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मुख्य न्यायाधीश को याद आए युध्द के दिनों के भयावह दिन

भारत और पाकिस्तान के जारी तनाव के मध्य सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने 1965 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध का गहराई से जिक्र किया है। ठाकुर ने 1965 में हुए वॉर को याद करते हुए कहा कि उस समय वह लड़के थे और जम्मू में रहते थे। युद्ध के 18-20 दिन बाद कर्नल रूप सिहं हमे उस इलाके में ले गए जो पाकिस्तान से युद्ध में पूरी तरह से तबाह हो गया था और हमारे द्वारा कब्जा किया गया था। जब मुझे युद्ध का कब्रिस्तान देखने को मिला। सतह पर लोगों की जली हुई लाशें पड़ी थीं, जिस पर मिट्टी की एक परत सी थी। क्योंकि किसी पास इतना समय नहीं था कि वह लाशों को विधिवत दफना सके। मैंने देखा आर्मी के जूते पहने पैर को कुत्तों द्वारा खाया जा रहा था। ठाकुर ने यह बात एक एक कार्यक्रम के दौरान कही। कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व गृह मंत्री शिवराज पाटिस और पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

चीफ जस्टिस ने कहा कि कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कभी युद्ध नहीं देखा है। यह बहुत ही हतोत्साहित करने वाला अनुभव था। हर तरफ अफवाह थी कि पाकिस्तानी ट्रुपर्स आए और भारतीयों की हत्या करके चले गए। शहर पूरी तरह से बर्बाद हो गए थे क्योंकि लोग पलायन करने लगे थे। सिर्फ दो ही दुकानें अच्छा बिजनेस कर रही थी। एक ट्रंक रिपेयर शॉप (बक्सा बनाने वाली दुकानें), जहां लोग अपना ट्रंक ठीक करवाने आ रहे थे, जिसमें वह अपना कीमती समान रखकर यहां से जा सके और दूसरा पोल्ट्री की दुकानें जहां लोग कुछ खाना होने की आशा लिए जाते थे। यहां तक सूरज डूबने के बाद लैंप और सिगरेट जलाना भी एक समस्या थी। पड़ोसी विरोध करने लगते थे कि कहीं दुश्मन लाइट देखकर निशाना न लगा ले।

साभार- इंडियन एक्सप्रेस से



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