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कैनवास पर उकेरे आजादी के रंग – बूंदी ब्रश संस्थान की “रंग दे बसंती” कार्यशाालै

आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में रविवार को बूंदी ब्रश संस्थान की ओर से ‘रंग दे बसंती ‘ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कलाकारों ने 75 फीट के केनवास पर चित्र बनाकर आजादी के महोत्सव को जीवन्त कर दिया । कार्यक्रम का शुभारंभ जिला कलेक्टर रेणु जयपाल, सभापति मधु नुवाल ने द्वीप प्रज्ज्वलित कर चित्र बनाकर किया । इस अवसर पर जिला कलेक्टर ने कहा कि चित्रकारों द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव अंतर्गत कार्यक्रम काबिले तारीफ है। इस तरह के आयोजन से चित्रकारों को अपना हुनर दिखाने का अवसर मिलता है। साथ ही नए चित्रकारों को भी सीखने का मौका मिलता है ।

जिला कलेक्टर व सभापति का स्वागत संस्थान के अध्यक्ष सुनील जांगिड़ , नंदप्रकाश ने किया । इस अवसर पर चित्रकला प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया जिसमें विद्यार्थियों ने एक से बढ़कर एक चित्र बनाए । प्रतियोगिता में जूनियर वर्ग में नीलेश , नैवेद्या , आरना , मनीषा प्रथम रहे। सीनियर वर्ग में रौनक , खुशी , प्रियांशी , ऋषभ , काजल व संजय वर्मा प्रथम रहे। विजेताओं को बूंदी ब्रश की ओर से स्मृति चिन्ह व प्रमाण पत्र इंटेक के राजकुमार दाधीच , अध्यक्ष सुनील जागिड़ पंकज सिसोदिया , ननजी शर्मा , रचना पंचोली व मदन गोपाल खत्री ने दिए ।
बूंदी ब्रश के कलाकारों ने 75 फीट केनवास पर चित्र बनाकर रोड शो किया। चित्रकारों में लाभचंद ने छत्रपति शिवाजी का चित्र उकेरा ।

चित्रकार भँवर सिंह सोलंकी ने धाभाई कुंड की छतरियां बनाई । चित्रकार सुनील ने आजादी के बलिदान का चित्रांकन किया। चित्रकार विजय सोलंकी ने महाराणा प्रताप की सिंह शक्ति को चित्र में दर्शाया । कोटा के चित्रकार विवेक उतरेजा ने लोक संस्कृति एवं विरासत, हेमराज और रचना ने वीर कुम्भा व विरासत का चित्र बनाया । राजीव मीणा ने शहीद स्मारक, युक्ति व प्रियांश ने सुखमहल, हर्षा गौड़ ने राष्ट्रीय पक्षी, शिवानी सुवालका ने रेगिस्तान का जहाज ऊँट का चित्र बनाया । लक्ष्मी जांगिड़ , किरण शर्मा व पारुल यादव ने आजादी का महोत्सव चित्र में दर्शाया । पंकज सिसोदिया ने आजादी के जश्न का चित्रण किया । युग प्रसाद ने आजादी का संघर्ष,रामप्रसाद सैनी ने बूंदी की विरासत, रिंकू मीना ने देश प्रेम, रीना जांगिड़ ने लाल किला, दिनेश , ननजी ने आजादी के दीवाने का चित्र उकेरा । कार्यशाला में 75 फिट केनवास पर बने आजादी के अमृत महोत्सव के चित्रों को राहगीरों ने रुचि पूर्वक देखा और चित्रकारों का स्वागत किया ।

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