वाली सूचनाओँ पर अपने शोध के निष्कर्ष जरुर सफलता पूर्वक प्रस्तुत किए। अदिती श्रीवास्तव ने छात्रों में रंग भेज के मुद्दे पर शोध के निष्कर्ष प्रस्तुत किए। रमांशी मिश्रा ने एसिड अटैक की पीड़ित युवतियों द्वारा लखनऊ और आगरा में शुरु किए गए शीरोज़ कैफे पर प्रस्तुत रिपोर्ट में कहा कि ये युवतियाँ गंभीर सामाजिक समस्या से जूझ रह है लेकिन मीडिया का ध्यान इन पर नहीं गया है।

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चर्चा के दौरान बिज़नेस स्टैंडर्ड के श्री ऋषभ ने कहा कि पत्रकारों को नए नए विषय खोजकर उन पर लिखना चाहिए। उन्होंने कोटा का उदाहरण देते हुए कहा कि यहाँ कोचिंग के लिए आने वाले छात्रों से कोटा की सामाजिक व आर्थिक स्थिति पर अच्छी रिपोर्ट लिखी जा सकती है या ऐसे कई विषय खोजे जा सकते हैं

सत्र में नेशनल बुक ट्रस्ट के श्री बलदेव भाई शर्मा ने श्रोताओं के धैर्य और साहस की ज़बर्दस्त परीक्षा ली और पाँच मिनट के बजाय पूरे आधे घंटे तक एक दो लाईनों को घुमाफिराकर बार बार बोलते रहे, श्रोताओँ ने बार बार तालियाँ बजाकर उनको अपने वक्तव्य को विराम देने की सूचना दी मगर वे तालियों की गड़गड़ाहट को तारीफ समझकर उसी मुद्दे पर लगातार बोलते ही रहे और जो भी बोले उसमें नया कुछ नहीं था।

चौपाल को संबोधित करते हुए देव संस्कृति विश्वविद्यालय के संचार एवं जनसंपर्क विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुखनन्दन सिंह ने कहा कि यदि मीडिया किसानों के बीच जाकर खेती से होने वाले फायदों को बताएं तो, लोगों में मीडिया के प्रति रूझान व विश्वास बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि संचार के प्रति लोगों में विश्वसनीयता बढ़ाने की आवश्यकता है।

चौपाल के दौरान डॉ. प्रवीण कुमार झा की पुस्तक ‘टेलीविजन चैनल और सत्य कथकरण’ का लोकार्पण डॉ. सुखनन्दन सिंह, अनिल सौमित्र, आशीष अंशु द्वारा किया गया। कार्यक्रम में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के छात्र-छात्राओं एवं देश के लगभग 300 मीडियाकर्मी मौजूद थे। समकालीन व समाज के ज्वलंत मुद्दों पर आधारित पांचवे मीडिया चौपाल को अंतिम चरण पर ले जाते हुए स्पंदन संस्था के संयोजक अनिल सौमित्र ने सबका आभार व्यक्त करते हुए अगले चौपाल की घोषणा की। समारोह में केसर सिंह, डा अजय निराला, डा. स्मिता वशिष्ट, आशीष अंशु, रितेश पाठक, मीनाक्षी अरोड़ा, आशुतोष सिंह मौजूद थे।

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