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मुंबई सेंट्रल में कोचिंग डिपो स्वचालित कोच वॉशिंग प्लांट लगा

मुंबई। चाहे ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के लिए पुश-पुल परियोजना हो या फिर सौर ऊर्जा पेनलों की स्थापना, पश्चिम रेलवे ने हमेशा विभिन्न तरीकों से हरित प्रौद्योगिकी को बखूबी प्रोत्साहित किया है। इन्हीं प्रयासों के क्रम में, पश्चिम रेलवे ने हाल ही में अपने मुंबई डिवीजन के मुंबई सेंट्रल कोचिंग डिपो में एक स्वचालित कोच वाशिंग प्लांट की शुरुआत की है। यह स्वचालित संयंत्र ट्रेनों की पूरी धुलाई प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से पूरा करने के दौरान समय, पानी और मानव श्रम शक्ति को कम करने में मदद करता है। संयंत्र के स्वचालन और बेहतर दक्षता के कारण, यह उम्मीद की जा रही है कि इससे डिपो की बाहरी धुलाई लागत में प्रति वर्ष लगभग 68 लाख रु. की बचत सुनिश्चित होगी।

पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी श्री सुमित ठाकुर द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस संयंत्र में एक प्री-वैट स्टेशन, 4 वर्टिकल ब्रशिंग इकाइयाँ, फिक्स्ड डिस्क ब्रशेज़ का एक सेट, रीट्रैक्टेबल डिस्क ब्रशेज़ का एक सेट, फाइनल रिंस टावर्स दो जोड़े और एक ब्लोअर मुख्य रूप से शामिल हैं। स्वचालित कोच वॉशिंग प्लांट एक कैप्टिव एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट से लैस है और ईटीपी से अंतिम निर्वहन पर्यावरणीय मानदंडों को पूरा करता है। संयंत्र अपनी इकाई के माध्यम से रेक के संवेदीकरण को स्वचालित रूप से संचालित करता है और 20 मिनट के भीतर एक 24 कोचों वाले रेक को धोया जाता है। संयंत्र पानी के उपयोग में बहुत कुशल है और लगभग 60% कम पानी का उपयोग करता है। इसके फलस्वरूप मैन्युअल धुलाई की तुलना में हर साल लगभग 18 मिलियन लीटर ताज़े पानी की बचत सुनिश्चित होगी, जो एक पूरे वर्ष के लिए 365 शहरी व्यक्तियों की ताजे पानी की आवश्यकता के बराबर अनुमानित है। इस अनूठे संयंत्र की कुल लागत 1.67 करोड़ रु. है और इसका उपयोग 30 दिसम्बर, 2020 से शुरू कर दिया गया है। श्री ठाकुर ने बताया कि ऑटोमैटिक कोच वॉशिंग प्लांट पर्यावरण के अनुकूल और एक बेहतरीन लागत प्रभावी विकल्प है, जो ट्रेन के रखरखाव में स्वचालन की दिशा में एक बड़ी और अभिनव पहल है।